
Karnataka कर्नाटक: उद्योग लर्निंग फाउंडेशन की पहल ‘उद्यम व्यापार’ प्रोजेक्ट ने बेंगलुरु के स्ट्रीट फूड वेंडर्स के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना शुरू कर दिया है। यह योजना छोटे फूड व्यापारियों को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है, बल्कि उनके काम करने के तरीके और बिज़नेस मॉडल में भी सुधार कर रही है।
यह प्रोजेक्ट वर्ष 2025 में शुरू किया गया था और अब तक शहर के 350 से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर्स को इससे जोड़ा जा चुका है। योजना का उद्देश्य स्थानीय व्यापारियों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, बिज़नेस गाइडेंस और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाना है।
इस पहल के तहत व्यापारियों की रोजमर्रा की चुनौतियों को समझकर उनके लिए व्यावहारिक समाधान दिए जा रहे हैं। इनमें ग्राहक सेवा में सुधार, व्यवसाय के प्रदर्शन को बेहतर बनाना और रेवेन्यू बढ़ाने जैसी रणनीतियां शामिल हैं।
इसके अलावा, प्रोजेक्ट के तहत डिजिटल प्रमोशन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वेंडर्स अपने व्यवसाय को अधिक ग्राहकों तक पहुंचा सकें। साथ ही, भोजन पकाने की क्षमता में सुधार, बेहतर लाइटिंग और ब्रांडिंग, बैठने की उचित व्यवस्था, बारिश और हवा से बचाव के लिए संरचना, मेन्यू डिज़ाइन और सफाई तथा भोजन प्रस्तुति में सुधार जैसे कदम भी शामिल हैं।
इन सुविधाओं के कारण स्ट्रीट फूड वेंडर्स के व्यवसाय में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। उद्योग व्यापार के डायरेक्टर कृष्णन रंगनाथन के अनुसार, इस योजना से जुड़े व्यापारियों में ग्राहकों की संख्या में औसतन 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि उनकी आय में लगभग 33 प्रतिशत तक का इजाफा दर्ज किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ नहीं है, बल्कि छोटे व्यापारियों को व्यवस्थित और टिकाऊ बिज़नेस मॉडल अपनाने में मदद करना भी है।
स्थानीय वेंडर्स का कहना है कि पहले उन्हें अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए सीमित संसाधनों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के कारण वे बेहतर तरीके से काम कर पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें भारत में असंगठित क्षेत्र को संगठित और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में स्ट्रीट फूड सेक्टर रोजगार और आजीविका का बड़ा स्रोत है।
फिलहाल ‘उद्यम व्यापार’ प्रोजेक्ट को बेंगलुरु में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इसे और अधिक शहरों में भी लागू किया जा सकता है।





