कर्नाटक

नागेंद्र मामले में घमासान, अशोक का डिप्टी CM पर हमला

Kavita2
21 Aug 2026 11:12 AM IST
नागेंद्र मामले में घमासान, अशोक का डिप्टी CM पर हमला
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बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा में अनुसूचित जनजाति निगम से जुड़े कथित घोटाले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मंत्री बी. नागेंद्र के खिलाफ किसी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।

आर. अशोक ने विधानसभा में दावा किया कि मंत्री बी. नागेंद्र के खिलाफ कुल 31 मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और लोकायुक्त जैसी जांच एजेंसियों से जुड़े मामले भी शामिल हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में लगातार चौथे दिन विरोध प्रदर्शन किया और नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग दोहराई।

‘डिप्टी CM ने सदन को गुमराह किया’

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने उपमुख्यमंत्री के बयान को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि सदन में यह कहना कि नागेंद्र के खिलाफ कोई मामला नहीं है, तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने दावा किया कि कुल 31 मामलों में से CBI ने तीन मामलों में चार्जशीट दाखिल की है।

अशोक ने कहा कि इन तीन मामलों में नागेंद्र को मुख्य आरोपी बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट जानकारी सदन के सामने रखनी चाहिए और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को देखते हुए मंत्री को पद पर बनाए रखना उचित नहीं है।

बीजेपी नेता ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इसलिए उठा रहा है क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति के खिलाफ आरोपों का मामला नहीं है, बल्कि सरकार की जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ा विषय है।

हालांकि, अशोक की ओर से विधानसभा में लगाए गए इन आरोपों पर सरकार या संबंधित जांच एजेंसियों का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामला या चार्जशीट अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होती और अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होती है।

लगातार चौथे दिन विपक्ष का प्रदर्शन

बीजेपी के सदस्यों ने विधानसभा में लगातार चौथे दिन विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष की मुख्य मांग है कि बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। बीजेपी का कहना है कि गंभीर आरोपों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री को कैबिनेट से बाहर करना चाहिए।

बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार मामले की गंभीरता को कम करके पेश करने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यदि जांच एजेंसियों ने मामले में चार्जशीट दाखिल की है, तो सरकार को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

CBI की तीन चार्जशीट का दावा

आर. अशोक ने अपने बयान में विशेष रूप से CBI की कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 31 मामलों में से तीन मामलों में CBI ने चार्जशीट दाखिल की है और इन मामलों में नागेंद्र मुख्य आरोपी हैं।

यह दावा विधानसभा में राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बन गया। विपक्ष का तर्क है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर की ओर से जिस बयान को लेकर विवाद शुरू हुआ, उसमें नागेंद्र के खिलाफ किसी मामले में चार्जशीट नहीं होने की बात कही गई थी। अब बीजेपी इस कथित विरोधाभास को आधार बनाकर सरकार से जवाब मांग रही है।

कांग्रेस हाईकमान को पैसे देने का गंभीर आरोप

आर. अशोक ने इस दौरान एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बी. नागेंद्र को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए कांग्रेस के हाईकमान को पैसे दिए गए थे।

यह आरोप राजनीतिक रूप से बेहद गंभीर है। हालांकि, अशोक ने अपने दावे के समर्थन में विधानसभा में सार्वजनिक रूप से कौन-से दस्तावेज या सबूत पेश किए, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है।

सरकार और कांग्रेस की ओर से इस आरोप पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। यदि आरोपों पर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर आगे कार्रवाई होती है, तो मामला और तूल पकड़ सकता है।

ST कॉर्पोरेशन मामला फिर केंद्र में

बी. नागेंद्र को लेकर विवाद का संबंध अनुसूचित जनजाति निगम से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले से है। यह मामला पहले से ही कर्नाटक की राजनीति में विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

बीजेपी लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार और मामले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाती रही है। विपक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और मामले से जुड़े आरोपों के बीच सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

कांग्रेस सरकार की ओर से मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई की बात कही जाती रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर मतभेद अब विधानसभा के भीतर भी खुलकर सामने आ गए हैं।

आगे भी जारी रह सकता है टकराव

विधानसभा में लगातार चौथे दिन विरोध प्रदर्शन से साफ है कि बीजेपी इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है। विपक्ष की मांग है कि बी. नागेंद्र को कैबिनेट से हटाया जाए और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।

आर. अशोक ने उपमुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए 31 मामलों और तीन CBI चार्जशीट का दावा किया है। साथ ही उन्होंने नागेंद्र की कैबिनेट में वापसी को लेकर कांग्रेस हाईकमान को कथित भुगतान का आरोप भी लगाया है।

अब इस पूरे विवाद में सरकार की ओर से विस्तृत जवाब और आरोपों के समर्थन में विपक्ष द्वारा पेश किए जाने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। फिलहाल बी. नागेंद्र का मामला कर्नाटक विधानसभा में सरकार और बीजेपी के बीच जारी राजनीतिक टकराव का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

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