
Karnataka कर्नाटक: सरकार का ई-गवर्नेंस विभाग अपने प्रशासनिक कामकाज को अधिक प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग को तेजी से बढ़ा रहा है। विभाग ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जियो-टेक्नोलॉजी और रिमोट सेंसिंग जैसे क्षेत्रों को सरकारी सेवाओं में व्यापक रूप से शामिल किया जाएगा।
इस दिशा में विभाग कर्नाटक स्टेट रिमोट सेंसिंग एंड एप्लीकेशन सेंटर (KSRSAC), विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों और जियो-टेक्नोलॉजी से जुड़ी निजी कंपनियों के साथ सहयोग करेगा। इसका उद्देश्य डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत करना और शासन में पारदर्शिता व गति लाना है।
हाल ही में आयोजित K-GIS 2.0 कार्यक्रम में विभाग ने अपने कई नवाचार मॉडल प्रस्तुत किए। इस आयोजन में स्टूडेंट इनोवेशन मॉडल प्रतियोगिता, भूमि प्रबंधन (लैंड मैनेजमेंट) में तकनीक के उपयोग पर आधारित सत्र और विशेषज्ञों के साथ तकनीकी एवं पैनल चर्चाएं शामिल रहीं। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों और विशेषज्ञों को सरकारी योजनाओं में तकनीकी भागीदारी के अवसरों पर विचार साझा करने का मंच मिला।
इस मौके पर डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स (ई-गवर्नेंस) के प्रधान सचिव पंकज कुमार पांडे ने कहा कि सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग और विस्तार जरूरी है। उन्होंने कहा कि AI आधारित सिस्टम से न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं तेज होंगी, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता भी अधिक सटीक होगी।
उन्होंने विशेष रूप से ऊर्जा, वन, झीलों और सिंचाई जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। पांडे ने कहा कि इन क्षेत्रों में तकनीक के उपयोग से संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि जियो-इन्फॉर्मेशन सिस्टम और रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में बड़ा सुधार लाया जा सकता है। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं भी मिलेंगी।
ई-गवर्नेंस विभाग का यह कदम कर्नाटक को डिजिटल प्रशासन के क्षेत्र में और आगे ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और प्रशासन के इस समन्वय से राज्य में “स्मार्ट गवर्नेंस” की अवधारणा को मजबूती मिलेगी।





