
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने राज्य के बेघर और गरीब परिवारों को बड़ी राहत देने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने प्रदेशभर में आवासीय प्लॉट उपलब्ध कराने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है।
उप मुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा है कि राजस्व विभाग हर जिले में कम से कम 50,000 आवासीय प्लॉट विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि 31 दिसंबर तक राज्य में कुल 5 लाख आवासीय प्लॉटों का आवंटन किया जाए।
उन्होंने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राजस्व विभाग के अधिकारियों और सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ बैठक कर योजना की प्रगति की समीक्षा की।
15 सितंबर तक जमीन चिन्हित करने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवासीय प्लॉट विकसित करने के लिए उपयुक्त सरकारी जमीन की पहचान का काम जल्द पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि सभी जिलों में 15 सितंबर तक ऐसी जमीनों को चिन्हित किया जाए, जहां गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
सरकार का कहना है कि जमीन का चयन करते समय केवल उपलब्धता ही नहीं, बल्कि वहां रहने की सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।
सड़क और पानी की सुविधा जरूरी
डॉ. जी. परमेश्वर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन जमीनों को आवासीय प्लॉट के लिए चुना जाए, वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि चयनित जमीन पर सड़क और पानी की सुविधा होना जरूरी है, ताकि प्लॉट मिलने के बाद लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सरकार ने अधिकारियों से कहा है कि ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाए जहां भविष्य में बेहतर विकास की संभावना हो।
गांवों के पास जमीन को मिलेगी प्राथमिकता
बैठक में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के आसपास स्थित सरकारी जमीनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के नजदीक प्लॉट उपलब्ध कराने से गरीब परिवारों को रोजगार, शिक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी।
इसके अलावा गांवों के आसपास आवासीय विस्तार से स्थानीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
कमजोर वर्गों को मिलेगा प्राथमिक लाभ
सरकार ने साफ किया है कि प्लॉट आवंटन में समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय, दिव्यांगजन, विधवाओं और यौन अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को योजना का लाभ देने में प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल जमीन बांटना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को स्थायी आवास की दिशा में आगे बढ़ाना है।
अधिकारियों को तेज गति से काम करने के निर्देश
बैठक में जिला कलेक्टरों और राजस्व अधिकारियों से योजना की प्रगति रिपोर्ट ली गई।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस योजना को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए सभी स्तरों पर तेजी से काम किया जाए।
उन्होंने कहा कि जमीन की पहचान, प्लॉट का विकास और आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।
गरीब परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत
कर्नाटक सरकार की इस योजना को बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राज्य में कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास अपना घर बनाने के लिए जमीन नहीं है। ऐसे परिवारों को आवासीय प्लॉट मिलने से उन्हें अपना घर बनाने का अवसर मिलेगा।
सरकार का मानना है कि जमीन का मालिकाना हक मिलने से गरीब परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
पारदर्शिता पर रहेगा जोर
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि प्लॉट आवंटन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।
लाभार्थियों के चयन में किसी तरह की अनियमितता न हो, इसके लिए पात्रता मानकों का पालन किया जाएगा।
सरकार इस योजना के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ पहुंचे।
31 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य
कर्नाटक सरकार ने 5 लाख आवासीय प्लॉट आवंटन का लक्ष्य 31 दिसंबर तक पूरा करने का समय तय किया है।
अब जिला प्रशासन के सामने कम समय में जमीन चिन्हित करने, विकास कार्य शुरू करने और पात्र लोगों को प्लॉट उपलब्ध कराने की चुनौती है।
यदि योजना तय समय पर पूरी होती है तो यह राज्य में गरीब और बेघर परिवारों के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।





