कर्नाटक

कोप्पल में कैमरे में कैद हुआ बाघ, वन विभाग ने पकड़ने की तैयारी शुरू की

Kavita2
25 Aug 2026 11:21 AM IST
कोप्पल में कैमरे में कैद हुआ बाघ, वन विभाग ने पकड़ने की तैयारी शुरू की
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कोप्पल। कर्नाटक के कोप्पल जिले के गंगावती तालुक में एक बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद वन विभाग ने उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। पिछले कुछ महीनों से सनापुर और आसपास के इलाकों में बाघ देखे जाने की स्थानीय लोगों की ओर से लगातार सूचनाएं मिल रही थीं, लेकिन अब तक वन विभाग के पास उसकी मौजूदगी का कोई स्पष्ट दृश्य प्रमाण नहीं था। रविवार रात विभाग द्वारा लगाए गए CCTV कैमरे में बाघ की गतिविधियां रिकॉर्ड होने के बाद अधिकारियों ने इलाके में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

बाघ के कैमरे में कैद होने के बाद वन विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए उसके मूवमेंट पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर उसे पकड़ने की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, अभियान को विशेषज्ञ सहायता देने के लिए बांदीपुर टाइगर रिजर्व से विशेषज्ञों की टीम बुलाए जाने की संभावना है।

तीन महीने से बाघ दिखने का दावा

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले करीब तीन महीनों से सनापुर और आसपास के क्षेत्रों में बाघ को देखे जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई लोगों ने वन विभाग को इसकी सूचना भी दी थी। हालांकि, लंबे समय तक बाघ की मौजूदगी का कोई फोटो, वीडियो या अन्य स्पष्ट दृश्य प्रमाण सामने नहीं आया था।

इसी वजह से वन विभाग के सामने बाघ की वास्तविक मौजूदगी और उसके लगातार एक ही इलाके में रहने की पुष्टि करना चुनौती बना हुआ था। रविवार रात CCTV कैमरे में बाघ के दिखाई देने के बाद अब इन दावों को ठोस आधार मिला है।

वन विभाग ने क्षेत्र में पहले से लगाए गए निगरानी कैमरों के फुटेज की जांच शुरू कर दी है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाघ किस दिशा से इलाके में पहुंचा, उसका मूवमेंट किस क्षेत्र में है और वह किन रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है।

बांदीपुर से विशेषज्ञों की टीम आने की संभावना

बाघ को पकड़ने के अभियान में विशेषज्ञों की मदद लेने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए बांदीपुर टाइगर रिजर्व से अनुभवी वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम बुलाए जाने की संभावना है।

विशेषज्ञों की मदद से बाघ की गतिविधियों का आकलन किया जाएगा और उसके व्यवहार के आधार पर उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने की रणनीति बनाई जाएगी। वन विभाग का उद्देश्य बाघ को नुकसान पहुंचाए बिना उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना है।

बाघ को पकड़ने की प्रक्रिया में कई सावधानियां जरूरी होती हैं। इलाके की स्थिति, बाघ की उम्र, उसके व्यवहार और उसके संभावित मार्ग का आकलन करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है।

हम्पी जू को भी तैयार रहने के निर्देश

वन विभाग ने हम्पी जू के कर्मचारियों को भी आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। यदि परिस्थितियों को देखते हुए बाघ को बेहोश करना जरूरी होता है तो इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों की जरूरत पड़ेगी।

हालांकि, बाघ को बेहोश करने का फैसला उसकी स्थिति और मौके की परिस्थितियों के आधार पर ही लिया जाएगा। अधिकारियों का प्राथमिक उद्देश्य लोगों और बाघ दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ऐसे अभियानों में जल्दबाजी से बचना जरूरी होता है, क्योंकि बाघ अचानक दिशा बदल सकता है या घनी झाड़ियों में छिप सकता है। इसलिए विशेषज्ञों की निगरानी और पर्याप्त तैयारी के बाद ही अभियान चलाए जाने की संभावना है।

इंसानों और वन्यजीवों की सुरक्षा पर जोर

बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद वन विभाग ने इलाके में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती कर दी है। पुलिस कर्मियों को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को बाघ के संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों से दूर रखना और किसी अप्रिय घटना की संभावना को कम करना है।

अधिकारियों की कोशिश है कि स्थानीय लोगों को भी सतर्क किया जाए। ग्रामीणों और आसपास रहने वाले लोगों से जंगल या सुनसान इलाकों में अकेले नहीं जाने तथा बाघ की मौजूदगी की स्थिति में उसके करीब जाने की कोशिश नहीं करने की अपील की जा सकती है।

जंगली जानवरों से टकराव रोकना चुनौती

वन विभाग के सामने सिर्फ इंसानों की सुरक्षा ही चुनौती नहीं है, बल्कि बाघ और अन्य जंगली जानवरों के बीच टकराव को रोकना भी जरूरी है। यदि बाघ भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्र के करीब पहुंचा है तो उसके शिकार या दूसरे जानवरों का पीछा करते हुए और आगे बढ़ने की संभावना हो सकती है।

इसी वजह से अतिरिक्त वनकर्मियों की तैनाती की गई है। CCTV कैमरों और अन्य निगरानी माध्यमों के जरिए बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी।

स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता

बाघ के कैमरे में कैद होने के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पिछले तीन महीनों से बाघ देखे जाने की खबरों के बीच अब दृश्य प्रमाण सामने आने से लोग अधिक सतर्क हो गए हैं।

हालांकि वन विभाग का मानना है कि घबराने के बजाय सावधानी बरतना जरूरी है। बाघ की गतिविधियों की निगरानी और लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करके संभावित टकराव को टाला जा सकता है।

अब कैमरों से होगी लगातार निगरानी

वन विभाग के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण होंगे। CCTV फुटेज के आधार पर बाघ के मूवमेंट का पैटर्न समझने की कोशिश की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि वह एक ही इलाके में घूम रहा है या लगातार अपना क्षेत्र बदल रहा है।

यदि बाघ किसी निश्चित इलाके में बार-बार दिखाई देता है तो उसे पकड़ने के लिए अभियान की योजना बनाना आसान होगा। वहीं, यदि उसकी गतिविधियां लगातार बदलती रहती हैं तो विशेषज्ञों को रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।

फिलहाल वन विभाग ने सुरक्षा बढ़ा दी है और विशेषज्ञों की मदद से बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की तैयारी चल रही है। तीन महीने से चली आ रही बाघ की मौजूदगी की चर्चाओं के बीच CCTV में उसकी तस्वीर सामने आना जांच के लिए अहम सफलता मानी जा रही है। अब विभाग की प्राथमिकता बाघ की गतिविधियों पर नजर रखते हुए इंसानों और वन्यजीवों के बीच किसी भी संभावित टकराव को रोकना है।

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