कर्नाटक

रेलवे स्टेशन पर आधी रात धू-धूकर जला ट्रेन का कोच

Kavita2
7 Sept 2026 11:53 AM IST
रेलवे स्टेशन पर आधी रात धू-धूकर जला ट्रेन का कोच
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बेंगलुरु। शहर के क्रांतिवीर संगोली रायण्णा (मजेस्टिक) रेलवे स्टेशन पर देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी ट्रेन के एक खाली कोच में अचानक भीषण आग लग गई। रात करीब 11:30 बजे लगी आग ने कुछ ही समय में पूरे कोच को अपनी चपेट में ले लिया। आग की ऊंची लपटों और घने धुएं से रेलवे स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोच में कोई यात्री मौजूद नहीं था। इससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई और एक बड़ा हादसा टल गया।

प्रारंभिक तौर पर आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि रेलवे पुलिस ने घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आग विद्युत खराबी से लगी या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था।

जानकारी के मुताबिक घटना देर रात करीब 11:30 बजे की है। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर ट्रेन का खाली कोच खड़ा था। इसी दौरान अचानक कोच से धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ ही समय में आग तेजी से फैल गई और लपटें पूरे कोच में फैल गईं।

स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों ने आग की लपटें देखीं तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। आग तेजी से फैलने के कारण आसपास के हिस्सों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई।

कुछ ही देर में पूरा कोच आग की चपेट में आ गया। आग इतनी भीषण थी कि कोच पूरी तरह जलकर खाक हो गया। स्टेशन परिसर में दूर तक घना धुआं दिखाई देने लगा।

घटना की सूचना मिलने के बाद रेलवे पुलिस और अग्निशमन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू किया। काफी प्रयास के बाद आग को नियंत्रित कर लिया गया।

दमकल कर्मियों की प्राथमिकता आग को आसपास खड़े अन्य कोच या रेलवे की दूसरी संपत्तियों तक फैलने से रोकना था। यदि आग दूसरे कोचों तक पहुंच जाती तो नुकसान का दायरा काफी बड़ा हो सकता था।

घटना के समय संबंधित कोच खाली था। इसमें कोई यात्री नहीं होने के कारण किसी व्यक्ति के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं है। देर रात हुई इस घटना में यह सबसे बड़ी राहत मानी जा रही है।

यदि यही आग किसी यात्री से भरे कोच में लगती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। रात का समय होने और आग के तेजी से फैलने के कारण यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन सकती थी।

घटना के बाद रेलवे स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली। आग से कोच को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन किसी तरह की जनहानि नहीं होने से संभावित बड़ा हादसा टल गया।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल आग लगने के कारण को लेकर है। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की संभावना जताई जा रही है। रेलवे कोच में मौजूद विद्युत वायरिंग या किसी अन्य इलेक्ट्रिकल सिस्टम में खराबी आग का कारण हो सकती है, लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

रेलवे पुलिस ने घटना को लेकर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तकनीकी टीम कोच की जांच कर आग के शुरुआती बिंदु का पता लगाने का प्रयास कर सकती है।

आग लगने के मामलों में यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि लपटें सबसे पहले कोच के किस हिस्से से उठीं। इससे आग के कारण तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। जले हुए विद्युत तार, उपकरण और अन्य हिस्सों की तकनीकी जांच भी की जा सकती है।

रेलवे अधिकारी यह भी जांच सकते हैं कि संबंधित कोच का अंतिम बार तकनीकी निरीक्षण कब किया गया था और उसमें किसी प्रकार की विद्युत खराबी की शिकायत पहले सामने आई थी या नहीं।

कोच पूरी तरह जल जाने के कारण साक्ष्य जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद तकनीकी और फोरेंसिक जांच के जरिए आग के कारण का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा।

स्टेशन और प्लेटफॉर्म पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। फुटेज से यह पता चल सकता है कि आग लगने से पहले कोच या उसके आसपास किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि हुई थी या नहीं।

इसके अलावा स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी लिए जा सकते हैं। सबसे पहले धुआं या आग किसने देखी और उस समय कोच की स्थिति क्या थी, यह जानकारी जांच में उपयोगी होगी।

क्रांतिवीर संगोली रायण्णा रेलवे स्टेशन बेंगलुरु के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में शामिल है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है। ऐसे महत्वपूर्ण स्टेशन पर खड़े कोच में आग लगने की घटना सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मानी जा रही है।

घटना के बाद रेलवे की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ सकती है। स्टेशन पर उपलब्ध फायर सेफ्टी उपकरणों और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था की समीक्षा की जा सकती है।

रेलवे में आग की घटनाओं को रोकने के लिए कोच की विद्युत व्यवस्था का नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी होता है। पुराने या क्षतिग्रस्त तार, ओवरलोडिंग अथवा इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खराबी जोखिम बढ़ा सकती है।

हालांकि मौजूदा घटना में शॉर्ट सर्किट केवल प्रारंभिक आशंका है। जांच पूरी होने से पहले इसे आग लगने का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।

फायर ब्रिगेड द्वारा आग पर नियंत्रण पाने के बाद रेलवे और पुलिस अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। कोच को हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।

यह भी देखा जाएगा कि घटना का स्टेशन की सामान्य रेल सेवाओं पर कितना असर पड़ा। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर आग लगने के कारण सुरक्षा के लिहाज से कुछ समय के लिए गतिविधियां प्रभावित हुई होंगी, लेकिन इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

रेलवे पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद जांच कई पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। तकनीकी खराबी के अलावा अन्य संभावित कारणों की भी पड़ताल की जाएगी।

घटना ने एक बार फिर रेलवे परिसरों में अग्नि सुरक्षा की अहमियत को सामने ला दिया है। यात्रियों से भरे रेलवे स्टेशन पर आग जैसी घटना बेहद गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए कोच, प्लेटफॉर्म और अन्य रेलवे परिसरों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता और उनका सही तरीके से काम करना बेहद जरूरी है।

फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि जिस कोच में आग लगी वह पूरी तरह खाली था। आग में कोच जलकर खाक हो गया, लेकिन किसी यात्री या रेलवे कर्मचारी के हताहत होने की खबर नहीं है।

अब रेलवे पुलिस की जांच के बाद ही आग लगने की सही वजह सामने आएगी। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका है, लेकिन तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण की पुष्टि हो सकेगी।

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