
केरल : प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रामाक्कलमेडु के पास अमाप्पारा में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया सोलर पावर प्लांट प्रोजेक्ट जंगल में अतिक्रमण के कारण प्रभावित हो रहा है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को बिजली उत्पादन शुरू होने से पहले ही नुकसान पहुंचने लगा है।
यह परियोजना सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा दोनों से एक साथ बिजली उत्पादन के उद्देश्य से शुरू की गई थी। लेकिन जंगल क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण और सुरक्षा की कमी के कारण अब इसकी संरचना और उपकरणों पर खतरा मंडरा रहा है।
2022 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
जानकारी के अनुसार, अमाप्पारा सोलर पावर प्लांट परियोजना की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी। इसका उद्देश्य क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और सौर एवं पवन ऊर्जा के संयुक्त उपयोग से बिजली उत्पादन करना था।
परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी अनार्ट (ANERT) को दी गई थी। इसमें तकनीकी सहयोग सिडैक (C-DAC) और केल्ट्रॉन (Keltron) जैसी संस्थाओं ने दिया था।
यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के लिए ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
बिजली उत्पादन शुरू होने से पहले आई परेशानी
स्थानीय लोगों और अधिकारियों के अनुसार, परियोजना का पूरा लाभ मिलने से पहले ही अतिक्रमण की समस्या सामने आने लगी।
जंगल क्षेत्र में अनधिकृत गतिविधियों के कारण सोलर प्लांट की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। इससे परियोजना में लगे उपकरणों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं रोका गया तो करोड़ों रुपये की यह परियोजना पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
सोलर और विंड एनर्जी का था लक्ष्य
अमाप्पारा परियोजना को विशेष रूप से इस उद्देश्य से तैयार किया गया था कि यहां सौर ऊर्जा और हवा से बिजली उत्पादन दोनों को एक साथ बढ़ावा दिया जा सके।
पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां हवा की उपलब्धता को देखते हुए इसे हाइब्रिड एनर्जी प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया गया था।
ऐसे प्रोजेक्ट भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
पर्यावरण और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र
रामाक्कलमेडु क्षेत्र केरल के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ी इलाकों को देखने पहुंचते हैं।
अमाप्पारा क्षेत्र में स्थापित यह परियोजना पर्यटन और ऊर्जा विकास दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
लेकिन जंगल क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण ने इस परियोजना की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े निवेश वाली परियोजना की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए थे।
लोगों ने मांग की है कि प्रशासन और संबंधित विभाग जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करें ताकि परियोजना को और नुकसान से बचाया जा सके।
अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी
नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में सरकार करोड़ों रुपये निवेश कर रही है। ऐसे में उनकी सुरक्षा और रखरखाव बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऊर्जा परियोजना की सफलता केवल निर्माण तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी सुरक्षा और लंबे समय तक संचालन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
जल्द कार्रवाई की जरूरत
अमाप्पारा सोलर पावर प्लांट को लेकर अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह अतिक्रमण को नियंत्रित करे और परियोजना को सुरक्षित बनाए।
यदि समय पर कदम नहीं उठाए गए तो न केवल आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की योजना भी प्रभावित हो सकती है।
करोड़ों की परियोजना पर संकट
16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना केरल में हरित ऊर्जा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। लेकिन बिजली उत्पादन शुरू होने से पहले ही इसके सामने आई समस्या ने चिंता बढ़ा दी है।
अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है कि क्या समय रहते अतिक्रमण हटाकर इस महत्वपूर्ण परियोजना को बचाया जा सकेगा।





