
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के यादगिरी जिले के शाहपुर तालुक में 19 मई को प्रस्तावित ‘बसव शरण हिंदू समावेश’ कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्यक्रम का कई प्रमुख लिंगायत संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। ग्लोबल लिंगायत महासभा ने इसे बसवन्ना और शरण आंदोलन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया है।
यादगिरी शहर के जिला प्रेस हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्लोबल लिंगायत महासभा के अध्यक्ष आर.जी. शतगरा ने इस आयोजन पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि बसवन्ना के समानता, मानवता और शोषण-विरोधी विचारों को हिंदुत्व के ढांचे में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।
आर.जी. शतगरा ने कहा कि शरण आंदोलन हमेशा से जाति व्यवस्था, भेदभाव और ब्राह्मणवादी सोच के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक रहा है। ऐसे में इस आंदोलन के नाम पर ‘हिंदू समावेश’ जैसा कार्यक्रम आयोजित करना उसके मूल उद्देश्यों को कमजोर करने की कोशिश है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के आयोजनों से बसवादी विचारधारा को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम विचारधारा को प्रभावित करने और ऐतिहासिक आंदोलन के मूल संदेश को बदलने की दिशा में एक कदम है।
महासभा ने महाराष्ट्र के कडासिद्धेश्वर मठ के कन्नेरी स्वामीजी को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस तरह की भागीदारी से कार्यक्रम का स्वरूप और भी विवादास्पद हो गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर.जी. शतगरा ने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस कार्यक्रम को रोकना चाहिए, क्योंकि यह सामाजिक और वैचारिक रूप से गलत संदेश देता है।
स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और विभिन्न लिंगायत संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। कई संगठनों का मानना है कि बसवन्ना के विचारों को किसी भी धार्मिक या राजनीतिक ढांचे में सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कार्यक्रम को लेकर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।





