कर्नाटक

तिरुमाला आरती में कर्नाटक प्रतिनिधियों की एंट्री पर TTD का विरोध

Kavita2
14 July 2026 11:38 AM IST
तिरुमाला आरती में कर्नाटक प्रतिनिधियों की एंट्री पर TTD का विरोध
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तिरुपति : तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है, जिसमें कर्नाटक के प्रतिनिधियों, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को तिरुमाला श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में होने वाली विशेष दैनिक आरती में शामिल होने की अनुमति देने की बात कही गई थी। TTD ने इस प्रस्ताव को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा है कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और पवित्रता को बनाए रखना जरूरी है।

TTD ट्रस्ट के सदस्य जी. भानुप्रकाश रेड्डी ने सोमवार को एक वीडियो बयान जारी कर इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तिरुपति मंदिर को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से अपने बयान को वापस लेने की मांग भी की।

भानुप्रकाश रेड्डी ने कहा कि भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर एक अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल है और यहां की सदियों पुरानी परंपराओं का पालन किया जाता है। उन्होंने कहा कि मंदिर की पूजा पद्धतियों में बदलाव किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक प्रस्ताव के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।

तिरुमाला में हर सुबह होने वाली ‘तिरुमाला नित्य आरती’ भगवान श्री वेंकटेश्वर के लिए गर्भगृह में की जाने वाली एक विशेष पूजा है। यह आरती धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस पूजा में शामिल होने की अनुमति परंपरागत रूप से कुछ विशेष लोगों को ही दी जाती है।

ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार, इस आरती के समय मठाधीश, मुख्य पुजारी, मंदिर के प्रमुख अधिकारी और मैसूर के महाराजा के प्रतिनिधि की उपस्थिति रही है। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए TTD का कहना है कि आरती में भाग लेने वालों की सूची में बदलाव सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।

दरअसल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तिरुमाला मंदिर में कर्नाटक के प्रतिनिधियों और अधिकारियों को नित्य आरती में शामिल होने का अवसर देने का प्रस्ताव रखा था। उनका उद्देश्य कर्नाटक से जुड़े लोगों और प्रतिनिधियों को धार्मिक अवसरों में भागीदारी का मौका देना बताया गया था।

हालांकि, TTD ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई है। ट्रस्ट के सदस्य ने कहा कि मंदिर की धार्मिक गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तिरुमाला मंदिर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

इस विवाद के बाद मंदिर प्रशासन और कर्नाटक सरकार के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि, अभी तक इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। TTD की ओर से धार्मिक परंपराओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

तिरुमाला श्री वेंकटेश्वर मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की पूजा व्यवस्था और परंपराओं को लेकर TTD लंबे समय से सख्त नियमों का पालन करता आया है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठानों की पवित्रता और परंपराओं को बनाए रखना उसकी प्रमुख जिम्मेदारी है। किसी भी बदलाव से पहले धार्मिक विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की राय लेना जरूरी है।

वहीं, इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आ सकती है। कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव और TTD के विरोध के बाद अब सभी की नजर आगे होने वाली चर्चाओं और फैसले पर है।

फिलहाल तिरुमाला मंदिर की नित्य आरती में शामिल होने को लेकर शुरू हुआ विवाद धार्मिक परंपरा और प्रशासनिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन के सवाल को सामने ला रहा है। TTD ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मंदिर की सदियों पुरानी व्यवस्थाओं में बदलाव को लेकर वह बेहद सतर्क रुख अपनाएगा।

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