बेंगलुरु। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब विदाई की ओर है, लेकिन कर्नाटक के कावेरी बेसिन में जल संकट की चिंता कम नहीं हुई है। इस साल अपेक्षित बारिश नहीं होने के कारण प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में काफी नीचे है। ऐसी स्थिति में किसानों, कस्बों और शहरों को अगले वर्ष जून में मॉनसून की वापसी तक मौजूदा संग्रहित पानी पर ही निर्भर रहना पड़ सकता है।
28 सितंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कावेरी बेसिन के चार प्रमुख जलाशयों में कुल 59.5 टीएमसी फीट पानी उपलब्ध है। पिछले साल इसी अवधि में इन जलाशयों में 107.4 टीएमसी फीट पानी था। यानी कुल संग्रहण में करीब आधे के आसपास कमी दिखाई दे रही है।
स्थिति और चिंताजनक तब दिखती है जब लाइव स्टोरेज यानी वास्तविक उपयोग के लिए उपलब्ध पानी की तुलना की जाती है। इस वर्ष चारों जलाशयों में उपयोग योग्य पानी करीब 36.2 टीएमसी फीट है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह आंकड़ा 84.1 टीएमसी फीट था। इसका सीधा असर सिंचाई और पेयजल जरूरतों पर पड़ सकता है।
चारों प्रमुख जलाशयों की स्थिति अलग-अलग है, लेकिन लगभग सभी में पिछले वर्ष के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है। हेमावती जलाशय में इस समय क्षमता का करीब 41 प्रतिशत पानी मौजूद है। पिछले साल इसी समय जल स्तर लगभग 91 प्रतिशत था। यह सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।
केआरएस यानी कृष्णराज सागर जलाशय की स्थिति भी बेहतर नहीं है। पिछले वर्ष इस समय जलाशय करीब 96 प्रतिशत भरा हुआ था, जबकि इस बार जल स्तर लगभग 55 प्रतिशत है। केआरएस कावेरी बेसिन के सबसे महत्वपूर्ण जलाशयों में शामिल है और इससे सिंचाई के साथ कई शहरी क्षेत्रों की जलापूर्ति भी जुड़ी हुई है।
काबिनी जलाशय में भी पानी का स्तर पिछले साल से काफी कम है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां लगभग 93 प्रतिशत पानी था, जबकि इस बार यह करीब 58 प्रतिशत है। काबिनी से कई कृषि क्षेत्रों को पानी मिलता है और इसका जलस्तर नीचे रहने से किसानों की चिंता बढ़ सकती है।
हरंगी जलाशय की स्थिति बाकी तीन जलाशयों की तुलना में थोड़ी बेहतर है। यहां इस समय लगभग 73 प्रतिशत पानी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 94 प्रतिशत था। हालांकि यहां भी पिछले साल के मुकाबले कमी साफ दिखाई दे रही है।
कावेरी बेसिन में पानी की कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। कई कस्बे और शहर भी इन्हीं जलाशयों से मिलने वाले पानी पर निर्भर हैं। यदि आने वाले महीनों में बारिश नहीं होती है तो उपलब्ध जल भंडार का बेहद सावधानी से इस्तेमाल करना होगा।
मॉनसून की वापसी शुरू होने के साथ अब व्यापक बारिश की संभावना भी कम होती जा रही है। ऐसे में जलाशयों में बड़े स्तर पर नई आवक होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई है। अक्टूबर के बाद सामान्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का प्रभाव और घटता है, जिससे जलाशयों को भरने का प्रमुख समय लगभग समाप्त हो जाता है।
किसानों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सिंचाई पर निर्भर फसलों को आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता के अनुसार प्रबंधन करना पड़ सकता है। यदि जलाशयों से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी छोड़ना संभव नहीं हुआ तो कुछ क्षेत्रों में बुवाई और फसल चक्र प्रभावित हो सकता है।
राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध पानी का संतुलित वितरण होगी। पेयजल को प्राथमिकता देते हुए सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए पानी छोड़ने का फैसला परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है।
कावेरी बेसिन के जलाशयों में कमी का असर गर्मियों में और स्पष्ट हो सकता है। फरवरी से मई के बीच तापमान बढ़ने और पानी की मांग में तेजी आने से भंडारण पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में सितंबर के अंत में कम स्टोरेज चिंता का कारण बन सकता है।
बेंगलुरु समेत कई शहरी क्षेत्रों के लिए भी जल उपलब्धता महत्वपूर्ण है। शहर की बड़ी आबादी कावेरी से मिलने वाले पानी पर निर्भर है। यदि अगले कुछ महीनों में जलाशयों का स्तर लगातार गिरता है तो गर्मियों के दौरान जल प्रबंधन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की स्थिति में जल संरक्षण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। शहरों में पानी की बर्बादी रोकना, भूजल का नियंत्रित उपयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध जलस्रोतों का बेहतर प्रबंधन जरूरी हो सकता है।
पिछले वर्ष जलाशयों में बेहतर भंडारण होने के कारण स्थिति काफी मजबूत थी। इस वर्ष आंकड़े इसके ठीक उलट तस्वीर दिखा रहे हैं। कुल संग्रहण और लाइव स्टोरेज दोनों में बड़ी गिरावट आने से अगले कई महीनों के लिए जल प्रबंधन की चुनौती बढ़ गई है।
राज्य के कई हिस्सों में पहले ही कम बारिश और गिरते भूजल स्तर की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में कावेरी जलाशयों में कम पानी पूरे क्षेत्र की जल सुरक्षा पर असर डाल सकता है। किसानों के साथ स्थानीय निकायों को भी पानी के उपयोग की योजना सावधानी से बनानी होगी।
फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद पूर्वोत्तर मॉनसून या स्थानीय बारिश से कुछ अतिरिक्त पानी मिलने की हो सकती है, लेकिन इससे कावेरी बेसिन के सभी जलाशयों में बड़ी बढ़ोतरी होने की गारंटी नहीं है। इसलिए जल संसाधन विभाग को मौजूदा भंडार को अगले मॉनसून तक चलाने की रणनीति पर काम करना पड़ सकता है।
28 सितंबर के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि इस वर्ष कावेरी बेसिन में पानी की उपलब्धता पिछले वर्ष से काफी कमजोर है। चार प्रमुख जलाशयों में कुल 59.5 टीएमसी फीट पानी और केवल 36.2 टीएमसी फीट उपयोग योग्य भंडारण आने वाले महीनों के लिए चिंता बढ़ा रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार उपलब्ध पानी का बंटवारा किस तरह करती है और पेयजल तथा सिंचाई दोनों जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाती है। यदि आने वाले महीनों में पर्याप्त अतिरिक्त बारिश नहीं हुई तो अगले वर्ष जून तक पानी का सावधानीपूर्वक उपयोग ही सबसे बड़ी जरूरत बन सकती है।





