
Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु के दो पर्वतारोहियों ने 46 दिनों तक चले कठिन और चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सफलता को कर्नाटक माउंटेनियरिंग एसोसिएशन (KMA) की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
इस अभियान में शामिल बिज़नेसमैन संतोष देवराजप्पा (40) और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चिन्मयी त्रिशुलमूर्ति (45) ने 21 मई को एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर इतिहास रच दिया। दोनों पर्वतारोही नेपाल की ओर से साउथ ईस्ट ‘साउथ कोल’ रूट से चढ़ाई करते हुए दोपहर करीब 12:10 बजे 29,031 फुट (8,848.86 मीटर) ऊंची चोटी पर पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, इस पूरे अभियान की शुरुआत 4 अप्रैल को बेंगलुरु से हुई थी, जिसके बाद टीम काठमांडू रवाना हुई। वहां से आगे की चढ़ाई की तैयारी और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं। यह पूरा अभियान लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक तैयारी के साथ आगे बढ़ा।
पर्वतारोहियों ने चढ़ाई से पहले उच्च ऊंचाई के अनुकूल बनने के लिए कई अभ्यास किए। इसी तैयारी के तहत 22 अप्रैल को उन्होंने 20,070 फुट ऊंची लोबुचे ईस्ट पीक पर भी सफल चढ़ाई की थी, जिससे उनके शरीर को अधिक ऊंचाई वाले वातावरण के लिए तैयार किया जा सके।
कर्नाटक माउंटेनियरिंग एसोसिएशन ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया है। एसोसिएशन के अनुसार, यह अभियान न केवल पर्वतारोहण की कठिनाइयों को दर्शाता है, बल्कि अनुशासन, धैर्य और निरंतर तैयारी का भी उदाहरण है।
एवरेस्ट अभियान के दौरान मौसम की कठिन परिस्थितियों, कम ऑक्सीजन स्तर और जोखिम भरे रास्तों के बावजूद दोनों पर्वतारोहियों ने अपने लक्ष्य को हासिल किया। उनकी यह सफलता राज्य के युवा पर्वतारोहियों के लिए भी प्रेरणा मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एवरेस्ट जैसी ऊंची चोटी पर चढ़ाई केवल शारीरिक क्षमता नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और लंबे समय की योजना का परिणाम होती है। इस उपलब्धि के बाद दोनों पर्वतारोहियों की चर्चा खेल और एडवेंचर समुदाय में तेजी से हो रही है।





