कर्नाटक

KPSC भर्ती घोटाले में IAS अधिकारी की मुश्किलें बढ़ीं, गंगवार पर मुकदमा चलाने की मंजूरी

Kavita2
24 Oct 2026 1:43 PM IST
KPSC भर्ती घोटाले में IAS अधिकारी की मुश्किलें बढ़ीं, गंगवार पर मुकदमा चलाने की मंजूरी
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बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के भर्ती घोटाले में गिरफ्तार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कर्नाटक सरकार ने उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार, 24 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। गंगवार पर पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र और उनके उत्तर परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का आरोप है। इस मामले की जांच कर्नाटक पुलिस की अपराध जांच शाखा (सीआईडी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहे हैं।

सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद जांच एजेंसियों के लिए अदालत में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले में पहले ही गंगवार को गिरफ्तार करके निलंबित किया जा चुका है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करने के बदले बिचौलियों के माध्यम से करोड़ों रुपये की रिश्वत ली गई थी।

मुख्यमंत्री ने अभियोजन चलाने की दी अनुमति

कर्नाटक सरकार ने आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ भ्रष्टाचार और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से संबंधित मामले में मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी है।

जानकारी के अनुसार, यह मंजूरी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत संबंधित फाइलों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद प्रदान की गई है।

इस कानूनी प्रावधान के अंतर्गत कुछ श्रेणियों के लोक सेवकों के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े कथित अपराधों में अभियोजन के लिए सक्षम सरकार की अनुमति आवश्यक होती है।

इससे पहले सीआईडी ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर गंगवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी।

सरकारी मंजूरी मिलने के बाद जांच एजेंसी आरोपपत्र और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर सकेगी।

पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप

यह मामला कर्नाटक लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा से जुड़ा है।

राज्य के पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग में पशु चिकित्सा अधिकारियों के 400 पदों के लिए जनवरी 2026 में परीक्षा आयोजित की गई थी।

परीक्षा आठ और नौ जनवरी को आयोजित हुई थी। इसके बाद 17 जुलाई को चयन सूची प्रकाशित की गई।

चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और सही उत्तर उपलब्ध कराए जाने के आरोप सामने आए।

मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसे बाद में सीआईडी को सौंप दिया गया।

परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे गंगवार

ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

वे जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक कर्नाटक लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताएं उसी अवधि में हुई थीं, जब गंगवार परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

मार्च 2026 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था। इसके बाद वे राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम निदेशक के पद पर तैनात हुए।

जांच के दौरान सामने आए आरोपों के बाद 29 अगस्त को सीआईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

परीक्षा से पहले लीक हुए थे 70 से 80 सवाल

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया कि पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा के लगभग 70 से 80 प्रश्न कथित तौर पर परीक्षा से पहले लीक किए गए थे।

ईडी के अनुसार, गंगवार ने परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नों और उनके उत्तरों की जानकारी बिचौलिए बसवराज कन्नाले तक पहुंचाई थी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रश्नपत्र से संबंधित जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त करके बिचौलिए को उपलब्ध कराई गई।

इसके बाद कथित तौर पर यह जानकारी उन अभ्यर्थियों तक पहुंचाई गई, जिन्होंने चयन सुनिश्चित कराने के लिए रकम दी थी।

जांच में करीब 10 अभ्यर्थियों तक लीक प्रश्न पहुंचने की बात सामने आई। इनमें कुछ अभ्यर्थियों ने चयन सूची में ऊंचा स्थान हासिल किया था।

1.30 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप

इस भर्ती घोटाले में सबसे गंभीर आरोप करोड़ों रुपये की रिश्वत के लेनदेन से जुड़ा है।

सीआईडी और ईडी की जांच के अनुसार, बिचौलिए बसवराज कन्नाले ने कथित तौर पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली थी।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि परीक्षा में सहायता दिलाने के नाम पर कुछ अभ्यर्थियों से 20 लाख से 40 लाख रुपये या उससे अधिक की रकम मांगी गई।

ईडी की जांच में गंगवार को करीब 1.30 करोड़ रुपये पहुंचाए जाने का आरोप भी सामने आया है।

इसके अलावा जांच एजेंसी ने गंगवार के परिवार के एक सदस्य के नाम खरीदी गई संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की है।

हालांकि, रिश्वत लेने और प्रश्नपत्र लीक करने के ये आरोप जांच एजेंसियों के हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक गंगवार को दोषी नहीं माना जा सकता।

29 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी

सीआईडी ने गंगवार को लगातार पूछताछ के बाद 29 अगस्त को गिरफ्तार किया था।

इसके अगले दिन उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इसके बाद जांच एजेंसी ने विस्तृत पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस हिरासत में भी लिया।

गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने तीन सितंबर को गंगवार को निलंबित करने का आदेश जारी किया था।

सरकार ने अपने आदेश में कहा था कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़े आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता देने तथा सरकार की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया था।

ईडी भी कर रही मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

इस मामले में सीआईडी के अलावा प्रवर्तन निदेशालय भी सक्रिय है।

ईडी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कथित अवैध आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही है।

जांच एजेंसी ने सितंबर में गंगवार और बिचौलिए बसवराज कन्नाले को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था।

ईडी को आशंका है कि भर्ती घोटाला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं था।

एजेंसी ने अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी संभावित गड़बड़ियों की जांच की आवश्यकता जताई है।

जांच के दौरान विभिन्न व्यक्तियों के बीच पैसों के लेनदेन, डिजिटल उपकरणों और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तेज हुई कार्रवाई

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सितंबर में भर्ती घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने और नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया था।

हालांकि, राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि नए सिरे से पूरी जांच कराने के लिए पर्याप्त आधार होना आवश्यक है।

अदालत ने संकेत दिया कि पहले से चल रही जांच के आधार पर आवश्यक आरोपपत्र दाखिल किए जा सकते हैं।

इसके बाद सीआईडी ने गंगवार के खिलाफ अभियोजन की अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी थी।

औद्योगिक विस्तार अधिकारी भर्ती भी जांच के दायरे में

पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा के अतिरिक्त कर्नाटक लोक सेवा आयोग की अन्य नियुक्तियों में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

इनमें औद्योगिक विस्तार अधिकारी के पदों पर भर्ती से संबंधित शिकायतें भी शामिल हैं।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र या उत्तर लीक करने के लिए समान नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था।

इसके लिए संदिग्ध अभ्यर्थियों, बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों के बीच संपर्क तथा आर्थिक लेनदेन की जांच की जा रही है।

हालांकि, अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की पूरी स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

अब आरोपपत्र और अदालती सुनवाई पर नजर

राज्य सरकार से अभियोजन की मंजूरी मिलने के बाद ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण बाधा दूर हो गई है।

सीआईडी को निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपपत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इसके साथ ही ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच अलग से जारी रहेगी।

इस मामले ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

अब अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह तय होगा कि गंगवार और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप किस हद तक साबित होते हैं।

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