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कर्नाटक कैबिनेट ने पार्क संरक्षण कानून में संशोधन को मंजूरी दी

Kavita2
23 Aug 2026 10:37 AM IST
कर्नाटक कैबिनेट ने पार्क संरक्षण कानून में संशोधन को मंजूरी दी
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बेंगलुरु। कर्नाटक कैबिनेट ने सरकारी पार्क और बगीचों की जमीन के इस्तेमाल से जुड़े कानून में संशोधन करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित बदलाव के बाद राज्य के पार्कों और ग्रीन स्पेस के कुल क्षेत्रफल के एक सीमित हिस्से का इस्तेमाल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और यूटिलिटी परियोजनाओं के लिए किया जा सकेगा। सरकार के इस फैसले को लेकर पर्यावरण और शहर के हरित क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने प्रस्तावित संशोधन का विरोध करते हुए इसे पर्यावरण के लिए चिंता का विषय बताया है।

सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में सरकारी पार्क (संरक्षण) अधिनियम, 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह कानून राज्य में पार्कों और बगीचों की जमीन को संरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाया गया था। प्रस्तावित संशोधन के दायरे में बेंगलुरु के प्रमुख हरित क्षेत्रों, जिनमें कब्बन पार्क और लालबाग जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल शामिल हैं, को लेकर भी चर्चा हो रही है।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, किसी पार्क या बगीचे के कुल क्षेत्रफल के अधिकतम 5 प्रतिशत हिस्से को कुछ विशेष सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अलग इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। इस जमीन का इस्तेमाल बिक्री, लीज, उपहार, अदला-बदली या गिरवी रखने जैसे माध्यमों से किया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने इसके इस्तेमाल को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और यूटिलिटी परियोजनाओं तक सीमित रखने का प्रस्ताव किया है।

प्रस्तावित कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पार्क की अलग की गई जमीन का इस्तेमाल हर कोई नहीं कर सकेगा। केवल सरकारी विभागों, वैधानिक प्राधिकरणों, सरकारी कंपनियों और स्थानीय प्राधिकरणों को ही इन हिस्सों का उपयोग सार्वजनिक बुनियादी ढांचे या यूटिलिटी प्रोजेक्ट्स के लिए करने की अनुमति होगी।

सरकार का तर्क है कि शहरों के विकास के साथ सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत भी बढ़ रही है। सड़क, सार्वजनिक परिवहन, जल आपूर्ति, बिजली, सीवरेज और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं के लिए कई बार जमीन की आवश्यकता होती है। ऐसे में मौजूदा सार्वजनिक भूमि का सीमित और नियंत्रित इस्तेमाल करने के लिए कानून में संशोधन की जरूरत महसूस की गई है।

हालांकि, विपक्ष और पर्यावरण से जुड़े लोगों की ओर से इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बीजेपी ने पर्यावरणीय आधार पर संशोधन का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि पार्क और खुले हरित क्षेत्र शहर के पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि पार्कों की जमीन का एक हिस्सा अन्य परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाती है, तो भविष्य में इसका दुरुपयोग होने की आशंका पैदा हो सकती है।

बेंगलुरु जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में सार्वजनिक पार्कों और हरित क्षेत्रों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। शहर में बढ़ते निर्माण, वाहनों की संख्या और प्रदूषण के बीच पेड़-पौधे और खुले स्थान हवा की गुणवत्ता सुधारने, तापमान नियंत्रित करने और नागरिकों को सार्वजनिक मनोरंजन तथा व्यायाम के लिए स्थान उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।

कब्बन पार्क और लालबाग बेंगलुरु के सबसे प्रमुख हरित स्थलों में शामिल हैं। इन स्थानों का उपयोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग घूमने, व्यायाम करने और आराम करने के लिए करते हैं। ऐसे में इन पार्कों की जमीन के किसी भी हिस्से को दूसरे उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने का मुद्दा संवेदनशील माना जा रहा है।

प्रस्तावित संशोधन में हालांकि 5 प्रतिशत की सीमा तय की गई है, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों और विपक्ष की चिंता इस बात को लेकर है कि एक बार पार्क की जमीन को दूसरे उपयोग के लिए अलग करने की अनुमति मिलने के बाद भविष्य में इसका दायरा बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले पारदर्शी प्रक्रिया और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन जरूरी माना जा रहा है।

दूसरी ओर, सरकार के सामने शहरों में बढ़ती बुनियादी सुविधाओं की मांग को पूरा करने की चुनौती भी है। बेंगलुरु की आबादी और शहरी क्षेत्र लगातार बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन, जल निकासी, बिजली, पेयजल और अन्य नागरिक सुविधाओं का विस्तार आवश्यक हो गया है। सरकार का मानना है कि कुछ मामलों में सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए सीमित जमीन उपलब्ध कराना जरूरी हो सकता है।

प्रस्तावित व्यवस्था में यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि पार्क की जमीन का इस्तेमाल निजी या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए न हो। केवल सरकारी विभागों और संबंधित सार्वजनिक संस्थाओं को ही इसका उपयोग करने की अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद, संशोधन के प्रभाव और इसके लागू होने की प्रक्रिया पर आगे चर्चा की संभावना है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब संशोधन विधेयक को विधानसभा की प्रक्रिया से गुजरना होगा। वहां बहस के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच पार्कों की सुरक्षा, सार्वजनिक परियोजनाओं की जरूरत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चर्चा होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं शहर के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इनके लिए हरित क्षेत्रों का इस्तेमाल अंतिम विकल्प के रूप में किया जाना चाहिए। जहां संभव हो, वैकल्पिक सरकारी जमीन और पहले से विकसित क्षेत्रों का इस्तेमाल करने पर विचार किया जा सकता है।

फिलहाल कैबिनेट के फैसले ने बेंगलुरु के प्रमुख पार्कों और ग्रीन स्पेस को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सरकार जहां इसे नियंत्रित तरीके से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जरूरी बदलाव बता रही है, वहीं बीजेपी इसे पर्यावरण और हरित क्षेत्रों के भविष्य के लिए जोखिम के रूप में देख रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित संशोधन विधानसभा में किस तरह आगे बढ़ता है और इसके लिए क्या सुरक्षा प्रावधान तय किए जाते हैं।

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