
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों के आसपास जंक फूड की बिक्री और प्रचार पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) विभाग ने कहा है कि 1 अगस्त से शिक्षण संस्थानों के 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, शुगर और नमक (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री, मुफ्त वितरण, विज्ञापन और प्रमोशन पर लगी रोक को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने इस संबंध में घोषणा करते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में असंतुलित भोजन की आदतें आगे चलकर कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं, इसलिए समय रहते ऐसे कदम उठाना जरूरी है।
सरकार का कहना है कि जंक फूड और अत्यधिक नमक, चीनी व वसा वाले खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से बच्चों में मोटापा, मधुमेह और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए शिक्षण संस्थानों के आसपास ऐसे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को नियंत्रित करने का फैसला लिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि फूड सेफ्टी एंड क्वालिटी (स्कूल के बच्चों के लिए सुरक्षित भोजन और संतुलित आहार) नियम-2020 के तहत यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार, स्कूल और कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी को यह सुनिश्चित करना होगा कि परिसर में केवल सुरक्षित, संतुलित और पौष्टिक भोजन ही उपलब्ध कराया जाए।
नए नियमों के तहत शिक्षण संस्थानों के आसपास ऐसी दुकानों और प्रतिष्ठानों पर नजर रखी जाएगी, जहां HFSS खाद्य पदार्थ बेचे जाते हैं। इनमें अधिक मात्रा में चीनी, नमक या वसा वाले पैकेज्ड स्नैक्स, फास्ट फूड और अन्य अस्वास्थ्यकर खाद्य सामग्री शामिल हैं।
FDA विभाग ने कहा है कि प्रतिबंध केवल बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसे खाद्य पदार्थों के मुफ्त वितरण, विज्ञापन और प्रचार गतिविधियों पर भी लागू होगा। इसका उद्देश्य बच्चों को आकर्षित करने वाली मार्केटिंग गतिविधियों को नियंत्रित करना है।
अधिकारियों के अनुसार, स्कूल और कॉलेजों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों को मिलने वाले भोजन में पोषण का संतुलन बना रहे। कैंटीन और खाद्य विक्रेताओं को भी खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बच्चों की खान-पान की आदतें उनके भविष्य के स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती हैं। इसलिए स्कूलों को स्वस्थ भोजन की संस्कृति विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
कर्नाटक सरकार की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उठाया गया कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों के आसपास आसानी से उपलब्ध जंक फूड बच्चों को अस्वास्थ्यकर विकल्पों की ओर आकर्षित करता है।
सरकार ने शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे छात्रों को पौष्टिक भोजन के महत्व के बारे में जागरूक करें। साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों की भोजन संबंधी आदतों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
FDA विभाग अब इस नियम के पालन की निगरानी करेगा। जरूरत पड़ने पर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का मकसद केवल प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित खाद्य वातावरण तैयार करना है। सरकार चाहती है कि स्कूल और कॉलेज ऐसे स्थान बनें जहां छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली के लिए भी प्रेरित किया जाए।
कर्नाटक में लागू होने जा रहा यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि प्रतिबंध को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है और इसका छात्रों की खान-पान की आदतों पर कितना असर पड़ता है।





