कर्नाटक

हनूर वन्यजीव अभयारण्य गोलीकांड पर बवाल, विपक्ष ने मांगा 50-50 लाख मुआवजा

Kavita2
18 Aug 2026 12:43 PM IST
हनूर वन्यजीव अभयारण्य गोलीकांड पर बवाल, विपक्ष ने मांगा 50-50 लाख मुआवजा
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बेंगलुरु। कर्नाटक के हनूर वन्यजीव अभयारण्य में तीन संदिग्ध शिकारियों की गोली लगने से हुई मौत का मामला अब राजनीतिक विवाद बन गया है। सोमवार को कर्नाटक विधान परिषद में इस मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए मृतकों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देने और घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की।

मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने हनूर गोलीकांड का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि तीन लोगों की मौत वन विभाग की कार्रवाई के दौरान हुई और यह सरकार की ओर से की गई "अमानवीय हत्या" है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

विपक्षी नेताओं ने कहा कि वन विभाग की गोलीबारी में हुई मौतों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए और वन मंत्री को सदन में आकर पूरी जानकारी देनी चाहिए।

विपक्ष ने यह भी मांग की कि मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए। उनका कहना था कि यदि कार्रवाई के दौरान किसी व्यक्ति की मौत हुई है तो उनके परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर विपक्षी सदस्य सदन में नारेबाजी करते रहे।

हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। लगातार नारेबाजी और विरोध को देखते हुए विधान परिषद के सभापति सलीम अहमद ने कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद दोपहर में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।

कार्यवाही शुरू होने के बाद वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने सरकार की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वन विभाग के कर्मचारियों ने जानबूझकर गोलीबारी नहीं की थी। उन्होंने दावा किया कि वन कर्मियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई थी।

वन मंत्री ने कहा कि वन विभाग की टीम जंगल क्षेत्र में अवैध शिकार की गतिविधियों को रोकने के लिए अभियान चला रही थी। इसी दौरान स्थिति ऐसी बनी, जिसमें गोली चलानी पड़ी। उन्होंने कहा कि पूरी घटना की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हनूर तालुक के शाग्या गांव के पास हुई इस घटना में तीन लोगों की मौत के बाद से ही विवाद बना हुआ है। वन विभाग का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कथित शिकारियों के पास से हथियार और जंगली जानवरों का मांस बरामद किया गया था। विभाग के अनुसार, मौके से देसी बंदूकें, गोलियां, टॉर्च और शिकार से जुड़े अन्य सामान मिले थे।

हालांकि, मृतकों के परिवार और स्थानीय ग्रामीण इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि घटना की पूरी जांच जरूरी है और यह पता लगाया जाना चाहिए कि गोलीबारी किन परिस्थितियों में हुई। परिवारों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है और मामले की न्यायिक जांच की मांग कर रहा है। वहीं, सरकार और वन विभाग का कहना है कि कार्रवाई नियमों के तहत की गई और वन कर्मियों ने अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण और मानव अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। जंगलों में अवैध शिकार रोकना वन विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी भी कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी होती है।

हनूर घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और जंगलों में सुरक्षा अभियानों को लेकर बहस शुरू हो गई है। विपक्ष का कहना है कि केवल विभागीय जांच पर्याप्त नहीं है, जबकि सरकार का कहना है कि मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।

फिलहाल हनूर गोलीकांड को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्ष जहां न्यायिक जांच और मुआवजे की मांग पर अड़ा है, वहीं सरकार ने वन कर्मियों की कार्रवाई को आत्मरक्षा बताया है। अब सभी की नजर इस मामले की जांच और आगे की कार्रवाई पर बनी हुई है।

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