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कर्नाटक कांग्रेस में हलचल, सिद्धारमैया नहीं होंगे शामिल

Kavita2
6 Nov 2026 2:30 PM IST
कर्नाटक कांग्रेस में हलचल, सिद्धारमैया नहीं होंगे शामिल
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से शुक्रवार, 6 नवंबर को बुलाई गई चाय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के शामिल होने की संभावना नहीं है। सिद्धारमैया ने हासन जिले में अपने पहले से निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला देते हुए बैठक में उपस्थित नहीं हो पाने की जानकारी पार्टी नेतृत्व को दी है। वहीं, इस बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के शामिल होने की संभावना है।

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विचार-विमर्श के लिए एक अनौपचारिक चाय बैठक बुलाई है। इस बैठक को कर्नाटक की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी के अंदर चल रही गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बैठक के विस्तृत एजेंडे को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

सिद्धारमैया ने पार्टी नेतृत्व को बताया है कि शुक्रवार को हासन में उनके कुछ कार्यक्रम पहले से निर्धारित हैं। ऐसे में उनके लिए राहुल गांधी की बैठक में पहुंचना संभव नहीं होगा। बताया जा रहा है कि वह हासन में आयोजित वार्षिक हसनाम्बा उत्सव में हिस्सा लेने के साथ ऐतिहासिक हसनाम्बा मंदिर में दर्शन करेंगे।

हासन का हसनाम्बा मंदिर कर्नाटक के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले उत्सव का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अवसर पर मंदिर पहुंचते हैं। इस वर्ष मंदिर के दर्शन 29 अक्टूबर से शुरू हुए हैं और उत्सव 11 नवंबर तक चलने का कार्यक्रम है।

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस धार्मिक आयोजन में शामिल होना पहले से निर्धारित था। ऐसे में उन्होंने पार्टी की बैठक में शामिल नहीं होने का कारण अपने व्यस्त कार्यक्रम को बताया है। हालांकि, उनकी गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कुछ महीनों के दौरान नेतृत्व और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। जून 2026 में डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता बी.के. हरिप्रसाद को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी राज्य की राजनीति और कांग्रेस संगठन में उनका महत्वपूर्ण प्रभाव बना हुआ है।

ऐसे राजनीतिक माहौल में राहुल गांधी की बैठक को लेकर स्वाभाविक रूप से दिलचस्पी बढ़ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता इसमें शामिल होकर संगठन और राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा कर सकते हैं। हालांकि, बैठक में किन विषयों पर बातचीत होगी, इस संबंध में कोई निश्चित जानकारी नहीं दी गई है।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद की संभावित मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेता राज्य में सरकार और संगठन की प्रमुख जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी के साथ उनकी मुलाकात पार्टी के लिए अहम हो सकती है।

कर्नाटक में कांग्रेस के सामने सरकार के कामकाज के साथ संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। पार्टी नेतृत्व राज्य में विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने और भविष्य की चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।

राज्य में वर्ष 2028 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच होने वाली बैठकों को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, शुक्रवार की चाय बैठक को सीधे आगामी चुनावों या किसी विशेष संगठनात्मक फैसले से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस बीच सिद्धारमैया की अनुपस्थिति को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या उनकी गैरमौजूदगी से बैठक के राजनीतिक महत्व पर कोई असर पड़ेगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने केवल अपने पहले से तय कार्यक्रमों की वजह से बैठक में शामिल नहीं होने की बात कही है।

सिद्धारमैया लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और कल्याणकारी योजनाओं को अपनी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी राज्य में उनके समर्थकों और राजनीतिक प्रभाव को महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाल के दिनों में कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े विवाद को लेकर भी कर्नाटक कांग्रेस में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी है। इस मामले में सिद्धारमैया ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क किया था और राहुल गांधी से मुलाकात भी की थी। इस घटनाक्रम के कारण राज्य की राजनीति में विभिन्न नेताओं की भूमिकाओं को लेकर चर्चाएं जारी हैं।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सरकार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ संगठन और पार्टी नेतृत्व के साथ समन्वय बनाए रखने में जुटे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद भी संगठन को मजबूत करने और पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।

कांग्रेस के लिए कर्नाटक दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक राज्य है। ऐसे में पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व यहां की राजनीतिक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। वरिष्ठ नेताओं के साथ होने वाली मुलाकातों को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

फिलहाल राहुल गांधी की शुक्रवार की चाय बैठक में सिद्धारमैया के शामिल नहीं होने की संभावना है, जबकि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और प्रदेश अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के उपस्थित रहने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, सिद्धारमैया हासन में हसनाम्बा उत्सव में भाग लेने और मंदिर में दर्शन करने के अपने कार्यक्रम को प्राथमिकता देंगे।

अब देखना होगा कि राहुल गांधी की इस बैठक के बाद कांग्रेस नेतृत्व की ओर से क्या जानकारी सामने आती है और क्या राज्य की राजनीतिक तथा संगठनात्मक परिस्थितियों को लेकर कोई महत्वपूर्ण संदेश दिया जाता है।

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