केरल

केरल में घरेलू हिंसा के 10,000 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए

Subhi
7 Oct 2026 9:21 AM IST
केरल में घरेलू हिंसा के 10,000 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए
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कोच्चि: केरल में घरेलू हिंसा कई रूपों में जारी है - शारीरिक और भावनात्मक शोषण से लेकर आर्थिक नियंत्रण और यौन हिंसा तक। पीड़ितों के साथ काम करने वाले वकीलों और अधिकारियों का कहना है कि चिंता की बात यह है कि कई मामले शादीशुदा घरों के भीतर ही छिपे रह जाते हैं।

'सेंटर फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल राइट्स रिसर्च एंड एडवोकेसी' की निदेशक वकील संध्या राजू के अनुसार, जो महिलाएं सहायता संगठनों से संपर्क करती हैं, वे शोषण के अलग-अलग रूपों के बारे में बताती हैं; अक्सर विस्तृत काउंसलिंग के बाद ही यौन हिंसा का मामला सामने आता है।

उन्होंने कहा, "शुरुआत में महिलाएं इसे शारीरिक शोषण के तौर पर नहीं बतातीं। जब हम और गहराई से पूछते हैं, तो अक्सर यौन हिंसा की बात सामने आती है।" उन्होंने कहा, "कई महिलाएं हमें बताती हैं कि उनके पति शराब पीने पर ही ऐसा व्यवहार करते हैं और बाकी समय वे अच्छे इंसान होते हैं। दुर्भाग्य से, उनमें से कुछ तो 30 में से 28 दिन शराब पीते हैं।"

संध्या ने कहा कि पोर्नोग्राफी भी यौन हिंसा का कारण बन सकती है, खासकर तब जब आरोपी अपने पार्टनर से कुछ खास तरह की यौन प्रतिक्रिया की उम्मीद करते हैं और उम्मीदें पूरी न होने पर हिंसक हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि परिवार के समर्थन की कमी के कारण महिलाएं अक्सर शोषणकारी शादी में फंसी रह जाती हैं। परिवार शादी के बाद बेटियों के घर लौटने को लेकर हिचकिचा सकते हैं, जिससे कुछ महिलाओं को लगता है कि शोषण करने वाले पति के साथ रहना ही उनके पास एकमात्र विकल्प है। साथ ही, युवा महिलाएं शादी से जुड़ी पारंपरिक उम्मीदों को चुनौती दे रही हैं। महिलाएं, जिनमें ग्रामीण इलाकों की महिलाएं भी शामिल हैं, बराबरी की साझेदारी चाहती हैं और शादी से अपनी उम्मीदों के बारे में खुलकर बात कर रही हैं।

संध्या ने कहा, "महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन पुरुषों में वैसी जागरूकता नहीं आ रही है। उस तरफ भी समान जागरूकता की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि दहेज की उम्मीदें भी अक्सर अप्रत्यक्ष रूप से जताई जाती हैं। भले ही कोई परिवार कहे कि उन्हें दुल्हन पक्ष से कुछ नहीं चाहिए, फिर भी मन में यह उम्मीद हो सकती है कि कुछ न कुछ दिया जाना चाहिए।

संध्या ने कानूनी सुरक्षा और असल सुरक्षा के बीच के अंतर की ओर भी इशारा किया। हाल ही के एक मामले में, एक महिला ने अदालत से सुरक्षा आदेश प्राप्त किया था, जिसके पति पर ड्रग्स लेने का आरोप था और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज थे। हालांकि, उसके लौटने के बाद उसे और भी परेशान किया गया। उसने कहा, "उसे लगा था कि पुलिस उसकी रक्षा करेगी। लेकिन जब वह दोबारा आया और उसके साथ मारपीट की, तो फ़ोन करने के बावजूद पुलिस नहीं आई। आखिरकार उसने 112 और 181 पर संपर्क किया।"

आर्थिक शोषण भी एक वजह है। संध्या ने एक ऐसे मामले का ज़िक्र किया जिसमें एक महिला सालों से गुज़ारे-भत्ते (मेंटेनेंस) के लिए लड़ रही थी और अपने बच्चों की स्कूल फ़ीस भरने के लिए संघर्ष कर रही थी, क्योंकि कोर्ट के आदेश के बावजूद उसके शराबी पति ने आर्थिक मदद देने से इनकार कर दिया था।

एक और मामले में, एक महिला को घर चलाने और अपने चार बच्चों की देखभाल के लिए ज़रूरी पैसों के बदले अपने पति की ज़बरदस्ती का शिकार होना पड़ा। संध्या ने कहा कि ऐसा व्यवहार यौन शोषण और घरेलू हिंसा का हिस्सा है, भले ही कानून शादी के बाहर होने वाले रेप की तरह वैवाहिक रेप (marital rape) को अपराध नहीं मानता।

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