
Davangere दावणगेरे : कर्नाटक के दावणगेरे साउथ विधानसभा सीट के उपचुनाव में सोमवार को एक अनोखी और असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को सुरक्षित रखने वाले स्ट्रॉन्ग रूम के ताले चाबी न मिलने के कारण तोड़ने पड़े। यह घटना शहर के पीबी रोड स्थित DRR स्कूल परिसर में हुई, जहां तीन स्ट्रॉन्ग रूम बनाए गए थे।
जानकारी के अनुसार, मतगणना की प्रक्रिया के तहत पोस्टल बैलेट की गिनती सुबह 7:30 बजे शुरू होनी थी, लेकिन स्ट्रॉन्ग रूम खोलने में आई तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कत के कारण इसमें 30 मिनट से अधिक की देरी हो गई। यह देरी उस समय हुई जब अधिकारियों को स्ट्रॉन्ग रूम की चाबियां नहीं मिल पाईं, जिससे स्थिति असहज हो गई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों ने तत्काल निर्णय लिया और सभी संबंधित पक्षों की मौजूदगी में स्ट्रॉन्ग रूम के ताले तोड़ने की अनुमति दी गई। यह प्रक्रिया रिटर्निंग ऑफिसर संतोष कुमार, डिप्टी कमिश्नर जी.एम. गंगाधर स्वामी और चुनाव ऑब्जर्वर रमनकांत की निगरानी में पूरी की गई।
अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि इस प्रक्रिया के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए और किसी भी तरह की अनियमितता न हो। ताले तोड़े जाने के बाद EVM और अन्य चुनावी सामग्री को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया और मतगणना प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
इस घटना ने मतगणना प्रक्रिया की व्यवस्थाओं पर कुछ सवाल जरूर खड़े किए हैं, खासकर सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े पहलुओं को लेकर। हालांकि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह एक तकनीकी और मानवीय त्रुटि का मामला था, जिसे समय रहते नियंत्रित कर लिया गया।
मतगणना केंद्र पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या सुरक्षा चूक नहीं हुई। सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की गई।
इस घटना के बाद प्रशासन ने कहा है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए स्ट्रॉन्ग रूम प्रबंधन और चाबी हैंडलिंग प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। साथ ही, मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत करने पर भी विचार किया जाएगा।
दावणगेरे साउथ उपचुनाव पहले से ही राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, और अब इस तरह की घटना ने इसे और चर्चा में ला दिया है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इससे मतगणना की पारदर्शिता पर कोई असर नहीं पड़ा है।
कुल मिलाकर, यह घटना चुनावी प्रक्रिया में एक दुर्लभ प्रशासनिक चूक के रूप में देखी जा रही है, जिसे समय रहते संभाल लिया गया।





