
बेंगलुरु: बेंगलुरु कैंटोनमेंट रेलवे कॉलोनी में सैकड़ों पेड़ों को काटने के प्रस्ताव के खिलाफ पर्यावरण कार्यकर्ताओं का विरोध जारी है। इस मामले को लेकर मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहले से ही हरियाली बचाने की चुनौती झेल रहे बेंगलुरु जैसे शहर में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल पेड़ों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के हरित क्षेत्र और पर्यावरण संतुलन से जुड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि रेलवे की जमीन को व्यावसायिक उपयोग के लिए देने की योजना के कारण बड़ी संख्या में पेड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण संगठनों का विरोध
‘वी फॉर द एनवायरनमेंट’ संगठन के महासचिव परशुराम गौड़ा ने कहा कि इस मुद्दे को सिर्फ कितने पेड़ काटे जाएंगे, इस नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर में पेड़ और हरित क्षेत्र पहले ही कम हो रहे हैं, ऐसे में नए नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होगा।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर जमीन का इस्तेमाल मेट्रो लाइन, सड़क, पुल या किसी अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के लिए किया जाता, तो स्थिति अलग होती। लेकिन उनका विरोध रेलवे की जमीन को व्यावसायिक परियोजना के लिए इस्तेमाल किए जाने को लेकर है।
8.61 एकड़ जमीन लीज पर देने का प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु कैंटोनमेंट रेलवे कॉलोनी की करीब 8.61 एकड़ रेलवे संपत्ति को आईटी/बीटी प्रोजेक्ट के लिए 60 साल की लीज पर देने का प्रस्ताव है। यह जमीन ‘बागमाने टेक्सवर्थ’ को दिए जाने की योजना बताई जा रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि इस परियोजना से रेलवे विभाग को लगभग 300 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है। हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ताओं का तर्क है कि आर्थिक लाभ के लिए शहर के पर्यावरणीय संसाधनों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट में होगी सुनवाई
इस मामले में पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अब मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि अदालत पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पहलुओं पर विचार करेगी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी भी विकास परियोजना को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन जरूरी है। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से शहर के तापमान, वायु गुणवत्ता और जैव विविधता पर असर पड़ सकता है।
बेंगलुरु में हरियाली को लेकर चिंता
बेंगलुरु को कभी अपने हरियाली भरे इलाकों और पेड़ों के लिए जाना जाता था, लेकिन तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण शहर में हरित क्षेत्र लगातार दबाव में हैं।
सड़कों के विस्तार, निर्माण परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के कारण कई बार पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। पर्यावरण समूहों का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
विकास बनाम पर्यावरण पर बहस
रेलवे जमीन के व्यावसायिक उपयोग का प्रस्ताव एक बार फिर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की बहस को सामने ला रहा है। जहां एक ओर परियोजना से आर्थिक लाभ और रोजगार के अवसर मिलने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण कार्यकर्ता प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि शहरों में पेड़ों का महत्व केवल हरियाली तक सीमित नहीं है। पेड़ वायु प्रदूषण कम करने, तापमान नियंत्रित करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल सभी की नजर मंगलवार को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत के फैसले के बाद ही इस परियोजना और प्रस्तावित पेड़ कटाई को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा है कि वे शहर की हरियाली और पेड़ों की सुरक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, रेलवे जमीन के उपयोग से जुड़े प्रस्ताव पर कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी।





