
कोडगु। कर्नाटक में हाथियों और वन्यजीव पर्यटन में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटकों के लिए राहत की खबर है। सुरक्षा कारणों से पिछले करीब चार महीनों से बंद हारंगी एलिफेंट कैंप और मट्टीगोडु एलिफेंट कैंप को शनिवार से आम लोगों के लिए फिर खोल दिया गया है। हालांकि पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय दुबारे एलिफेंट कैंप अभी कुछ और दिनों तक बंद रहेगा। वन विभाग ने साफ किया है कि कैंप दोबारा खुलने के बाद पर्यटकों को पहले की तरह हाथियों के सीधे संपर्क में आने की अनुमति नहीं होगी।
राज्य सरकार की ओर से लागू नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत दोनों कैंपों को दोबारा खोला गया है। नए सुरक्षा नियमों के अनुसार पर्यटक पालतू हाथियों को न तो छू सकेंगे और न ही उनके बहुत करीब जा सकेंगे। वन विभाग का कहना है कि पर्यटकों और हाथियों दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए गए हैं।
चार महीने बाद खुले एलिफेंट कैंप
कोडगु का प्रसिद्ध हारंगी एलिफेंट कैंप और मैसूर सीमा के पास स्थित मट्टीगोडु एलिफेंट कैंप पिछले चार महीनों से पर्यटकों के लिए बंद थे।
शनिवार से दोनों कैंपों में पर्यटकों की एंट्री फिर शुरू कर दी गई। लंबे समय बाद कैंप खुलने से पर्यटन गतिविधियों के दोबारा गति पकड़ने की उम्मीद है।
वन विभाग ने कैंपों को खोलने से पहले सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और सरकार की नई SOP के अनुसार जरूरी बदलाव किए हैं।
दुबारे कैंप अभी रहेगा बंद
हारंगी और मट्टीगोडु कैंप खुलने के बावजूद प्रसिद्ध दुबारे एलिफेंट कैंप फिलहाल पर्यटकों के लिए बंद रहेगा।
अधिकारियों ने बताया है कि दुबारे को दोबारा खोलने में कुछ और दिन लग सकते हैं। सभी सुरक्षा मानकों और जरूरी तैयारियों को पूरा करने के बाद ही वहां पर्यटकों को प्रवेश देने पर फैसला किया जाएगा।
दुबारे पर्यटकों के बीच लोकप्रिय स्थान है, इसलिए इसके दोबारा खुलने का भी इंतजार किया जा रहा है।
मई की घटना के बाद बंद किए गए थे कैंप
एलिफेंट कैंपों को बंद करने का फैसला मई में दुबारे एलिफेंट कैंप में हुई एक दुखद घटना के बाद लिया गया था।
इस घटना में एक पर्यटक और एक पालतू हाथी की मौत हो गई थी। हादसे के बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य के सभी एलिफेंट कैंप में पर्यटकों से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगा दी थी।
इसके साथ ही कैंपों में सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों तथा हाथियों के बीच संपर्क से जुड़े नियमों की समीक्षा शुरू की गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था की हुई व्यापक समीक्षा
दुबारे की घटना के बाद वन विभाग का मुख्य ध्यान इस बात पर रहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सके।
कैंपों में पर्यटकों की आवाजाही, हाथियों से उनकी दूरी, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की व्यवस्था जैसे पहलुओं पर विचार किया गया।
इसके बाद राज्य सरकार की ओर से नई SOP लागू की गई और उसी के आधार पर कैंपों को चरणबद्ध तरीके से खोलने का फैसला लिया गया।
हाथियों को छू नहीं सकेंगे पर्यटक
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव पर्यटकों और हाथियों के बीच सीधे संपर्क को लेकर किया गया है।
कुशलनगर के जोनल फॉरेस्ट ऑफिसर आर. रक्षित के अनुसार अब पर्यटकों को पालतू हाथियों को छूने या उनके बहुत करीब जाने की अनुमति नहीं होगी।
