कर्नाटक

कर्नाटक की सियासत में हलचल कांग्रेस का दामन थाम रहे BJP नेता

Ratna Netam
13 Sept 2026 7:30 PM IST
कर्नाटक की सियासत में हलचल कांग्रेस का दामन थाम रहे BJP नेता
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल को लेकर हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को झटका देते हुए एक पूर्व विधायक ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष **डीके शिवकुमार** ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में शामिल होने के इच्छुक नेताओं की संख्या यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि कई और नेता कतार में हैं।
पूर्व विधायक के कांग्रेस में शामिल होने को पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ने के संकेत के रूप में पेश कर रही है। वहीं शिवकुमार के बयान ने बीजेपी की चिंता बढ़ाने के साथ कर्नाटक में आने वाले दिनों में और नेताओं के पाला बदलने की अटकलों को हवा दे दी है।
पूर्व विधायक ने कांग्रेस का थामा हाथ
कर्नाटक में बीजेपी से जुड़े रहे पूर्व विधायक ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस नेताओं ने उनका पार्टी में स्वागत किया और दावा किया कि उनके आने से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूती मिलेगी।
इस मौके पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार की नीतियों और कांग्रेस के राजनीतिक कार्यक्रमों से प्रभावित होकर अलग-अलग दलों के नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं।
हालांकि इस घटनाक्रम का वास्तविक चुनावी प्रभाव संबंधित पूर्व विधायक के क्षेत्र में उनकी पकड़ और समर्थकों के रुख से तय होगा।
डीके शिवकुमार ने किया बड़ा दावा
इस मौके पर डीके शिवकुमार ने कहा कि कई अन्य नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में पार्टी में शामिल हो सकते हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस में आने के इच्छुक नेताओं की कतार लंबी है।
शिवकुमार के इस बयान को कर्नाटक की भविष्य की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस अपने संगठन का विस्तार करने और दूसरे दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
हालांकि उन्होंने सभी संभावित नेताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए।
BJP पर बढ़ेगा राजनीतिक दबाव?
पूर्व विधायक के कांग्रेस में जाने और शिवकुमार के दावे के बाद अब बीजेपी के सामने अपने नेताओं को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है।
राजनीति में किसी पूर्व विधायक का पार्टी बदलना स्थानीय समीकरणों पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब संबंधित नेता की अपने विधानसभा क्षेत्र में मजबूत पकड़ हो।
बीजेपी की ओर से इस घटनाक्रम को कितना बड़ा नुकसान माना जाता है, यह आने वाले दिनों में पार्टी की प्रतिक्रिया से और स्पष्ट होगा।
कांग्रेस क्यों जोड़ रही दूसरे दलों के नेता?
कर्नाटक में सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी की नजर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों पर भी है।
राजनीतिक दल अक्सर उन नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते हैं जिनका किसी खास क्षेत्र या समुदाय में प्रभाव होता है। इससे संगठन को स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों का नेटवर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
कांग्रेस भी इसी रणनीति के तहत अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करती दिखाई दे रही है।
कर्नाटक की राजनीति में दल-बदल नया नहीं
कर्नाटक की राजनीति में नेताओं का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों में कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस के अनेक नेता दल बदल चुके हैं।
2019 में कर्नाटक की राजनीति में बड़े स्तर पर हुए दलबदल के बाद तत्कालीन कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार गिर गई थी। इसके बाद बीजेपी सत्ता में आई थी। इस घटनाक्रम ने कर्नाटक की राजनीति में दल-बदल को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था।
इसके बाद भी अलग-अलग चुनावों से पहले नेताओं के पाला बदलने का सिलसिला जारी रहा।
कांग्रेस और BJP के बीच सीधा मुकाबला
कर्नाटक में मुख्य राजनीतिक मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच है। इसके अलावा जनता दल सेक्युलर यानी JDS भी राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। इसके बाद सिद्धारमैया मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री बने।
तब से कांग्रेस राज्य में अपनी सत्ता और संगठन दोनों को मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
शिवकुमार की संगठन पर नजर
डीके शिवकुमार को कर्नाटक कांग्रेस के मजबूत संगठनकर्ताओं में गिना जाता है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में वह पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और नेताओं को साथ जोड़ने में सक्रिय रहे हैं।
दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को कांग्रेस में शामिल कराने की रणनीति भी इसी राजनीतिक विस्तार का हिस्सा मानी जा रही है।
लेकिन कांग्रेस के लिए चुनौती यह भी होगी कि बाहर से आने वाले नेताओं और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। कई बार नए नेताओं के आने से टिकट और पदों को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष भी पैदा हो सकता है।
स्थानीय चुनावों पर भी नजर
कर्नाटक में स्थानीय निकायों और अन्य चुनावों को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। जमीनी स्तर पर मजबूत नेताओं का किसी पार्टी में शामिल होना स्थानीय चुनावी समीकरण बदल सकता है।
यही कारण है कि पूर्व विधायकों, स्थानीय नेताओं और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों की गतिविधियों पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नजर रहती है।
क्या वाकई कांग्रेस में जाएंगे कई और नेता?
डीके शिवकुमार ने कई नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने का दावा जरूर किया है, लेकिन जब तक संबंधित नेता औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता नहीं लेते, तब तक इसे राजनीतिक दावा ही माना जाएगा।
आने वाले दिनों में अगर बीजेपी या अन्य दलों के और प्रभावशाली नेता कांग्रेस में शामिल होते हैं तो शिवकुमार का दावा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
वहीं अगर बड़े स्तर पर कोई बदलाव नहीं होता तो बीजेपी इसे कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी के रूप में पेश कर सकती है।
कर्नाटक में बढ़ेगी सियासी हलचल
पूर्व विधायक के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कर्नाटक की राजनीति में नए सिरे से हलचल शुरू हो गई है। कांग्रेस इसे अपनी बढ़ती ताकत के रूप में पेश कर रही है, जबकि बीजेपी के लिए यह अपने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है।
सबसे ज्यादा चर्चा डीके शिवकुमार के उस दावे की हो रही है कि कई और नेता कांग्रेस में आने के लिए तैयार हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में कौन से नेता वास्तव में पाला बदलते हैं और इससे कर्नाटक के राजनीतिक समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।
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