
बेंगलुरु। वर्ष 2017 में 17 वर्षीय छात्रा के अपहरण और उसके साथ बार-बार दुष्कर्म के मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। बेंगलुरु ग्रामीण जिला फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट-3 ने पहले आरोपी राघवेंद्र और तीसरे आरोपी सागर को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने पीड़िता को सात लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
‘बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण’ यानी पॉक्सो कानून के तहत दर्ज इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र विशेष अदालत में हुई। न्यायाधीश रमा नायक ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने तथा अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। मामले में विशेष सरकारी वकील जे.आर. रमेश ने अभियोजन पक्ष की ओर से बहस की।
इस मामले में कुल चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें राघवेंद्र और सागर को अदालत ने दोषी ठहरा दिया है, जबकि दूसरे और चौथे आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। करीब नौ वर्ष बाद आए फैसले ने पीड़िता को न्यायिक राहत दी है, लेकिन दो आरोपियों के फरार रहने के कारण मामले का एक हिस्सा अभी अधूरा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में भी दो दोषियों को 20-20 वर्ष की कैद और अन्य दो आरोपियों के फरार होने की जानकारी दी गई है।
दोस्त से मिलाने के नाम पर दिया था झांसा
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 26 अक्टूबर 2017 की रात करीब आठ बजे हुई थी। उस समय 17 वर्षीय पीड़िता व्हाइटफील्ड रेलवे स्टेशन के पास अपने एक दोस्त का इंतजार कर रही थी। यह क्षेत्र कडुगोडी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली पीड़िता के.आर. पुरम स्थित एक निजी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी।
इसी दौरान राघवेंद्र और सागर रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे। अभियोजन का आरोप था कि दोनों ने छात्रा से बातचीत करते हुए दावा किया कि उसका दोस्त एक लॉज में मौजूद है। उन्होंने पीड़िता से यह भी कहा कि उसके दोस्त ने ही उन्हें उसे वहां लाने के लिए भेजा है। परिचित व्यक्ति का नाम लेकर भरोसा दिलाए जाने के कारण छात्रा उनकी बातों में आ गई।
इसके बाद छात्रा को कथित रूप से गुमराह करके वहां से ले जाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़ी परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष अदालत ने राघवेंद्र और सागर के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को प्रमाणित मानते हुए उन्हें दोषी ठहराया।
पीड़िता की पहचान रखी गई गोपनीय
यौन अपराध से जुड़े मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर करना कानूनन प्रतिबंधित है। इसी कारण मामले से संबंधित समाचारों में उसका नाम और पहचान बताने वाली दूसरी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 वर्ष थी, इसलिए मामला पॉक्सो कानून के दायरे में आया।
पॉक्सो कानून बच्चों और किशोरों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके तहत पीड़ित की गरिमा, सुरक्षा और पहचान की गोपनीयता को विशेष महत्व दिया जाता है। मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में करने का प्रावधान है, ताकि पीड़ित को संवेदनशील वातावरण में न्याय मिल सके।
प्रत्येक दोषी पर 20 हजार का जुर्माना
विशेष अदालत ने दोनों दोषियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास के साथ प्रत्येक पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इस तरह दोनों पर कुल 40 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। अदालत ने इसके अतिरिक्त पीड़िता को सात लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया।
पीड़ित मुआवजा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसका उद्देश्य अपराध के कारण हुए मानसिक, सामाजिक और व्यक्तिगत नुकसान से उबरने में सहायता देना भी होता है। अदालत का यह आदेश पीड़िता के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नौ साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया
अक्टूबर 2017 की घटना में फैसला करीब नौ वर्ष बाद आया है। इस दौरान मामले की जांच, आरोपपत्र, साक्ष्यों की प्रस्तुति, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों सहित न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरण पूरे किए गए। अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर दो आरोपियों को दोषी पाया और उनके अपराध की गंभीरता को देखते हुए लंबी अवधि के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
फैसले के बावजूद अन्य दो आरोपियों का फरार रहना जांच और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। फरार आरोपियों के संबंध में अभी दोषसिद्धि नहीं हुई है, इसलिए कानून की दृष्टि से वे आरोपित हैं और उनके मामले का फैसला अदालत में सुनवाई के बाद ही होगा।
यह फैसला उन मामलों में सख्त संदेश देता है जिनमें नाबालिगों को विश्वास में लेकर या झांसा देकर यौन अपराध का शिकार बनाया जाता है। अदालत द्वारा दी गई कठोर सजा से स्पष्ट है कि बच्चों के विरुद्ध अपराधों को गंभीरता से देखा जाता है। साथ ही, दो आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी होने के कारण मामले में आगे की कार्रवाई पर भी निगाह बनी रहेगी।





