
बेंगलुरु। देश के प्रमुख महानगरों में शामिल बेंगलुरु में पीने के पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में शहर के करीब स्थित थिप्पागोंडनहल्ली यानी TG Halli रिज़र्वॉयर में करीब 2.2 TMC फीट पानी मौजूद होने के बावजूद उसका पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, पानी का एक बड़ा हिस्सा रिज़र्वॉयर में ही पड़ा है और समय के साथ वाष्पीकरण तथा रिसाव के कारण इसकी मात्रा घट रही है।
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब बेंगलुरु में बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के साथ जलापूर्ति पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में मौजूदा जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग करना शहर के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
1933 में बना था TG Halli रिज़र्वॉयर
TG Halli रिज़र्वॉयर राज्य के शुरुआती मानव निर्मित बांधों में से एक है। इसका निर्माण 1933 में किया गया था। यह बेंगलुरु से करीब 35 किलोमीटर दूर मगदी रोड पर स्थित है।
कई दशकों तक यह जलाशय बेंगलुरु की जलापूर्ति व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। हालांकि, समय के साथ शहर की पानी की जरूरत में काफी वृद्धि हुई और जलापूर्ति के लिए अन्य स्रोतों पर भी निर्भरता बढ़ती गई।
वर्तमान में रिज़र्वॉयर में पानी मौजूद होने के बावजूद उसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है। बेंगलुरु वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (BWSSB) के अधिकारियों के अनुसार, रिज़र्वॉयर में पानी का स्तर करीब 58 फीट है और इसमें लगभग 2.2 TMC फीट पानी जमा है।
करीब 230 करोड़ रुपये से सिस्टम किया गया दुरुस्त
पानी को बेकार होने से बचाने के लिए हाल ही में रिज़र्वॉयर से जुड़े वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम और मशीनरी को करीब 230 करोड़ रुपये की लागत से दुरुस्त और दोबारा चालू किया गया है।
इस सिस्टम के दोबारा संचालन से निचले इलाकों में पानी की आपूर्ति शुरू की गई है। फिलहाल मंचनाबेले रिज़र्वॉयर और मगदी के आसपास के गांवों को करीब 4 MLD यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह व्यवस्था रिज़र्वॉयर में जमा पानी के एक हिस्से को उपयोग में लाने में मदद कर रही है। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक जलाशय में मौजूद कुल पानी की तुलना में यह आपूर्ति काफी कम है।
बाकी पानी हो रहा कम
BWSSB के एक इंजीनियर के मुताबिक, रिज़र्वॉयर में मौजूद बाकी पानी का फिलहाल पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा है। यह पानी लंबे समय तक जलाशय में जमा रहने के कारण धीरे-धीरे कम हो रहा है।
इंजीनियर ने बताया कि वाष्पीकरण और रिसाव के चलते पानी की मात्रा घट रही है। खासकर गर्म मौसम में वाष्पीकरण की वजह से जलाशय में पानी का नुकसान बढ़ सकता है।
इस स्थिति को देखते हुए सवाल उठता है कि जलाशय में उपलब्ध पानी को किस तरह अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर मौजूदा पानी का उपयोग बढ़ाया जाता है तो आसपास के क्षेत्रों की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
बेंगलुरु की बढ़ती पानी की मांग के बीच चुनौती
बेंगलुरु की आबादी और शहरी क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही घरेलू इस्तेमाल, उद्योगों और अन्य जरूरतों के लिए पानी की मांग भी बढ़ रही है। शहर में पानी की उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
ऐसे में किसी जलाशय में बड़ी मात्रा में पानी उपलब्ध होने के बावजूद उसका पर्याप्त उपयोग न होना चिंता का विषय माना जा सकता है। TG Halli में मौजूद पानी को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने के लिए जल उपचार और वितरण ढांचे को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
हालांकि, जलाशय से पानी निकालकर शहर तक पहुंचाने के लिए केवल पानी की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उपचार संयंत्र, पाइपलाइन नेटवर्क, पंपिंग व्यवस्था और वितरण प्रणाली की क्षमता भी पर्याप्त होनी चाहिए।
भूजल स्तर से किसानों को राहत
BWSSB अधिकारी ने यह भी बताया कि TG Halli क्षेत्र में भूजल का स्तर फिलहाल अच्छा है। इससे आसपास के किसानों को फायदा हो रहा है।
अच्छे भूजल स्तर के कारण कृषि गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता बनी हुई है। इससे स्थानीय किसानों को राहत मिल रही है और क्षेत्र में भूजल पर निर्भरता के बावजूद फिलहाल गंभीर संकट की स्थिति नहीं है।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि भूजल के स्तर को लंबे समय तक बनाए रखना भी जरूरी है। बारिश, जलाशय में पानी की उपलब्धता और भूजल रिचार्ज जैसी प्रक्रियाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
पुराने जल स्रोत को फिर उपयोगी बनाने की जरूरत
TG Halli रिज़र्वॉयर का इतिहास लगभग नौ दशक पुराना है। बेंगलुरु की जल जरूरतों के बदलते स्वरूप को देखते हुए इस पुराने जल स्रोत की भूमिका पर फिर से ध्यान देना जरूरी हो गया है।
हाल में करीब 230 करोड़ रुपये खर्च कर उपचार प्रणाली और मशीनरी को दुरुस्त करने के बाद पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू हुई है। यह कदम जलाशय में उपलब्ध पानी के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
अब चुनौती यह है कि जलाशय में मौजूद शेष पानी को भी किस तरह उपयोग में लाया जाए। यदि इसके लिए अतिरिक्त ढांचा विकसित किया जाता है या मौजूदा व्यवस्था की क्षमता बढ़ाई जाती है तो पानी की बर्बादी को कम किया जा सकता है।
वाष्पीकरण और रिसाव रोकना अहम
जल संरक्षण के लिहाज से जलाशय में जमा पानी के वाष्पीकरण और रिसाव को कम करना भी जरूरी है। पानी का लंबे समय तक उपयोग नहीं होने पर प्राकृतिक रूप से इसका स्तर घटता है।
ऐसे में जल प्रबंधन की ऐसी रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है जिसमें पानी को जरूरत के अनुसार उपचारित कर आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए। इससे जलाशय में लंबे समय तक पानी के निष्क्रिय पड़े रहने की स्थिति कम हो सकती है।
बेंगलुरु के लिए अतिरिक्त जल स्रोत बन सकता है
बेंगलुरु में भविष्य की पानी की जरूरतों को देखते हुए TG Halli जैसे मौजूदा जल स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है। जलाशय में उपलब्ध करीब 2.2 TMC फीट पानी को पूरी तरह उपयोग में लाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर योजना बनाने की जरूरत होगी।
फिलहाल 4 MLD पानी मंचनाबेले रिज़र्वॉयर और मगदी क्षेत्र के गांवों को दिया जा रहा है। यह व्यवस्था स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रही है, लेकिन जलाशय में उपलब्ध कुल पानी की मात्रा को देखते हुए इसके उपयोग की क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश बनी हुई है।
बढ़ती आबादी, बदलते मौसम और पानी की बढ़ती मांग के बीच बेंगलुरु के लिए हर उपलब्ध जल स्रोत का संरक्षण और बेहतर प्रबंधन जरूरी है। TG Halli रिज़र्वॉयर में मौजूद पानी इसी चुनौती और संभावित समाधान दोनों की ओर संकेत करता है।





