
Karnataka कर्नाटक : राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने गुरुवार को 'कर्नाटक सहकारी समितियां (संशोधन) विधेयक-2024' और 'कर्नाटक सौहार्द सहकारी (संशोधन) विधेयक-2024' राज्य सरकार को वापस भेज दिया। उन्होंने स्पष्टीकरण भी मांगा। राज्यपाल ने कुछ दिन पहले 'कर्नाटक ग्रामीण विकास और पंचायत राज विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2024' को बिना हस्ताक्षर किए वापस कर दिया था, अब दो और विधेयक लौटा दिए हैं। इसके साथ ही कर्नाटक कांग्रेस सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव जारी होता दिख रहा है। राज्यपाल ने कर्नाटक सहकारी समितियां संशोधन विधेयक पर कई आपत्तियां उठाई हैं। सरकार ने सहकारी समितियों के लिए आरक्षण के आधार पर नामांकन को लेकर संशोधन किया था। लेकिन राज्यपाल ने इस संशोधन पर आपत्ति जताई है।
मनोनीत सदस्यों को वोटिंग का अधिकार देने से संघ पर नियंत्रण हो जाएगा। निर्वाचित सदस्यों के अधिकार पिछले दरवाजे से छीन लिए जाएंगे। राज्यपाल ने कहा कि यह सहकारी क्षेत्र की स्वायत्तता को कमजोर करने वाला कदम है। कर्नाटक सौहार्द सहकारी (संशोधन) विधेयक-2024 पर भी आपत्ति जता चुके राज्यपाल ने कहा कि सौहार्द सहकारी विधेयक के बारे में अधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं हैं। राज्यपाल ने सुझाव दिया है कि सभी डिफॉल्टरों को वोटिंग का अधिकार देने के बजाय उन्हें वोटिंग से रोकने के लिए एक उचित तंत्र लागू किया जाना चाहिए।





