कर्नाटक

पूर्व सैनिकों को जमीन क्यों नहीं? आर अशोक ने कर्नाटक सरकार पर साधा निशाना

Kavita2
18 Aug 2026 12:06 PM IST
पूर्व सैनिकों को जमीन क्यों नहीं? आर अशोक ने कर्नाटक सरकार पर साधा निशाना
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बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने राज्य सरकार पर पूर्व सैनिकों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए बड़ा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोगिलु इलाके में अवैध प्रवासियों को घर देने की बात की जा रही है, तो देश की रक्षा में अपना जीवन दांव पर लगाने वाले पूर्व सैनिकों को जमीन का एक टुकड़ा क्यों नहीं दिया जा सकता।

आर. अशोक ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार अवैध रूप से बसे लोगों को सुविधाएं देने की बात कर रही है, जबकि दूसरी तरफ देश की सेवा कर चुके हजारों सैनिक अपने अधिकारों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

भाजपा नेता ने दावा किया कि राज्य में करीब 32,672 सैनिक अपने हक की मांग को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन सैनिकों ने सीमा पर तैनात रहकर देश की सुरक्षा की, आज वही लोग जमीन आवंटन जैसी मूलभूत मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

आर. अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की प्राथमिकताएं गलत दिशा में जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मामले में प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब जिलों में जमीन की पहचान हो चुकी है और उपलोकायुक्त की ओर से भी निर्देश दिए जा चुके हैं, तो फिर वित्त विभाग की मंजूरी में देरी क्यों की जा रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सवाल किया कि क्या सरकार के लिए सैनिकों के कल्याण से ज्यादा महत्वपूर्ण राजनीतिक हित हैं। अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार वोट बैंक की राजनीति के कारण सैनिकों के मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है।

विपक्ष के नेता ने कहा कि देश के सैनिक कठिन परिस्थितियों में रहकर सीमाओं की रक्षा करते हैं। ऐसे जवानों और उनके परिवारों को सम्मान और सुविधाएं देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।

आर. अशोक ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उन्हें सरकारी दफ्तरों में अपनी मांगों के लिए भटकना पड़ रहा है, जबकि अन्य मामलों में सरकार तेजी से फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि सैनिकों के प्रति सरकार का रवैया निराशाजनक है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवैध प्रवासियों के लिए जिस तरह की रियायतें दिखाई जा रही हैं, उसका एक छोटा हिस्सा भी पूर्व सैनिकों के लिए नहीं दिखाया जा रहा। उन्होंने कहा कि सरकार को सबसे पहले उन लोगों की चिंता करनी चाहिए जिन्होंने देश की सुरक्षा में योगदान दिया है।

भाजपा नेता के इस बयान के बाद कर्नाटक में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार पर सैनिकों और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, कांग्रेस सरकार की ओर से इस मामले में अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पूर्व सैनिकों को जमीन आवंटन का मुद्दा कर्नाटक में लंबे समय से चर्चा में रहा है। सैनिक संगठनों की ओर से भी समय-समय पर सरकार से मांग की जाती रही है कि सेवा पूरी कर चुके जवानों और उनके परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

जानकारों का मानना है कि पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील होते हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर सुरक्षा बलों और उनके परिवारों के सम्मान से जुड़ा होता है। किसी भी सरकार के लिए ऐसे मामलों में संतुलित और संवेदनशील रुख अपनाना जरूरी माना जाता है।

फिलहाल आर. अशोक के आरोपों के बाद यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में गरमा गया है। अब नजर इस बात पर होगी कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों की मांगों को लेकर क्या कदम उठाती है और क्या जमीन आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।

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