
Karnataka कर्नाटक: शहर में बढ़ते तापमान और हीटवेव के असर को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की सुरक्षा के लिए हीट-हेल्थ प्रोटोकॉल स्कीम के तहत कूलिंग किट और ‘AC हेलमेट’ वितरित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य गर्मी में बाहर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को स्वास्थ्य जोखिमों से बचाना है।
गुरुवार को बेंगलुरु नॉर्थ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कमिश्नर पोम्माला सुनील कुमार की अध्यक्षता में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं, सावधानियों और प्राथमिक उपचार के बारे में जागरूक किया गया। इसी दौरान उन्हें विशेष कूलिंग किट और एसी हेलमेट प्रदान किए गए।
यह ‘हीट-हेल्थ प्रोटोकॉल’ प्रोजेक्ट C40, सेंसिंग लोकल और ग्रीन दल के सहयोग से शुरू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्लाइमेट चेंज के कारण बढ़ते तापमान से उत्पन्न स्वास्थ्य खतरों को कम करना है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो दिनभर खुले वातावरण में काम करते हैं।
कमिश्नर पोम्माला सुनील कुमार ने कहा कि बदलते मौसम और लगातार बढ़ती गर्मी के कारण ट्रैफिक पुलिस और अन्य फील्ड स्टाफ की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए उनके लिए सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के तहत वितरित की गई किट के उपयोग और प्रभाव पर फीडबैक एकत्र किया जाएगा, जिसके आधार पर भविष्य में इस सुविधा को और अधिक कर्मचारियों तक बढ़ाया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले भी नगर निगम के सिविल सर्वेंट्स को इसी तरह की हेल्थ केयर किट दी जा चुकी हैं। अब इस योजना का विस्तार ट्रैफिक पुलिस बल तक किया गया है, ताकि गर्मी में ड्यूटी के दौरान उनकी कार्यक्षमता और स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रह सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में तापमान बढ़ने के साथ ऐसे कदम बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ट्रैफिक पुलिस जैसी फील्ड ड्यूटी करने वाली टीमें लंबे समय तक सीधे धूप और गर्मी में काम करती हैं। इस तरह की पहल से हीट स्ट्रोक और अन्य गर्मी से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
इस कार्यक्रम को शहर में क्लाइमेट एडाप्टेशन और वर्कर सेफ्टी की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य विभागों और शहरों में भी लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।





