कर्नाटक

वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले पर विधान परिषद में घमासान

Kavita2
22 Aug 2026 10:57 AM IST
वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले पर विधान परिषद में घमासान
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बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद में करोड़ों रुपये के कथित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्ष के बीच टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भाजपा और अन्य विपक्षी दलों को सदन में औपचारिक बहस के जरिए सरकार से जवाब मांगने की चुनौती दी।

शिवकुमार ने विपक्ष से कहा कि यदि उसके पास बी. नागेंद्र के खिलाफ कोई ठोस सबूत है तो उसे सदन के पटल पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के विपक्ष के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय नियमों के तहत चर्चा की जानी चाहिए।

‘सबूत हैं तो सदन में पेश करें’

विधान परिषद में विपक्ष के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए डी.के. शिवकुमार ने कहा कि नागेंद्र के खिलाफ जो भी आरोप और सबूत हैं, उन्हें सदन के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि आरोपों पर बहस के लिए सरकार तैयार है।

शिवकुमार ने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल और सदस्य को विरोध करने का अधिकार है और सरकार को इस अधिकार पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और चर्चा के लिए विधानमंडल में निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि विपक्ष यदि इस मुद्दे को गंभीर मानता है तो उसे अध्यक्ष को नोटिस देना चाहिए और उसके बाद सदन में नियमों के तहत चर्चा करनी चाहिए। सरकार चर्चा के दौरान उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है।

‘नोटिस दें और चर्चा करें’

उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह केवल विरोध प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन औपचारिक रूप से चर्चा के लिए आवश्यक नोटिस नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि पहले भी विपक्ष को नागेंद्र से जुड़े मामले पर चर्चा करने का अवसर दिया गया था।

शिवकुमार के मुताबिक, सदन में मुद्दे को उठाने के लिए नोटिस दिया जा सकता है और उसके बाद संबंधित विषय पर विस्तृत चर्चा की जा सकती है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि वह इस मुद्दे को सदन में लाए और तथ्यों के आधार पर सरकार से जवाब मांगे।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को केवल सदन के वेल में आकर नारेबाजी या विरोध करने के बजाय बहस के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि विपक्ष के पास आरोपों को साबित करने के लिए दस्तावेज या अन्य सामग्री है तो उसे सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

विपक्ष कर रहा नागेंद्र के इस्तीफे की मांग

वाल्मीकि कॉर्पोरेशन से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले को लेकर विपक्ष लगातार बी. नागेंद्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। भाजपा और अन्य विपक्षी सदस्यों का आरोप है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए नागेंद्र को मंत्रिमंडल में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।

इसी मांग को लेकर विधान परिषद में विपक्षी सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया। लगातार विरोध के कारण सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। विपक्ष का कहना है कि सरकार को मामले की पूरी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

विपक्षी दल इस मामले को सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी निगम से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सरकार को जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।

सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा टकराव

वाल्मीकि कॉर्पोरेशन का मामला अब कर्नाटक विधानमंडल में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है। विपक्ष जहां मंत्री के इस्तीफे और सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग कर रहा है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि आरोपों पर सदन में चर्चा की जा सकती है।

शिवकुमार ने अपने बयान में संकेत दिया कि सरकार विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों से बच नहीं रही है। उनका जोर इस बात पर है कि आरोपों को सदन के रिकॉर्ड पर लाया जाए और उसके बाद सरकार से जवाब मांगा जाए।

सत्तापक्ष का तर्क है कि लगातार विरोध और नारेबाजी से सदन का कामकाज प्रभावित होता है। यदि विपक्ष के पास कोई गंभीर आरोप हैं तो उन्हें बहस के जरिए सामने रखना अधिक प्रभावी और लोकतांत्रिक तरीका होगा।

जनता के सामने मामला रखने की अपील

शिवकुमार ने विपक्ष से इस मुद्दे को जनता के सामने रखने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के पास पर्याप्त तथ्य और सबूत हैं तो वह उन्हें सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाए।

उनके मुताबिक, विधानसभा और विधान परिषद जनता से जुड़े मुद्दों पर बहस करने के लिए हैं। इसलिए किसी गंभीर मामले को केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित रखने के बजाय उसके तथ्यों पर चर्चा की जानी चाहिए।

उन्होंने विपक्ष को यह भी कहा कि अध्यक्ष को नोटिस देकर बहस की प्रक्रिया शुरू की जाए। इससे सरकार और विपक्ष दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और जनता के सामने मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जांच के बीच राजनीतिक बहस तेज

वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले को लेकर पहले से ही जांच चल रही है। इस बीच विधान परिषद में राजनीतिक बहस तेज होने से सरकार पर विपक्ष का दबाव बढ़ गया है। विपक्ष मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया को अपना काम करने देना चाहिए।

नागेंद्र के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम जिम्मेदारी और कानूनी स्थिति जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। फिलहाल राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच टकराव का प्रमुख कारण बना हुआ है।

आगे भी हंगामे के आसार

विधान परिषद में शुक्रवार को हुए घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में भी यह मुद्दा सदन की कार्यवाही के केंद्र में रह सकता है। यदि विपक्ष मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम रहता है और सरकार बहस के जरिए मामले को निपटाने पर जोर देती है, तो दोनों पक्षों के बीच टकराव जारी रहने की संभावना है।

फिलहाल डी.के. शिवकुमार की चुनौती के बाद गेंद विपक्ष के पाले में है। सरकार ने सदन में बहस के लिए तैयार होने का संकेत दिया है, जबकि विपक्ष का जोर नागेंद्र के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे पर है। अब यह देखना होगा कि विपक्ष औपचारिक नोटिस देकर बहस का रास्ता अपनाता है या विरोध प्रदर्शन को ही अपनी रणनीति बनाए रखता है।

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