कर्नाटक

मैसूर राजपरिवार पर यतींद्र सिद्धारमैया का बयान, बोले- अंबारी मुफ्त नहीं लेते

Kavita2
26 Oct 2026 1:51 PM IST
मैसूर राजपरिवार पर यतींद्र सिद्धारमैया का बयान, बोले- अंबारी मुफ्त नहीं लेते
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मैसूर। कर्नाटक में मैसूर राजपरिवार और राज्य सरकार के बीच महल तथा दशहरा उत्सव से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर विवाद सामने आया है। यतींद्र सिद्धारमैया ने सोमवार को प्रमोदा देवी वाडियार द्वारा मीडिया को लिखे गए पत्र पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार शाही परिवार का पूरा सम्मान करती है और उनकी शिकायतों का समाधान करने के लिए हमेशा तैयार है। इसके बावजूद संबंधित मुद्दे को सीधे सरकार के सामने रखने के बजाय मीडिया के माध्यम से उठाना उचित नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि दशहरा उत्सव के दौरान इस्तेमाल होने वाली अंबारी और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं के लिए सरकार भुगतान करती है। ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार इन सुविधाओं का मुफ्त में इस्तेमाल करती है।

प्रमोदा देवी वाडियार के पत्र पर जताई नाराजगी

मीडिया से बातचीत के दौरान यतींद्र सिद्धारमैया ने प्रमोदा देवी वाडियार द्वारा लिखे गए पत्र को लेकर असंतोष व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यदि शाही परिवार को किसी व्यवस्था से संबंधित परेशानी थी, तो इस बारे में सीधे राज्य सरकार को जानकारी दी जा सकती थी।

उनके अनुसार, सरकार लगातार राजपरिवार के संपर्क में रही है और समस्याओं को दूर करने के लिए तैयार है।

इसके बावजूद सरकार को पहले सूचित किए बिना मीडिया को पत्र लिखना उन्हें उचित नहीं लगा।

हालांकि प्रमोदा देवी वाडियार के पत्र की पूरी सामग्री उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनकी सभी आपत्तियों और मांगों के बारे में निश्चित जानकारी नहीं दी जा सकती।

'अंबारी मुफ्त में नहीं मिल रही'

यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि मैसूर दशहरा उत्सव के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली अंबारी सरकार को मुफ्त में उपलब्ध नहीं कराई जाती।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके उपयोग के लिए राज्य सरकार भुगतान करती है।

उनके मुताबिक, उत्सव से जुड़ी व्यवस्थाओं में सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाती है।

उन्होंने कहा कि यदि भुगतान या किसी अन्य व्यवस्था को लेकर कोई समस्या थी, तो उसे बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता था।

हालांकि सरकार की ओर से अंबारी या संबंधित स्थान के उपयोग के लिए कितनी राशि दी जाती है, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

महल और जमीन के स्वामित्व पर दिया बयान

यतींद्र सिद्धारमैया ने महल और उससे संबंधित भूमि के स्वामित्व को लेकर भी अपनी बात रखी।

उन्होंने दावा किया कि महल और उससे जुड़ी जमीन सरकार के स्वामित्व में है।

इसके बावजूद शाही परिवार को रहने के लिए स्थान उपलब्ध कराया गया है और उन्हें पूरा सम्मान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि महल का एक हिस्सा राजपरिवार के निवास के लिए आरक्षित है।

हालांकि महल और संबंधित संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर उनके बयान को सरकार का पक्ष माना जाना चाहिए। संपत्ति के कानूनी स्वामित्व और अधिकारों का अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों तथा लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही किया जा सकता है।

राजपरिवार के लिए आरक्षित है महल का हिस्सा

यतींद्र सिद्धारमैया के अनुसार, महल के एक हिस्से में शाही परिवार के रहने की व्यवस्था है।

उन्होंने कहा कि सरकार राजपरिवार के सम्मान और सुविधाओं का ध्यान रखती है।

उनका कहना था कि महल से जुड़ी व्यवस्थाओं में राजपरिवार की आवश्यकताओं को नजरअंदाज नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि दशहरा उत्सव से संबंधित कुछ स्थानों के उपयोग के लिए सरकार भुगतान करती है।

इस बयान के जरिए उन्होंने स्पष्ट करने की कोशिश की कि सरकार और राजपरिवार के बीच व्यवस्थाएं आपसी समन्वय के आधार पर संचालित होती रही हैं।

