
Karnataka कर्नाटक: ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने शनिवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि पुरानी गाड़ियों के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट्स (HSRPs) लगाना ज़रूरी नहीं है। डिपार्टमेंट के एडिशनल कमिश्नर ऑफ़ ट्रांसपोर्ट (एनफोर्समेंट, साउथ) एम पी ओंकारेश्वरी ने बयान जारी कर कहा कि केंद्र सरकार ने 4 दिसंबर, 2018 को नोटिफिकेशन जारी कर 1 अप्रैल, 2019 से पहले रजिस्टर्ड सभी वाहनों पर HSRP लगाना अनिवार्य कर दिया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्नाटक ने केंद्र के इस नोटिफिकेशन के अनुसार ऐसी सभी गाड़ियों के लिए HSRP को अनिवार्य कर दिया है। “केंद्र का आदेश लागू है और कोई स्टे ऑर्डर नहीं है। केवल उच्च न्यायालय में चल रही रिट अपील की वजह से फिलहाल इसे लागू नहीं किया गया है,” ओंकारेश्वरी ने कहा।
इस रिट अपील में अपीलकर्ता ने चुनौती दी है कि गाड़ियों पर HSRP केवल OEMs (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) और उनके अधिकृत डीलर्स द्वारा ही लगाए जाएं। अपीलकर्ताओं का कहना है कि टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट वाले सभी लाइसेंस्ड नंबर प्लेट मैन्युफैक्चरर्स को भी यह काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए। कोर्ट ने 2023 में फाइल हुई इस रिट अपील पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को किसी भी जल्दबाजी में कदम उठाने, आदेश लागू करने या निर्णय लेने से रोक दिया है।
एम पी ओंकारेश्वरी ने मीडिया से कहा, “कई रिपोर्ट्स गलतफहमी पर आधारित थीं। HSRP पुराने वाहनों पर अनिवार्य है, केवल हाई कोर्ट में मामला विचाराधीन है। राज्य सरकार केंद्र के नियमों के अनुरूप सभी पुराने वाहनों के लिए HSRP लगाने का काम करेगी।”
ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने यह भी उल्लेख किया कि HSRP का उद्देश्य वाहनों की सुरक्षा और ट्रैकिंग को सुनिश्चित करना है। HSRP के बिना वाहन का पंजीकरण और कानूनी संचालन चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि यह वाहन की पहचान और असली मालिक का प्रमाण सुनिश्चित करता है।
कर्नाटक में HSRP लगाने के लिए वाहनों के मालिकों को नज़दीकी OEM डीलर या अधिकृत प्लेट मैन्युफैक्चरर्स से संपर्क करना होगा। हालांकि, अपील में सुझाए गए लाइसेंस्ड नंबर प्लेट मैन्युफैक्चरर्स को अनुमति देने का मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए फिलहाल यह नियम लागू नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, HSRP का अनिवार्य होना सड़क सुरक्षा और वाहन चोरी रोकने के प्रयासों में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार इस मामले में केंद्र के निर्देशों का पालन कर रही है और कोर्ट के निर्णय के बाद किसी भी बदलाव की संभावना बनी रहेगी।
इस मामले को लेकर वाहन मालिकों और आम जनता में भ्रम दूर करने के लिए ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने मीडिया को स्पष्ट जानकारी देने की पहल की है।





