
Karnataka कर्नाटक: उत्तर कन्नड़ जिले के येल्लापुर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 69 वर्षीय एक सीनियर सिटिज़न से साइबर अपराधियों ने करीब 1.74 करोड़ रुपये ठग लिए। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस बताकर पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसा लिया।
पीड़ित की पहचान शिवानंद हेगड़े (69) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने उन्हें फोन कर बताया कि आतंकवादियों ने उनके आधार क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर एक बैंक खाता खोला है, जिसका उपयोग बड़े वित्तीय लेन-देन के लिए किया जा रहा है। इस झूठे आरोप के जरिए आरोपियों ने बुजुर्ग को डराकर अपने जाल में फंसा लिया।
CEN पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि यह घटना 21 अप्रैल को शुरू हुई, जब शिवानंद हेगड़े को पहली बार कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से जुड़े खाते की जांच चल रही है, क्योंकि उसमें संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि पीड़ित को एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहनकर संपर्क किया, जिससे वह पूरी तरह भ्रमित हो गए। इसी दौरान उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि वे जांच प्रक्रिया में सहयोग करें और किसी को भी इसकी जानकारी न दें।
इसके बाद आरोपी लगातार उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” की स्थिति में बनाए रखते रहे, जिसमें पीड़ित को मानसिक रूप से यह महसूस कराया गया कि वे पुलिस हिरासत में हैं और उनके खिलाफ गंभीर जांच चल रही है। इसी दबाव में उन्होंने अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए अपने बैंक खाते से कुल 1.74 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस ने बताया कि इस तरह के स्कैम में अपराधी तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर लोगों को डराते हैं और उनसे बड़ी रकम वसूल लेते हैं। इस मामले में भी ठगों ने आधार कार्ड और आतंकवाद के झूठे आरोप का सहारा लेकर विश्वास पैदा किया।
घटना का खुलासा होने के बाद येल्लापुर के CEN पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है और साइबर अपराधियों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने बैंक लेन-देन और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच भी शुरू कर दी है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह की कार्रवाई नहीं करती है। ऐसे किसी भी कॉल पर विश्वास न करें और तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचना दें।
यह मामला एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर बढ़ते खतरे को उजागर करता है, जिसमें विशेष रूप से बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है।