जंबू सवारी से जुड़ा है पूरा मामला

मैसूर दशहरा उत्सव अपनी भव्यता और ऐतिहासिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है।

इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण जंबू सवारी जुलूस होता है।

जुलूस के दौरान सुसज्जित हाथी पर स्वर्ण अंबारी में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को विराजमान किया जाता है।

इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

जंबू सवारी मैसूर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इससे जुड़ी परंपराओं में पूर्व राजपरिवार की ऐतिहासिक भूमिका रही है, जबकि वर्तमान समय में आयोजन की विभिन्न प्रशासनिक व्यवस्थाओं में राज्य सरकार की प्रमुख भूमिका होती है।

सरकार और राजपरिवार के बीच समन्वय जरूरी

मैसूर दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख प्रतीक भी है।

इस आयोजन में प्रशासनिक विभागों, धार्मिक संस्थाओं और परंपरागत व्यवस्थाओं से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय आवश्यक होता है।

ऐसे में किसी भी प्रकार की शिकायत या मतभेद सामने आने पर बातचीत महत्वपूर्ण हो जाती है।

यतींद्र सिद्धारमैया ने भी इसी बात पर जोर दिया कि सरकार राजपरिवार से संवाद बनाए हुए है।

उनके अनुसार, यदि किसी व्यवस्था को लेकर असहमति थी, तो उसे सीधे सरकार के समक्ष उठाया जा सकता था।

'हम लगातार संपर्क में थे'

यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य सरकार शाही परिवार के लगातार संपर्क में रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार शिकायतों को सुनने और उनका समाधान करने के लिए तैयार है।

उनकी नाराजगी इस बात को लेकर थी कि प्रमोदा देवी वाडियार ने पहले संबंधित मुद्दा सरकार के ध्यान में नहीं लाया।

उन्होंने कहा कि अचानक मीडिया को पत्र लिखे जाने से विवाद सार्वजनिक हो गया।

हालांकि राजपरिवार और सरकार के बीच पूर्व में किन मुद्दों पर बातचीत हुई थी, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

राजपरिवार के सम्मान पर दिया जोर

यतींद्र सिद्धारमैया ने अपने बयान में यह भी कहा कि सरकार शाही परिवार को पूरा सम्मान दे रही है।

उनके अनुसार, महल में रहने की व्यवस्था और उत्सव से जुड़ी सुविधाओं के मामले में सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।

उन्होंने संकेत दिया कि सरकार राजपरिवार की शिकायतों के समाधान के खिलाफ नहीं है।

उनका कहना था कि समस्या को सीधे सामने रखा जाता, तो उस पर चर्चा की जा सकती थी।

इस बयान से स्पष्ट है कि सरकार सार्वजनिक विवाद के बजाय आपसी बातचीत के जरिए समाधान को प्राथमिकता देने की बात कर रही है।

सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा संवेदनशील विषय

मैसूर राजपरिवार का इतिहास और दशहरा उत्सव की परंपराएं लंबे समय से एक-दूसरे से जुड़ी रही हैं।

इसलिए महल, अंबारी और जंबू सवारी से संबंधित मुद्दे सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे मामलों में प्रशासनिक व्यवस्था के साथ ऐतिहासिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखना आवश्यक होता है।

सरकार और राजपरिवार के बीच सहयोग से आयोजन की व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित की जा सकती हैं।

हालांकि वर्तमान विवाद में प्रमोदा देवी वाडियार की विस्तृत प्रतिक्रिया और पत्र में उठाए गए सभी मुद्दों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

आगे बातचीत से समाधान की उम्मीद

यतींद्र सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया है कि सरकार राजपरिवार की शिकायतों को दूर करने के लिए तैयार है।

उन्होंने अंबारी और जंबू सवारी से संबंधित व्यवस्थाओं के लिए भुगतान किए जाने की बात भी कही है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और राजपरिवार के बीच इस मुद्दे पर आगे क्या बातचीत होती है।

फिलहाल यतींद्र सिद्धारमैया के बयान से यह स्पष्ट है कि सरकार प्रमोदा देवी वाडियार द्वारा मीडिया को पत्र लिखे जाने के तरीके से असहमत है। वहीं महल के उपयोग, भुगतान और राजपरिवार की शिकायतों से जुड़े मुद्दों का समाधान दोनों पक्षों के संवाद पर निर्भर करेगा।

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