
बेंगलुरु। कर्नाटक के चामराजनगर जिले में हुई गोलीबारी की घटना को लेकर विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। शनिवार को हुई इस घटना में तीन लोगों की मौत के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सरकार पर सवाल उठाए और वन विभाग की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
विधानसभा में वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी बीजेपी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। विरोध करते हुए भाजपा विधायक सदन के बीचों-बीच पहुंच गए और प्रदर्शन किया। विपक्ष ने मांग की कि घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाए।
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि गोलीबारी में घायल लोगों को चामराजनगर के अस्पताल ले जाने के बजाय मैसूर के अस्पताल क्यों भेजा गया। उन्होंने कहा कि घटनास्थल के पास ही चामराजनगर में स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद थीं, फिर घायलों को इतनी दूर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी।
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को केवल आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताकर खत्म करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि घटना की परिस्थितियों और गोली लगने के तरीके को लेकर कई सवाल हैं, जिनका जवाब सरकार को देना चाहिए।
बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि मृतकों को बेहद नजदीक से गोली मारी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि वन कर्मियों ने वास्तव में आत्मरक्षा में गोली चलाई थी तो कार्रवाई का तरीका अलग हो सकता था। विपक्ष ने आरोप लगाया कि गोली लगने की जगहों से घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आर. अशोक ने कहा कि अगर उद्देश्य केवल खतरे को रोकना था, तो पैरों पर गोली चलाई जा सकती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि छाती और गर्दन जैसे संवेदनशील हिस्सों में गोली लगना कई संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच जरूरी है।
विपक्ष के नेता ने यह भी दावा किया कि गोलीबारी की घटना में चार लोग घायल हुए थे, लेकिन चौथा व्यक्ति अभी तक लापता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि लापता व्यक्ति के बारे में स्थिति स्पष्ट की जाए और उसके संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
बीजेपी सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरत रही है। उनका कहना था कि केवल विभागीय जांच से संतुष्टि नहीं होगी और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
वहीं, सरकार की ओर से वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने पहले ही कहा है कि वन कर्मियों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी। सरकार का कहना है कि वन विभाग की टीम जंगल क्षेत्र में अवैध शिकार रोकने के अभियान पर थी और उसी दौरान यह घटना हुई।
वन विभाग के अनुसार, मौके से हथियार और शिकार से जुड़े सामान बरामद किए गए थे। विभाग का दावा है कि कार्रवाई नियमों के तहत की गई थी। हालांकि, विपक्ष इस दावे पर सवाल उठा रहा है और जांच की मांग कर रहा है।
इस घटना के बाद कर्नाटक की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। भाजपा लगातार सरकार पर दबाव बना रही है और मुख्यमंत्री तथा वन विभाग से जवाब मांग रही है। विपक्ष का कहना है कि मृतकों के परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में अवैध शिकार रोकना जरूरी है, लेकिन किसी भी कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में घटनास्थल के सबूत, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में अहम भूमिका निभाते हैं।
चामराजनगर गोलीकांड अब केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार जांच के आधार पर कार्रवाई की बात कह रही है।
फिलहाल मामले को लेकर विवाद जारी है। विधानसभा में हुए हंगामे के बाद अब सभी की नजर जांच प्रक्रिया और सरकार की आगे की कार्रवाई पर है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में और गर्मा सकता है।





