
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा ने गुरुवार को तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को मंजूरी दे दी। इनमें बैंगलोर डेवलपमेंट अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2026, कर्नाटक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (संशोधन) बिल, 2026 और नाडाप्रभु केम्पेगौड़ा हेरिटेज एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2026 शामिल हैं। इन विधेयकों के पारित होने के दौरान सदन में राजनीतिक माहौल भी गरम रहा। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सदस्यों ने अनुसूचित जनजाति निगम (ST कॉर्पोरेशन) से जुड़े कथित घोटाले को लेकर योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच सरकार ने तीनों विधेयकों को सदन से पारित करा लिया। इनमें BDA संशोधन विधेयक को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए बैंगलोर डेवलपमेंट अथॉरिटी के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में कई बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
BDA के वित्तीय अधिकार बढ़ाने का प्रस्ताव
बैंगलोर डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) संशोधन विधेयक में BDA एक्ट, 1976 में कई बदलाव किए गए हैं। विधेयक का एक प्रमुख प्रावधान BDA कमिश्नर की वित्तीय मंजूरी देने की शक्तियों को बढ़ाने से संबंधित है।
मौजूदा व्यवस्था की तुलना में कमिश्नर को अधिक वित्तीय अधिकार मिलने से BDA के विभिन्न विकास कार्यों और परियोजनाओं से जुड़े फैसलों को तेजी से लेने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने से विकास कार्यों में अनावश्यक देरी कम की जा सकती है।
हालांकि, वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी के साथ निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। BDA बेंगलुरु के शहरी विकास, भूमि अधिग्रहण, लेआउट और बुनियादी ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण काम संभालता है। ऐसे में उसके शीर्ष अधिकारियों को अधिक वित्तीय अधिकार दिए जाने का असर बड़े स्तर पर पड़ सकता है।
BDA की जमीन पर कब्जे को लेकर भी बदलाव
संशोधन विधेयक में BDA की जमीन पर कुछ अवैध कब्जेदारों को नियमित करने के लिए लगने वाली फीस में कमी का भी प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों को नियमित करने की प्रक्रिया को आसान बनाना बताया जा रहा है।
बेंगलुरु में BDA की जमीन पर अनधिकृत निर्माण और लेआउट लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग ऐसी जमीन पर घर बनाकर रह रहे हैं और दस्तावेजों की स्थिति को लेकर परेशान हैं। फीस में कमी से पात्र मामलों में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नियमितीकरण का लाभ केवल उन्हीं मामलों में मिले जो संशोधित नियमों और पात्रता की शर्तों के तहत आते हैं। भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता और रिकॉर्ड की जांच बेहद जरूरी होगी, ताकि इस व्यवस्था का दुरुपयोग न हो।
तीन विधेयकों को मिली मंजूरी
विधानसभा में पारित दूसरा प्रमुख विधेयक कर्नाटक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (संशोधन) बिल, 2026 है। यह राज्य में शहरी और क्षेत्रीय नियोजन से जुड़े नियमों में बदलाव से संबंधित है। बढ़ते शहरीकरण के बीच शहरों और कस्बों की योजनाबद्ध वृद्धि के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कानून की महत्वपूर्ण भूमिका है।
तीसरा विधेयक नाडाप्रभु केम्पेगौड़ा हेरिटेज एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2026 है। यह केम्पेगौड़ा से जुड़े विरासत क्षेत्रों के विकास और प्रबंधन से संबंधित प्राधिकरण के कामकाज में संशोधन का रास्ता खोलता है।
इन तीनों विधेयकों को एक ही दिन मंजूरी मिलने से राज्य सरकार ने शहरी विकास और विरासत क्षेत्र से जुड़े कानूनों में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
ST कॉर्पोरेशन मामले पर बीजेपी का प्रदर्शन
विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित किए जाने के दौरान विपक्षी बीजेपी ने ST कॉर्पोरेशन से जुड़े कथित घोटाले का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। बीजेपी सदस्यों ने योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की।
विपक्ष का आरोप है कि कथित घोटाले की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए। बीजेपी सदस्यों ने सदन में विरोध प्रदर्शन करते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
ST कॉर्पोरेशन से जुड़ा मामला पहले भी कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है। विपक्ष लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाता रहा है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है।
सरकार और विपक्ष के बीच टकराव
गुरुवार को विधानसभा की कार्यवाही में एक तरफ सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में जुटी रही, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने ST कॉर्पोरेशन मामले को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। इससे सदन में राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी रही।
बीजेपी की ओर से मंत्री के इस्तीफे की मांग यह संकेत देती है कि विपक्ष आने वाले दिनों में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, सरकार का फोकस शहरी विकास, भूमि और विरासत से जुड़े कानूनों में संशोधन को आगे बढ़ाने पर रहा।
बेंगलुरु के लिए BDA बिल अहम
BDA संशोधन विधेयक का असर बेंगलुरु के शहरी विकास पर व्यापक हो सकता है। शहर में तेजी से बढ़ती आबादी, जमीन की बढ़ती मांग और अनधिकृत लेआउट की समस्या के बीच BDA की भूमिका महत्वपूर्ण है।
कमिश्नर की वित्तीय शक्तियों में वृद्धि से निर्णय प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है, जबकि कुछ अवैध कब्जों को नियमित करने की फीस में कमी से लंबे समय से दस्तावेजों का इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिल सकती है।
अब इन संशोधनों के लागू होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BDA अपनी बढ़ी हुई शक्तियों का इस्तेमाल किस तरह करता है और नियमितीकरण की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है। साथ ही, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा केम्पेगौड़ा हेरिटेज एरिया से जुड़े संशोधनों के प्रभाव भी आने वाले समय में स्पष्ट होंगे।
कुल मिलाकर, गुरुवार का विधानसभा सत्र कानून निर्माण और राजनीतिक टकराव दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। सरकार ने तीन अहम संशोधन विधेयकों को मंजूरी दिलाई, जबकि बीजेपी ने ST कॉर्पोरेशन मामले को लेकर मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग के साथ सदन में अपना विरोध दर्ज कराया।





