
Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के टाउनशिप डेवलपमेंट राइट्स (TDR) घोटाले का मामला सामने आया है। इस मामले ने ग्रेटर बेंगलुरु प्रशासन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह भी सामने आया है कि 2014 से 2017 के बीच के महत्वपूर्ण दस्तावेज ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के कार्यालय से गायब हो गए हैं।
एंटी-करप्शन फोरम के अध्यक्ष और बीबीएमपी की सत्ताधारी पार्टी के पूर्व नेता एन.आर. रमेश ने मंगलवार को आरोप लगाया कि इस बड़े घोटाले से जुड़े अहम दस्तावेज वर्तमान भूमि अधिग्रहण और TDR विभाग से लापता हैं। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का मामला बताया है।
TDR प्रणाली वर्ष 2007 में लागू की गई थी, जिसके तहत सड़क विस्तार और अन्य शहरी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहित की जाती है और इसके बदले भूमि मालिकों को डेवलपमेंट राइट्स सर्टिफिकेट (TDR/DRC) दिया जाता है। इस प्रणाली का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी और सुचारु बनाना था।
हालांकि, आरोप है कि बीबीएमपी (BBMP) और बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) के कुछ अधिकारियों ने इस प्रणाली की खामियों का दुरुपयोग किया। इससे हजारों करोड़ रुपये के सरकारी संसाधनों का कथित रूप से अनियमित उपयोग हुआ। दावा किया जा रहा है कि ज़ोन D, E और F से जुड़े TDR/DRC प्रमाणपत्रों का उपयोग अवैध रूप से ज़ोन A, B और C में किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं।
एन.आर. रमेश ने यह भी मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि गायब हुए दस्तावेजों का पता लगाया जाना जरूरी है और जिन अधिकारियों या व्यक्तियों की इसमें भूमिका पाई जाती है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है और मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की मांग तेज हो गई है। फिलहाल संबंधित विभागों से जवाब तलब किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जबकि घोटाले के हर पहलू की जांच पर जोर दिया जा रहा है।





