
बेंगलुरु। कर्नाटक में गन्ने की कीमतों को लेकर किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच लंबे समय से जारी विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद जताई जा रही है। कांग्रेस नेता लक्ष्मण सावदी ने मंगलवार को कहा कि गन्ने की कीमतों से जुड़ा मुद्दा अगले दो दिनों के भीतर सुलझ सकता है। राज्य सरकार किसानों, चीनी मिल संचालकों और संबंधित पक्षों के बीच सहमति बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। हालांकि, अंतिम समझौते और गन्ने की नई कीमत को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राज्य में गन्ना उत्पादक किसान लंबे समय से अपनी उपज का उचित मूल्य देने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें मिलने वाली कीमत उसके अनुरूप नहीं है। दूसरी ओर, चीनी मिल मालिक उत्पादन लागत और बाजार की परिस्थितियों का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में सरकार दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर समाधान निकालने का प्रयास कर रही है।
दो दिनों के भीतर समाधान निकलने की उम्मीद
मीडिया से बातचीत में लक्ष्मण सावदी ने उम्मीद जताई कि गन्ना मूल्य विवाद को बातचीत के जरिए जल्द सुलझाया जा सकता है। उन्होंने किसानों की मांगों और चीनी उद्योग की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सहमति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सरकार की कोशिश है कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले और चीनी मिलों का संचालन भी प्रभावित न हो। गन्ने की खरीद और भुगतान को लेकर बनी अनिश्चितता दूर करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
हालांकि, दो दिनों में समाधान निकलने की उम्मीद के बावजूद अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किसानों की सभी मांगों पर सहमति बनेगी या कोई वैकल्पिक प्रस्ताव सामने आएगा।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने की अहम बैठक
गन्ना मूल्य विवाद को लेकर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार, 26 अक्टूबर को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में चीनी मिल मालिकों और गन्ना उत्पादक किसानों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बातचीत की।
बैठक में किसानों की मांगों, चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति और गन्ने की खरीद से संबंधित समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने चीनी मिल संचालकों से किसानों की परेशानियों को समझने और समाधान निकालने में सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका की सुरक्षा जरूरी है। साथ ही, किसी भी निर्णय में राज्य सरकार, केंद्र सरकार और चीनी उद्योग से जुड़े पक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सोमवार की बातचीत में अंतिम निर्णय नहीं हो सका, जिसके बाद आगे चर्चा जारी रखने पर सहमति बनी।
किसानों ने की 1,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान की मांग
कर्नाटक के गन्ना उत्पादक किसानों की प्रमुख मांग उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी के अतिरिक्त प्रति टन 1,000 रुपये राज्य सलाहकार मूल्य देने की है।
किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने गन्ने का खरीद मूल्य बढ़ाने और भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग भी उठाई है।
कुछ किसान प्रतिनिधियों ने प्रति टन 4,500 रुपये खरीद मूल्य की मांग रखी है। इसके अलावा समय पर भुगतान, वजन प्रक्रिया में पारदर्शिता और गन्ने की गुणवत्ता के आधार पर उचित मूल्य सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं।
किसानों का तर्क है कि खाद, मजदूरी, सिंचाई, परिवहन और अन्य कृषि खर्च बढ़ने से उनकी आय प्रभावित हुई है। ऐसे में गन्ने का मूल्य बढ़ाना उनकी आर्थिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
चीनी मिल मालिकों के सामने भी आर्थिक चुनौतियां
गन्ना मूल्य विवाद केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं है। चीनी मिल संचालकों के सामने भी कई आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियां हैं।
चीनी उत्पादन की लागत, बाजार में बिक्री मूल्य, परिचालन खर्च और एथेनॉल उत्पादन से संबंधित नीतियां मिलों की भुगतान क्षमता को प्रभावित करती हैं।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मिल मालिकों से अपील की है कि वे किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान के लिए आगे आएं।
सरकार का मानना है कि यदि किसानों और मिल संचालकों के बीच विश्वास कायम होता है, तो भविष्य में कीमतों और भुगतान को लेकर विवाद कम किए जा सकते हैं।
29 अक्टूबर को केंद्रीय समिति का दौरा महत्वपूर्ण
इस पूरे विवाद में केंद्र सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति 29 अक्टूबर को कर्नाटक का दौरा करने वाली है।
इस दौरान गन्ना उत्पादकों की मांगों और चीनी उद्योग की समस्याओं पर विचार किया जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि गन्ने की कीमत से जुड़े कई निर्णय केंद्रीय नीतियों से प्रभावित होते हैं। इसलिए स्थायी समाधान निकालने के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वित्तीय स्थिति और सभी संबंधित पक्षों की राय को ध्यान में रखकर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उत्तर कर्नाटक के किसानों की बढ़ी उम्मीदें
कर्नाटक के बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा, धारवाड़ और आसपास के क्षेत्रों में गन्ना प्रमुख व्यावसायिक फसलों में शामिल है। बड़ी संख्या में किसान और कृषि मजदूर गन्ने की खेती तथा चीनी उद्योग से जुड़े हुए हैं।
ऐसे में कीमतों को लेकर जारी विवाद का असर केवल किसानों की आमदनी पर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और चीनी मिलों की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
किसान संगठनों ने पहले भी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किए हैं। कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
किसानों को उम्मीद है कि सरकार की पहल से उन्हें उचित मूल्य मिलने का रास्ता साफ होगा।
सरकार के अगले फैसले पर टिकी निगाहें
कर्नाटक सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती किसानों की आर्थिक अपेक्षाओं और चीनी मिलों की भुगतान क्षमता के बीच संतुलन बनाना है।
लक्ष्मण सावदी की ओर से दो दिनों में समाधान निकलने की उम्मीद जताए जाने के बाद किसानों की नजरें आगामी बातचीत पर टिकी हैं।
यदि सरकार, किसान प्रतिनिधियों और चीनी मिल मालिकों के बीच सहमति बनती है, तो गन्ना खरीद और पेराई कार्य से जुड़ी अनिश्चितता कम हो सकती है।
हालांकि, अंतिम निर्णय आने तक यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसानों को कितनी अतिरिक्त राशि मिलेगी और उसका भुगतान किस प्रकार किया जाएगा।
फिलहाल सरकार की सक्रिय बातचीत से समाधान की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन विवाद का स्थायी निपटारा आधिकारिक समझौते और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।





