
Karnataka कर्नाटक: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकार इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने यह बात बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही, जहां वे चुनाव आयोग को NDA की शिकायत से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे।
शिवकुमार ने कहा कि सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और SIR प्रक्रिया चुनाव आयोग की जिम्मेदारी के तहत आती है। इसलिए राज्य सरकार इसमें किसी भी तरह से दखल नहीं देगी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल सरकार द्वारा इस प्रक्रिया को लेकर की जा रही जागरूकता गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं, जबकि सरकार का उद्देश्य केवल जनता को सही जानकारी देना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस बात से परेशान है कि सरकार गरीबों और अल्पसंख्यकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, सरकार की यह पहल समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के लिए है, जिसे कुछ राजनीतिक दल गलत तरीके से देख रहे हैं।
चुनाव आयोग द्वारा संचालित SIR प्रक्रिया को लेकर हाल ही में NDA की ओर से भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवकुमार ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और सरकार उसकी कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करती।
उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 4.5 करोड़ लोगों को जाति और आय प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं, जिन्हें अब ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा भी दी गई है। यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर उठाया गया है। शिवकुमार ने दावा किया कि इससे आम जनता को सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।
उनका कहना था कि विपक्ष इस बात से चिंतित है कि सरकार द्वारा जागरूकता फैलाने से गरीब और कमजोर वर्ग के लोग अधिक लाभ उठा पाएंगे। उन्होंने इसे विपक्ष की “चिंता” नहीं बल्कि “राजनीतिक असहजता” बताया। शिवकुमार के अनुसार, सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र नागरिक को उसका अधिकार समय पर मिले।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के तहत चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। जहां एक ओर विपक्षी दल अनियमितताओं और प्रक्रिया में खामियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार इसे पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित प्रक्रिया बता रही है।
शिवकुमार ने यह भी कहा कि सरकार का काम लोगों को सुविधाएं देना है, न कि किसी भी प्रक्रिया को बाधित करना। उन्होंने दोहराया कि SIR पूरी तरह से चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और इसमें राज्य सरकार की भूमिका सीमित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहा यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, क्योंकि विपक्ष और सरकार दोनों अपने-अपने रुख पर कायम हैं। जहां विपक्ष इसे लेकर जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार इसे जनहित में उठाया गया कदम बता रही है।
कुल मिलाकर, डीके शिवकुमार का यह बयान कर्नाटक की राजनीतिक बहस को और स्पष्ट दिशा देता है कि राज्य सरकार SIR प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी और इसका संचालन पूरी तरह चुनाव आयोग के दायरे में रहेगा।





