
तिरुवनंतपुरम: केरल के जैव-विविधता से भरपूर बैकवाटर्स में से एक को फिर से जीवित करने की कोशिश में, परावुर झील के किनारे कुल 20,000 मैंग्रोव के पौधे लगाए जाएंगे।
1 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह पहल टेक्नोपार्क स्थित IT कंपनी 'ट्राइज़ेन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा 'हेल्प फाउंडेशन' और 'मय्यानाड पंचायत' के सहयोग से की जा रही है। यह कोशिश एक दशक से भी ज़्यादा समय बाद हो रही है, जब वेटलैंड (आर्द्रभूमि) में मैंग्रोव लगाने का पिछला अभियान सफल नहीं हो पाया था।
यह पहल परावुर झील के पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शुरू की गई है, जहाँ गाद जमा होने, पानी की गहराई कम होने और किनारे के कटाव से जलीय जीवन और वेटलैंड के लंबे समय तक बने रहने पर खतरा मंडरा रहा है।
वेटलैंड संरक्षण में माहिर NGO 'हेल्प फाउंडेशन' ने पिछले छह महीनों में एक खास नर्सरी में लगभग 20,000 मैंग्रोव के पौधे तैयार किए हैं। फाउंडेशन के चेयरमैन और डायरेक्टर पीटर प्रदीप ने कहा कि मैंग्रोव के पौधे तैयार करने में बहुत मेहनत लगती है।
पीटर ने कहा, "इस प्रक्रिया की शुरुआत वेम्बनाड और अष्टमुडी झीलों से प्राकृतिक रूप से गिरे मैंग्रोव के बीज इकट्ठा करने से होती है। इन बीजों को बहुत सावधानी से कोल्लम ले जाया जाता है, झील की मिट्टी में लगाया जाता है और उथले पानी वाले बिस्तरों (बेड्स) में तब तक पाला-पोसा जाता है जब तक कि वे लगभग दो से ढाई फीट ऊंचे न हो जाएं।"





