
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के चिंचोली तालुक के शादीपुरा इलाके में बुधवार को विवादित भूमि का सर्वेक्षण कर रही अधिकारियों की टीम पर तेलंगाना सीमा से आए ग्रामीणों द्वारा पथराव किए जाने के बाद तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। अधिकारियों और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह घटना विवादित भूमि के सीमांकन को लेकर हुई थी।
सूत्रों ने बताया कि सेदम के सहायक आयुक्त प्रभु रेड्डी और भूमि अभिलेख विभाग के उप निदेशक महेश के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम शादीपुरा गांव के सर्वेक्षण संख्या 126 और 127 में मौजूद थी। अधिकारियों का उद्देश्य भूमि की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड करना और सीमांकन संबंधी रिपोर्ट तैयार करना था।
इस दौरान शादीपुरा की सीमा से लगे तेलंगाना के विकाराबाद जिले के तंदूर तालुक के उमला नायक थांडा के पुरुषों और महिलाओं सहित कुछ ग्रामीणों ने विरोध जताया। उन्होंने अधिकारियों पर पथराव किया और अपनी नाराजगी जाहिर की। सौभाग्य से इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच काफी देर तक बहस और तनावपूर्ण स्थिति रही।
ग्रामीणों का कहना था कि यह भूमि दोनों राज्यों के बीच विवादित है और केवल कर्नाटक की टीम द्वारा सर्वेक्षण करना उचित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि दोनों राज्यों के अधिकारी मिलकर संयुक्त सर्वेक्षण करें, ताकि किसी भी तरह का विवाद और विवादित भूमि के सीमांकन को लेकर गलतफहमी न पैदा हो।
कर्नाटक अधिकारियों ने इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की और लोगों को शांत रहने का अनुरोध किया। हालांकि, ग्रामीणों की नाराजगी और विरोध के कारण टीम को कुछ समय के लिए सर्वेक्षण कार्य रोकना पड़ा।
स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लिया और अधिकारियों के साथ ग्रामीण नेताओं और पंचायत प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित कर मामले को शांति पूर्वक सुलझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि भूमि सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड तैयार करना और कानून के अनुसार सीमांकन करना है, किसी भी पक्ष के अधिकारों पर कोई असर नहीं डालना।
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों राज्यों के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि विवाद आम हैं और ऐसे मामलों में संयुक्त सर्वेक्षण या मध्यस्थता की आवश्यकता होती है। इससे विवाद कम होता है और स्थानीय लोगों की चिंता भी दूर की जा सकती है।
इस घटना ने चिंचोली और आसपास के क्षेत्रों में प्रशासनिक सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में ऐसे विवादित क्षेत्रों में सर्वेक्षण के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
स्थानीय ग्रामीण नेताओं ने भी अधिकारियों से बातचीत कर भरोसा दिलाया कि वे शांति बनाए रखने में मदद करेंगे और आगे के विवादों को न्यूनतम करने की कोशिश करेंगे। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी विवादित भूमि पर किसी भी तरह की हिंसा या अवरोध न करें और अधिकारियों को अपना काम पूरा करने दें।
इस पूरे घटनाक्रम ने दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में विवादित भूमि के मुद्दे की संवेदनशीलता को फिर से उजागर किया है और संयुक्त समाधान की आवश्यकता पर ध्यान खींचा है।