पहले एलिफेंट कैंप में आने वाले पर्यटकों के लिए हाथियों के पास जाकर उन्हें देखने और कुछ गतिविधियों में शामिल होने का अनुभव आकर्षण का बड़ा हिस्सा माना जाता था। अब सुरक्षा कारणों से इसमें सख्ती की गई है।
निर्धारित दूरी से देखने की व्यवस्था
नई SOP का उद्देश्य पर्यटकों को हाथियों को देखने का अवसर देना है, लेकिन इस दौरान सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी होगा।
हाथी पालतू या प्रशिक्षित होने के बावजूद विशाल और शक्तिशाली वन्यजीव होते हैं। किसी अप्रत्याशित स्थिति में उनके व्यवहार में बदलाव खतरा पैदा कर सकता है।
इसी वजह से वन विभाग ने पर्यटकों और हाथियों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क पर रोक को महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय माना है।
कर्मचारियों को भी नियमों का पालन कराना होगा
नई व्यवस्था का पालन कराने की जिम्मेदारी कैंप के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी होगी।
पर्यटकों को निर्धारित क्षेत्रों में ही रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाएगा। किसी भी व्यक्ति को नियम तोड़कर हाथियों के करीब जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
वन विभाग के लिए चुनौती यह होगी कि पर्यटन अनुभव को बनाए रखते हुए नए सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।
पर्यटन गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार
हारंगी और मट्टीगोडु एलिफेंट कैंप दोबारा खुलने से आसपास के पर्यटन व्यवसाय को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
एलिफेंट कैंप में आने वाले पर्यटक आसपास के होटल, होमस्टे, टैक्सी और अन्य स्थानीय सेवाओं का भी इस्तेमाल करते हैं। चार महीने तक कैंप बंद रहने से पर्यटन से जुड़े लोगों पर भी इसका असर पड़ा होगा।
अब पर्यटकों की वापसी से स्थानीय पर्यटन गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
वन्यजीव पर्यटन में सुरक्षा सबसे जरूरी
वन्यजीव पर्यटन में रोमांच के साथ सुरक्षा का विशेष महत्व होता है। जानवरों के व्यवहार का पूरी तरह अनुमान लगाना संभव नहीं होता, इसलिए पर्यटकों के लिए निर्धारित दूरी और नियमों का पालन जरूरी माना जाता है।
दुबारे में हुई घटना के बाद वन विभाग ने इसी पहलू को प्राथमिकता देते हुए राज्य के सभी एलिफेंट कैंपों की व्यवस्था की समीक्षा की।
नई SOP के तहत पर्यटकों और हाथियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
हाथियों के लिए भी जरूरी है दूरी
पर्यटकों के सीधे संपर्क पर रोक केवल लोगों की सुरक्षा के लिए ही नहीं बल्कि हाथियों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लगातार बड़ी संख्या में लोगों के करीब आने, छूने या भीड़ होने से जानवरों पर दबाव पड़ सकता है। सुरक्षित दूरी बनाए रखने से हाथियों को भी अपेक्षाकृत शांत वातावरण मिल सकता है।
वन्यजीव पर्यटन में अब ऐसे मॉडल पर जोर बढ़ रहा है जिसमें जानवरों को देखने का अवसर मिले लेकिन उनके प्राकृतिक व्यवहार में अनावश्यक हस्तक्षेप न हो।
दुबारे के खुलने का इंतजार
फिलहाल पर्यटकों के लिए हारंगी और मट्टीगोडु कैंप के दरवाजे खुल गए हैं, लेकिन दुबारे एलिफेंट कैंप के लिए इंतजार जारी रहेगा।
वन विभाग सभी आवश्यक सुरक्षा तैयारियां पूरी करने के बाद इसे खोलने पर निर्णय करेगा।
मई की घटना के बाद कैंपों को बंद करने से लेकर नई SOP तैयार करने तक सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। अब चार महीने बाद पर्यटन गतिविधियां दोबारा शुरू हो रही हैं, लेकिन इस बार अनुभव पहले से अलग होगा—पर्यटक हाथियों को देख सकेंगे, लेकिन उन्हें छूने या बेहद करीब जाने की अनुमति नहीं होगी।





