कर्नाटक

कर्नाटक में पर्यटन परियोजनाएं सुस्त

Kavita2
11 Aug 2026 12:04 PM IST
कर्नाटक में पर्यटन परियोजनाएं सुस्त
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बेंगलुरु। कर्नाटक में पर्यटन क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से करोड़ों रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने के बावजूद कई योजनाओं की प्रगति उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है। पर्यटन विकास से जुड़ी तीन प्रमुख परियोजनाओं में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इनमें सवदत्ती के दो पर्यटन प्रोजेक्ट और बीदर को हेरिटेज टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की योजना शामिल है।

यह जानकारी केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने लोकसभा में दावणगेरे की सांसद डॉ. प्रभा मल्लिकार्जुन की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में दी। सांसद ने कर्नाटक में पर्यटन क्षेत्रों और प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास को लेकर केंद्र सरकार से जानकारी मांगी थी। मंत्रालय के जवाब में राज्य में केंद्र की विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति का विवरण सामने आया।

तीन परियोजनाओं में अब तक नहीं हुई प्रगति

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, सवदत्ती से जुड़ी दो परियोजनाओं और बीदर को हेरिटेज टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित करने वाली एक परियोजना में अब तक कोई प्रगति दर्ज नहीं हुई है। इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बावजूद जमीन पर काम आगे नहीं बढ़ पाने से इनके समय पर पूरा होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सवदत्ती धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। यहां पर्यटन सुविधाओं के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके बावजूद प्रस्तावित परियोजनाओं में काम शुरू नहीं होना क्षेत्र के पर्यटन विकास के लिए चुनौती माना जा रहा है।

इसी तरह बीदर को हेरिटेज टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की योजना का उद्देश्य शहर की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत को पर्यटन से जोड़ना है। बीदर की ऐतिहासिक इमारतें और विरासत स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। परियोजना की धीमी रफ्तार से इस क्षमता का पूरा लाभ उठाने में देरी हो सकती है।

कई परियोजनाएं सिर्फ शुरुआती चरण में

मंत्रालय के जवाब में यह भी सामने आया कि केंद्र सरकार की विभिन्न पर्यटन योजनाओं के तहत स्वीकृत कई अन्य परियोजनाएं भी धीमी गति से आगे बढ़ रही हैं। कुछ परियोजनाओं में अब तक केवल 10 प्रतिशत तक ही काम हो पाया है।

इससे संकेत मिलता है कि परियोजनाओं की स्वीकृति और धनराशि जारी होने के बाद भी उनके क्रियान्वयन में प्रशासनिक, तकनीकी या अन्य स्तर की अड़चनें बनी हुई हैं। समय पर परियोजनाएं पूरी नहीं होने से पर्यटन क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव लाने का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।

पर्यटन क्षेत्र को बड़ा आर्थिक फायदा देने की क्षमता

कर्नाटक ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक और तटीय पर्यटन के लिहाज से देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। हम्पी, मैसूरु, बादामी, पट्टदकल, ऐहोल, बीदर और सवदत्ती जैसे कई स्थलों में पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं।

राज्य में बेहतर पर्यटन बुनियादी ढांचा विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। होटल, परिवहन, गाइड सेवा, स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य छोटे कारोबारों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

इसी वजह से केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पर्यटन स्थलों पर सड़क, पार्किंग, पर्यटक सुविधाएं, सूचना केंद्र, विरासत संरक्षण और अन्य बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन परियोजनाओं की धीमी गति इस पूरी प्रक्रिया के सामने चुनौती बन रही है।

सांसद के सवाल से सामने आई स्थिति

दावणगेरे की सांसद डॉ. प्रभा मल्लिकार्जुन ने लोकसभा में कर्नाटक में पर्यटन जोन और टूरिस्ट डेस्टिनेशन के विकास से संबंधित सवाल पूछा था। उनके सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने विभिन्न परियोजनाओं की स्थिति की जानकारी दी।

मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी से स्पष्ट हुआ कि राज्य में कई परियोजनाओं को केंद्र से मंजूरी मिलने के बावजूद उनके क्रियान्वयन में अपेक्षित तेजी नहीं आई है। खासकर तीन परियोजनाओं में अब तक किसी प्रकार की प्रगति दर्ज नहीं होना चिंता का विषय है।

निगरानी और समयबद्धता की जरूरत

पर्यटन परियोजनाओं के जानकारों के अनुसार, किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की सफलता के लिए सिर्फ बजट मंजूर होना पर्याप्त नहीं है। परियोजना के लिए भूमि, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, निविदा प्रक्रिया, संबंधित विभागों के बीच समन्वय और नियमित निगरानी भी जरूरी है।

यदि किसी परियोजना में लंबे समय तक प्रगति नहीं होती है तो संबंधित विभागों को अड़चनों की पहचान कर उन्हें दूर करने की जरूरत होती है। इसी तरह बेहद धीमी गति से चल रही परियोजनाओं की भी नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।

स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

सवदत्ती और बीदर जैसे क्षेत्रों में पर्यटन परियोजनाओं के पूरा होने से स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सुविधाओं के साथ पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय कारोबार को भी गति मिल सकती है।

हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि मंजूर परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाए। फिलहाल तीन प्रमुख परियोजनाओं में शून्य प्रगति और कई अन्य परियोजनाओं में बेहद धीमी रफ्तार ने कर्नाटक के पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

केंद्र की ओर से धन और मंजूरी उपलब्ध होने के बाद अब निगाह राज्य स्तर पर परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर है। यदि संबंधित विभाग तेजी से काम आगे बढ़ाते हैं तो इन पर्यटन स्थलों की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और कर्नाटक को देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में और मजबूती से स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

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