
कोच्चि: सोमवार को हाई कोर्ट ने कहा कि PSC प्लानिंग बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन में भ्रष्टाचार हुआ है। कोर्ट ने केरल लोक सेवा आयोग (PSC) से सवाल किया कि क्या कथित गड़बड़ियों के बारे में जनता को पता न चले, इसलिए उम्मीदवारों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं (answer scripts) नहीं दी गईं?
कोर्ट ने PSC से पूछा, "क्या उम्मीदवारों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं इसलिए नहीं दी गईं ताकि जनता को इस धांधली के बारे में पता न चल सके?"
कोर्ट ने कहा कि यह मामला नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं से जुड़ा है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत करने वाले युवाओं के भविष्य को बचाना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि PSC को जांच से डरने के बजाय, जांच में सहयोग करना चाहिए।
आयोग ने तर्क दिया कि सरकार के पास उसके खिलाफ जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है, और इसके लिए भारत के राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति जरूरी है।
PSC ने कहा कि सरकार का आदेश गैर-कानूनी है, क्योंकि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (PC Act) की धारा 17A के तहत पूर्व मंजूरी लेना जरूरी होता है।





