कर्नाटक

कर्नाटक में नागरिक सेवाओं को आसान बनाएगा वॉइस AI

Ratna Netam
6 Oct 2026 8:52 PM IST
कर्नाटक में नागरिक सेवाओं को आसान बनाएगा वॉइस AI
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार की कर्नाटक इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी सोसाइटी (KITS) ने ग्लोबल वॉइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ElevenLabs Inc. के साथ एक समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य जिम्मेदार AI उपयोग, नागरिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और सामाजिक भलाई से जुड़े क्षेत्रों में वॉइस AI की संभावनाओं को तलाशना है।कर्नाटक सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत काम करने वाली KITS और ElevenLabs के बीच हुई यह साझेदारी तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगी। पहला, वॉइस AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए सुरक्षा ढांचा तैयार करना। दूसरा, ऐसी तकनीकों की संभावनाओं पर काम करना जिनकी मदद से बोलने की क्षमता खो चुके लोगों की आवाज को AI आधारित वॉइस रेस्टोरेशन के जरिए फिर से तैयार किया जा सके। तीसरा, सरकारी सेवाओं को नागरिकों के लिए अधिक सरल और सुलभ बनाने में वॉइस AI के उपयोग का परीक्षण करना।
इस साझेदारी को लेकर कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वास्तविक सफलता का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि वह लोगों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि वॉइस AI सरकार और नागरिकों के बीच संवाद को अधिक सहज और सुलभ बनाने की क्षमता रखता है।खड़गे ने कहा कि नई तकनीक के साथ नई जिम्मेदारियां भी आती हैं। वॉइस AI के मामले में सुरक्षा, सहमति, भरोसा और दुरुपयोग रोकने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी AI आधारित सेवा को लागू करते समय केवल तकनीकी क्षमता नहीं, बल्कि लोगों की निजता और अधिकारों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
वॉइस AI तकनीक की मदद से कंप्यूटर सिस्टम इंसानी आवाज को समझने, उसका जवाब देने और जरूरत के अनुसार प्राकृतिक आवाज तैयार करने में सक्षम होते हैं। ऐसी तकनीक का इस्तेमाल कॉल सेंटर, डिजिटल असिस्टेंट, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी हेल्पलाइन जैसी सेवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।कर्नाटक सरकार और ElevenLabs की साझेदारी में AI सुरक्षा फ्रेमवर्क पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह तय करना होगा कि वॉइस AI का इस्तेमाल किस तरह किया जाए ताकि फर्जी आवाज, पहचान की नकल, धोखाधड़ी और बिना अनुमति किसी व्यक्ति की आवाज इस्तेमाल करने जैसी समस्याओं को रोका जा सके।AI आधारित वॉइस क्लोनिंग तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक ऑडियो और धोखाधड़ी से जुड़े खतरे भी बढ़े हैं। ऐसे में सरकार और तकनीकी कंपनियों के सामने यह चुनौती है कि नई तकनीक को उपयोगी बनाते हुए उसके संभावित दुरुपयोग पर रोक कैसे लगाई जाए।
साझेदारी का दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र वॉइस रेस्टोरेशन है। इसका उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है, जिन्होंने बीमारी, चोट या किसी अन्य कारण से अपनी बोलने की क्षमता खो दी है। AI आधारित तकनीक के जरिए उपलब्ध पुराने ऑडियो रिकॉर्डिंग या सीमित वॉइस सैंपल का इस्तेमाल कर व्यक्ति जैसी आवाज तैयार करने की संभावना तलाश की जाएगी।ऐसी तकनीक उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है जो न्यूरोलॉजिकल बीमारी, कैंसर के इलाज या किसी दुर्घटना के कारण अपनी प्राकृतिक आवाज खो चुके हैं। हालांकि इस तरह की तकनीक के इस्तेमाल में व्यक्ति की स्पष्ट सहमति और डेटा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होगी।तीसरे क्षेत्र में सरकारी सेवाओं को वॉइस AI के जरिए अधिक सुलभ बनाने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसी डिजिटल सेवाएं विकसित करना हो सकता है, जिनके जरिए नागरिक बोलकर सरकारी जानकारी हासिल कर सकें या अपनी जरूरत के अनुसार सेवाओं तक पहुंच बना सकें।
भारत जैसे बहुभाषी देश में वॉइस AI की एक बड़ी भूमिका भाषा की बाधाओं को कम करने में भी हो सकती है। खासतौर पर ऐसे नागरिक जो टेक्स्ट आधारित डिजिटल सेवाओं का आसानी से इस्तेमाल नहीं कर पाते, उनके लिए आवाज आधारित प्रणाली अधिक सहज हो सकती है।कर्नाटक लंबे समय से टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। बेंगलुरु को भारत का प्रमुख टेक हब माना जाता है और राज्य सरकार AI, सेमीकंडक्टर, बायोटेक और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर देती रही है।KITS का काम राज्य में इनोवेशन और टेक्नोलॉजी से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना है। ElevenLabs के साथ हुआ यह समझौता कर्नाटक सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें नई AI तकनीकों का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय सार्वजनिक सेवाओं में भी करने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
हालांकि सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वॉइस AI के इस्तेमाल में सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग सबसे महत्वपूर्ण होंगे। AI से तैयार आवाजों के गलत इस्तेमाल से गलत सूचना, धोखाधड़ी और पहचान संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। इस कारण सहमति आधारित मॉडल, डेटा सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने वाले तकनीकी उपायों को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही गई है।प्रियांक खड़गे ने कहा कि सरकार की कोशिश तकनीक को केवल प्रदर्शन या प्रयोग तक सीमित रखने की नहीं, बल्कि इसे लोगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की है। उनका कहना है कि AI की उपयोगिता तभी साबित होगी जब इससे नागरिक सेवाएं आसान हों और ऐसे लोगों को मदद मिले जिन्हें पारंपरिक प्रणालियों में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।आने वाले समय में KITS और ElevenLabs अलग-अलग पायलट प्रोजेक्ट और संभावित उपयोग मामलों पर काम कर सकते हैं। इन परियोजनाओं के परिणामों के आधार पर यह तय किया जा सकेगा कि वॉइस AI को किन सरकारी सेवाओं में बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।कुल मिलाकर, इस MoU के जरिए कर्नाटक सरकार जिम्मेदार और सुरक्षित AI उपयोग का मॉडल विकसित करने के साथ वॉइस टेक्नोलॉजी को नागरिक सेवाओं और सामाजिक क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
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