
बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद की चार महत्वपूर्ण सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मतदान संपन्न हो गया। चुनाव के दौरान कुछ मतदान केंद्रों के आसपास राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच मामूली झड़प और तीखी बहस की घटनाएं सामने आईं। हालांकि, पुलिस और प्रशासन की सक्रियता से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और मतदान कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा। इन चार सीटों पर कुल 43 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला मंगलवार, 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद होगा। इस चुनाव को सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी-जनता दल सेक्युलर गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
विधान परिषद के जिन चार निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, उनमें दक्षिण-पूर्व स्नातक, पश्चिम स्नातक, उत्तर-पूर्व शिक्षक और बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। भाजपा ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि उसकी सहयोगी जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार मैदान में उतारा है।
सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक हुआ मतदान
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के लिए शुक्रवार सुबह आठ बजे मतदान शुरू हुआ। चारों निर्वाचन क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे।
मतदाताओं ने शाम चार बजे तक अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, मतदान प्रक्रिया के दौरान अधिकांश स्थानों पर शांतिपूर्ण माहौल रहा।
मतदान केंद्रों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोका जा सके।
हालांकि, कुछ जगह राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप करके स्थिति को सामान्य बनाया।
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सर्वाधिक मतदान
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, चारों निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत अलग-अलग रहा।
सबसे अधिक 86.97 प्रतिशत मतदान उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज किया गया। वहीं, बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 81.98 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले।
पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 75.62 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 73.58 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक मतदान ने राजनीतिक दलों का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, मतदान प्रतिशत के आधार पर किसी उम्मीदवार की जीत या हार का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
अंतिम परिणाम 27 अक्टूबर को मतगणना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
बेंगलुरु में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प
मतदान के दौरान बेंगलुरु के नगरभावी इलाके में स्थित अंबेडकर कॉलेज के पास कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हो गया।
जानकारी के अनुसार, दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच पहले कहासुनी हुई। इसके बाद मामला झड़प तक पहुंच गया।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराया।
पुलिस अधिकारियों ने मतदान केंद्र के आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
इस घटना के कारण कुछ समय के लिए तनाव का माहौल रहा, लेकिन पुलिस की मौजूदगी में स्थिति सामान्य हो गई।
अनेकल में उम्मीदवार के बैनर हटाने पर विवाद
बेंगलुरु के अलावा अनेकल में भी मतदान के दौरान विवाद की स्थिति सामने आई।
यहां भाजपा-जेडीएस गठबंधन के कार्यकर्ताओं और चुनाव अधिकारियों के बीच एक उम्मीदवार का बैनर हटाए जाने को लेकर बहस हुई।
बताया गया कि बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से गठबंधन के उम्मीदवार एपी रंगनाथ का बैनर हटाने की कार्रवाई को लेकर कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई।
इसके बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच बातचीत हुई।
हालांकि, इस विवाद का मतदान प्रक्रिया पर कोई बड़ा असर पड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
गदग में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर लगे आरोप
कर्नाटक के गदग जिले में भी मतदान के दौरान राजनीतिक विवाद सामने आया।
भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों को मतदान केंद्र के निर्धारित परिसर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई।
भाजपा नेताओं ने इसे निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया।
इस मुद्दे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं और संबंधित अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई।
मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और विवाद शांत कराया।
हालांकि, भाजपा की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव प्रक्रिया से संबंधित किसी उल्लंघन का अंतिम निर्धारण संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जांच के आधार पर होगा।
कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस गठबंधन में सीधा मुकाबला
चारों सीटों पर मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जेडीएस गठबंधन के बीच है।
पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के मोहन लिंबिकाई और भाजपा के एसवी संकनूर आमने-सामने हैं।
दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के शशि हुलीकुंटेमठ का मुकाबला भाजपा के केएम सुरेश से है।
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर और भाजपा के शशिल नमोशी के बीच मुकाबला है।
वहीं, बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के पुट्टन्ना और जेडीएस के एपी रंगनाथ प्रमुख उम्मीदवार हैं।
इन सीटों पर दोनों राजनीतिक पक्षों ने चुनाव प्रचार के दौरान संगठनात्मक ताकत दिखाने का प्रयास किया था।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किया जोरदार प्रचार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस चुनाव को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में व्यापक प्रचार किया।
उन्होंने चारों निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग वीडियो संदेश जारी करके मतदाताओं से समर्थन मांगा।
इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने भी विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार अभियान चलाया।
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने भी पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के नई जिम्मेदारियां संभालने के बाद यह पहला महत्वपूर्ण विधान परिषद चुनाव है। ऐसे में चुनाव परिणामों को कांग्रेस के संगठनात्मक प्रदर्शन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
भाजपा-जेडीएस गठबंधन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चुनाव?
भाजपा और जेडीएस ने विधान परिषद की चारों सीटों पर आपसी तालमेल के साथ चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था।
भाजपा तीन सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखना चाहती है, जबकि जेडीएस बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस को चुनौती दे रही है।
गठबंधन के नेताओं का उद्देश्य दोनों दलों के समर्थकों के बीच चुनावी समन्वय बनाए रखना है।
राजनीतिक स्तर पर इन चुनावों को गठबंधन की संगठनात्मक क्षमता और संयुक्त चुनावी रणनीति की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, केवल चार सीटों के चुनाव परिणाम से विधान परिषद में राजनीतिक दलों की कुल ताकत में बहुत बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है।
स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का विशेष महत्व
विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं।
इन निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित पात्रता रखने वाले पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं।
इसी कारण उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार में शिक्षा, रोजगार, वेतन, पेंशन, सरकारी सेवाओं और शिक्षकों की समस्याओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जाती है।
इन चुनावों के परिणाम संबंधित मतदाता समूहों की राजनीतिक प्राथमिकताओं को समझने में मदद कर सकते हैं।
27 अक्टूबर को होगी मतगणना
कर्नाटक विधान परिषद की चारों सीटों पर मतदान संपन्न होने के बाद अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर है।
मतगणना में 43 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला होगा। भाजपा अपने तीन मौजूदा क्षेत्रों में समर्थन बरकरार रखने का प्रयास कर रही है, जबकि कांग्रेस सभी चार सीटों पर अपना प्रदर्शन सुधारना चाहती है।
जेडीएस के लिए बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम विशेष महत्व रखता है।
फिलहाल मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चुनावी मुकाबले का अंतिम परिणाम सामने आना बाकी है। मंगलवार को मतगणना के बाद स्पष्ट होगा कि चारों सीटों पर मतदाताओं ने किसे प्रतिनिधित्व की जिम्मेदारी सौंपी है।





