
Karnataka कर्नाटक: मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य में खनन गतिविधियों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए माइंस एंड जियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि नीलामी के जरिए खनन क्षेत्र हासिल करने के बाद तय समय सीमा के भीतर खनन कार्य शुरू करने के लिए स्पष्ट और कठोर नियम बनाए जाएं।
बुधवार को माइंस एंड जियोलॉजी विभाग की प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कई मामलों में देखा गया है कि कंपनियों और व्यक्तियों ने नीलामी के माध्यम से खनन क्षेत्र तो हासिल कर लिया है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी खनन कार्य शुरू नहीं किया गया है। उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताया और ऐसे मामलों पर कार्रवाई की आवश्यकता जताई।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य की मौजूदा खनन नीति के साथ-साथ अन्य राज्यों की खनन नीतियों, नियमों और कानूनों का विस्तृत अध्ययन करें। इसके आधार पर एक मजबूत और प्रभावी नियमावली तैयार की जाए, जिससे खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने खनन क्षेत्रों की नीलामी में भाग लेकर जमीन हासिल की है, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं किया है, उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। इस पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश भी दिया गया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में खनन के लिए आवंटित भूमि की वर्तमान स्थिति, कितने आवंटन हुए हैं, कितने मामलों में खनन शुरू हुआ है और कितने अब तक लंबित हैं, इसकी पूरी जानकारी एकत्र की जाए।
इसके अलावा उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि जिन मामलों में वन विभाग से अनुमति की आवश्यकता है, वहां कितने आवेदन लंबित हैं और देरी के पीछे क्या कारण हैं। उन्होंने कहा कि सभी लंबित मामलों की सूची तैयार कर उनके समाधान के लिए समयबद्ध योजना बनाई जाए।
शिवकुमार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि खनन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत किया जाए, ताकि हर परियोजना की स्थिति पर नियमित निगरानी रखी जा सके।
सरकार का मानना है कि खनन संसाधनों का सही और समय पर उपयोग राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में लंबे समय तक परियोजनाओं का अटका रहना विकास कार्यों को प्रभावित करता है।
फिलहाल, मुख्यमंत्री के इन निर्देशों के बाद खनन विभाग में हलचल तेज हो गई है और अधिकारियों को जल्द विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।





