
बेंगलुरु: बैंगलोर मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (BMTC) की बसों में डिजिटल पेमेंट के जरिए टिकट लेने वाले यात्रियों के लिए नई परेशानी सामने आई है। बसों में लगाई गई नई UPI इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीनों (ETMs) में तकनीकी खराबी के कारण कई यात्रियों को भुगतान करने के बाद भी टिकट नहीं मिल पा रहा है।
यात्रियों की शिकायत है कि UPI से भुगतान करने पर उनके बैंक खाते से पैसे तो कट जाते हैं, लेकिन मशीन से टिकट प्रिंट नहीं होता। इससे यात्रियों और बस कंडक्टरों के बीच कई बार बहस की स्थिति भी बन रही है।
हेब्बल-सिल्क बोर्ड रूट पर ज्यादा शिकायतें
जानकारी के अनुसार, यह समस्या खास तौर पर हेब्बल-सिल्क बोर्ड रूट पर चलने वाली BMTC बसों में सामने आ रही है। इस रूट पर यात्रा करने वाले कई यात्रियों ने शिकायत की है कि नई UPI आधारित टिकटिंग व्यवस्था में भुगतान सफल होने के बावजूद टिकट जारी नहीं हो रहा है।
यात्रियों का कहना है कि डिजिटल पेमेंट को आसान और तेज विकल्प के रूप में शुरू किया गया था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
महिला यात्री के साथ हुई दो बार भुगतान की समस्या
एक मामले में कल्याणनगर से बस में सवार हुई एक महिला यात्री ने बनासवाड़ी जाने के लिए 12 रुपये के टिकट का भुगतान करने के लिए कंडक्टर की इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन पर मौजूद डायनामिक QR कोड स्कैन किया।
महिला ने UPI के माध्यम से भुगतान किया, लेकिन उसके बैंक खाते से राशि कटने के बावजूद टिकट प्रिंट नहीं हुआ। इसके बाद उसने दोबारा दूसरे UPI ऐप के माध्यम से भुगतान करने का प्रयास किया।
दूसरी बार भी खाते से पैसे कट गए, लेकिन मशीन से टिकट नहीं निकला। इसके बाद एक अन्य यात्री ने उसकी मदद करते हुए 12 रुपये का भुगतान किया, लेकिन इस बार भी वही समस्या सामने आई और टिकट जारी नहीं हुआ।
इस घटना के बाद महिला यात्री और कंडक्टर के बीच स्थिति असहज हो गई। यात्रियों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में उन्हें यह समझ नहीं आता कि वे बिना टिकट यात्रा करें या दोबारा भुगतान करें।
यात्रियों को हो रही आर्थिक परेशानी
यात्रियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि टिकट नहीं मिलता और भुगतान कई बार हो जाता है तो अतिरिक्त राशि वापस कैसे मिलेगी। कई यात्रियों ने कहा कि छोटी राशि होने के बावजूद बार-बार भुगतान करना परेशानी पैदा करता है।
डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को नकद लेनदेन से राहत देना था, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण यह सुविधा कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
कंडक्टरों के सामने भी चुनौती
BMTC बस कंडक्टरों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान सफल दिखने और टिकट प्रिंट न होने की स्थिति में कंडक्टरों को यात्रियों को समझाना पड़ता है।
कई बार यात्री बैंक खाते से पैसे कटने का स्क्रीनशॉट दिखाते हैं, जबकि मशीन में टिकट की पुष्टि नहीं होती। इससे विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है।
कंडक्टरों का कहना है कि जब तक तकनीकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक यात्रियों को परेशानी होती रहेगी।
डिजिटल टिकटिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
BMTC ने यात्रियों की सुविधा के लिए इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीनों में UPI भुगतान की सुविधा शुरू की है। इससे यात्रियों को नकद रखने की जरूरत नहीं पड़ती और टिकट प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद थी।
हालांकि, शुरुआती दौर में सामने आई तकनीकी खामियों ने इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी डिजिटल भुगतान प्रणाली को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले तकनीकी परीक्षण और मजबूत शिकायत समाधान व्यवस्था जरूरी होती है।
BMTC से समाधान की उम्मीद
यात्रियों ने BMTC प्रशासन से इस समस्या का जल्द समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भुगतान के बाद टिकट नहीं मिलता है तो राशि वापसी या वैकल्पिक व्यवस्था की सुविधा होनी चाहिए।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तकनीकी खराबी कितनी मशीनों में है और इसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। यात्रियों को उम्मीद है कि BMTC जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा।
BMTC की डिजिटल टिकटिंग पहल सुविधाजनक यात्रा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन तकनीकी खामियों को दूर करना इसकी सफलता के लिए जरूरी होगा। जब तक यह समस्या पूरी तरह ठीक नहीं होती, तब तक यात्रियों को भुगतान और टिकट के बीच तालमेल को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।





