कर्नाटक

B नागेंद्र विवाद क्या है BJP की पदयात्रा से पहले समझिए पूरा मामला

Ratna Netam
26 Aug 2026 6:16 PM IST
B नागेंद्र विवाद क्या है BJP की पदयात्रा से पहले समझिए पूरा मामला
x
कर्नाटक : राजनीति में इन दिनों मंत्री **बी. नागेंद्र** को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कथित **वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले** को लेकर बीजेपी लगातार कांग्रेस सरकार पर हमलावर है और मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रही है। बीजेपी ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है, जिसके पहले नागेंद्र को लेकर दबाव और बढ़ गया है।
बीजेपी का आरोप है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री को पद छोड़ देना चाहिए। वहीं कांग्रेस सरकार का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और मंत्री की सीधी भूमिका साबित नहीं हुई है।
कौन हैं बी. नागेंद्र?
बी. नागेंद्र कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और बेल्लारी क्षेत्र की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वह अनुसूचित जनजाति (ST) वाल्मीकि नायक समुदाय से आते हैं और इस समुदाय में उनका राजनीतिक प्रभाव माना जाता है।
नागेंद्र कर्नाटक सरकार में मंत्री रह चुके हैं और अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान राजनीतिक विवाद से पहले भी वह कांग्रेस के लिए बेल्लारी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चेहरा रहे हैं।
उनकी राजनीति खासतौर पर आदिवासी समुदाय और क्षेत्रीय मुद्दों से जुड़ी रही है। यही वजह है कि कांग्रेस के लिए उनका राजनीतिक महत्व काफी अधिक माना जाता है।
क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?
बी. नागेंद्र का नाम कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित अनियमितताओं को लेकर चर्चा में आया। आरोप है कि निगम के फंड में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी हुई।
मामला तब सामने आया जब निगम के एक अधिकारी की मौत के बाद कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान बड़ी रकम के कथित गलत ट्रांसफर और वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मामला बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
बीजेपी क्यों मांग रही है इस्तीफा?
बीजेपी का कहना है कि मंत्री पद पर रहते हुए विभाग से जुड़े मामले में नैतिक जिम्मेदारी बनती है। पार्टी का तर्क है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक मंत्री को पद पर नहीं रहना चाहिए।
बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में भी विरोध किया और सरकार पर भ्रष्टाचार को बचाने का आरोप लगाया। इसके बाद पार्टी ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ पदयात्रा का ऐलान किया।
बीजेपी का कहना है कि जनता के बीच जाकर वह कथित घोटाले और सरकार की नीतियों को मुद्दा बनाएगी।
कांग्रेस का क्या कहना है?
कांग्रेस सरकार ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि विपक्ष राजनीतिक फायदे के लिए इस मुद्दे को उठा रहा है।
कांग्रेस का दावा है कि जांच में मंत्री की सीधी भूमिका साबित नहीं हुई है और केवल आरोपों के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे फैसला लिया जाएगा।
पदयात्रा से पहले बढ़ा राजनीतिक दबाव
बीजेपी की प्रस्तावित पदयात्रा ने इस मामले को और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। विपक्ष इस यात्रा के जरिए कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर हमला करने की तैयारी कर रहा है।
कर्नाटक में पहले से ही कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। ऐसे में नागेंद्र का मामला आने वाले दिनों में बड़ा चुनावी और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
नागेंद्र के इस्तीफे के राजनीतिक मायने
अगर बी. नागेंद्र इस्तीफा देते हैं तो इसका असर सिर्फ एक मंत्री पद तक सीमित नहीं रहेगा। नागेंद्र वाल्मीकि समुदाय के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं, इसलिए कांग्रेस के लिए यह सामाजिक और राजनीतिक संतुलन का सवाल भी बन सकता है।
वहीं बीजेपी इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश कर सकती है और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल बी. नागेंद्र को लेकर मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ रहा है। जांच की दिशा, विपक्ष का आंदोलन और कांग्रेस नेतृत्व का फैसला तय करेगा कि आगे की तस्वीर क्या होगी।
कर्नाटक की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। बीजेपी जहां इसे भ्रष्टाचार का मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति बता रही है।
Next Story