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कर्नाटक में BJP के अंदर बढ़ी खींचतान, MLC चुनाव में क्रॉस वोटिंग से उठे सवाल

Kavita2
30 Jun 2026 10:47 AM IST
कर्नाटक में BJP के अंदर बढ़ी खींचतान, MLC चुनाव में क्रॉस वोटिंग से उठे सवाल
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Karnataka कर्नाटक: 2028 के विधानसभा चुनावों में अब दो साल से भी कम समय बचा है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी भी अंदरूनी मतभेद और असंतोष से जूझती नजर आ रही है। वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश करने की कोशिशों के बीच पार्टी के भीतर उभरी दरारें एक बार फिर सामने आ गई हैं।

हाल ही में 18 जून को हुए MLC चुनावों के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग ने बीजेपी के अंदरूनी विवाद को और उजागर कर दिया। जानकारी के अनुसार, BJP और JD(S) के करीब 11 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जबकि एक बीजेपी विधायक द्वारा अवैध वोट डालने की भी बात सामने आई है। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है और पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पार्टी के अंदर यह स्थिति नई नहीं है। 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही संगठन के भीतर एकता की कमी लगातार दिखाई देती रही है। कई मौकों पर नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से भी सामने आए हैं, जिससे पार्टी की रणनीति और चुनावी तैयारियों पर असर पड़ता दिख रहा है।

बीजेपी ने राज्य में अपनी राजनीतिक रणनीति को मजबूत करने के लिए देर से अभियान शुरू किया था। पार्टी ने बी. वाई. विजयेंद्र को राज्य अध्यक्ष बनाने में लगभग छह महीने का समय लिया, जिसे संगठनात्मक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण निर्णय माना गया। हालांकि, इस फैसले को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आई और इसे लेकर चर्चा भी बनी रही।

बी. वाई. विजयेंद्र, जो पहली बार विधायक बने हैं, को पार्टी के सभी धड़ों का पूरा समर्थन नहीं मिल पाया है। उनके नेतृत्व को लेकर कुछ नेताओं के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है, जिससे संगठनात्मक एकता पर असर पड़ रहा है।

इसी बीच, पूर्व विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल के नेतृत्व में एक गुट ने खुले तौर पर विजयेंद्र के खिलाफ आवाज उठाई है। यतनाल पहले भी पार्टी नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं, जिससे पार्टी के अंदर गुटबाजी की स्थिति और स्पष्ट हो गई है।

इसके अलावा, पूर्व उपमुख्यमंत्री के. एस. ईश्वरप्पा, जो लंबे समय से कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा के समर्थक रहे हैं, उन्हें भी पार्टी से बाहर किया जा चुका है। ईश्वरप्पा भी बी. एस. येदियुरप्पा के परिवार के प्रभाव के आलोचक माने जाते रहे हैं, और उनके निष्कासन को भी पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों से जोड़कर देखा गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाओं ने कर्नाटक बीजेपी की आंतरिक स्थिति को और जटिल बना दिया है। MLC चुनाव में क्रॉस वोटिंग और लगातार सामने आ रहे असंतोष के मामले पार्टी के लिए आने वाले समय में चुनौती पैदा कर सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर, सत्ताधारी कांग्रेस इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और इसे अपने पक्ष में राजनीतिक लाभ के रूप में देखने की कोशिश कर सकती है। बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को एकजुट करना और आगामी चुनावों के लिए मजबूत रणनीति तैयार करना है।

फिलहाल पार्टी नेतृत्व इन आंतरिक विवादों को सुलझाने और संगठन को स्थिर करने के प्रयास में जुटा है। हालांकि, लगातार सामने आ रही घटनाओं से यह साफ है कि कर्नाटक बीजेपी के भीतर मतभेद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

आने वाले महीनों में पार्टी की एकता और नेतृत्व की भूमिका यह तय करेगी कि 2028 के विधानसभा चुनावों में वह कितनी मजबूती से मुकाबला कर पाएगी।

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