कर्नाटक

नौकरी के लिए पलायन के बजाय अपने शहर में शुरू करें कारोबार

Kavita2
5 Oct 2026 11:00 AM IST
नौकरी के लिए पलायन के बजाय अपने शहर में शुरू करें कारोबार
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बेंगलुरु। डी.के. शिवकुमार ने तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों से रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर जाने के बजाय अपने क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर कारोबार शुरू करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने ऐसे क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पर्यटन नीति तैयार की है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

शिवकुमार रविवार को बेंगलुरु के उल्लाल स्थित कोडगु गौड़ा समाज हॉल में आयोजित 'कैला मुहुर्त जंबारा 2026' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने रोजगार, पर्यटन, संस्कृति, परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़े रहने के महत्व पर विस्तार से बात की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कोडगु क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल हुए। शिवकुमार ने बेंगलुरु में रह रहे कोडगु के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के साथ अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा, "आप सभी कोडगु से आए हैं और बेंगलुरु में रह रहे हैं। अगर आप अपनी जड़ों को भूल जाएंगे, तो आपको सफलता नहीं मिलेगी।"

उन्होंने पेड़ और उसकी जड़ों का उदाहरण देते हुए संस्कृति और आस्था के महत्व को समझाया। शिवकुमार ने कहा, "जैसे पेड़ के लिए जड़ें जरूरी होती हैं, वैसे ही इंसान के लिए आस्था जरूरी है।" उन्होंने समुदाय के लोगों द्वारा अपनी संस्कृति और विरासत को संरक्षित रखने के प्रयासों की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि एक ही समाज के लोगों का एक मंच पर आना और अपनी संस्कृति, कस्बे, विरासत तथा सामाजिक पहचान को जोड़कर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है। शिवकुमार ने कोडगु गौड़ा समाज के लिए तैयार किए गए ढांचे और आयोजन से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन केवल सामाजिक मेल-मिलाप तक सीमित नहीं रहते, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का माध्यम भी बनते हैं। उन्होंने आयोजन को आगे बढ़ाने के लिए मेहनत करने वाले लोगों को बधाई दी।

अपने संबोधन में शिवकुमार ने स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि तटीय और पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं का सही तरीके से उपयोग करके स्थानीय स्तर पर कारोबार और रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

उनका कहना था कि रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए। लोग अपने मूल क्षेत्रों में मौजूद संसाधनों के आधार पर व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। पर्यटन से जुड़े छोटे और मध्यम कारोबार स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभा सकते हैं।

पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय खानपान, संस्कृति, परंपराएं और विशिष्ट जीवनशैली पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। इन संसाधनों को व्यवस्थित तरीके से पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर तैयार हो सकते हैं।

शिवकुमार ने कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पर्यटन नीति तैयार की है। इसका मकसद पर्यटन की संभावनाओं वाले क्षेत्रों को सशक्त बनाना और वहां स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। उन्होंने लोगों से सरकारी प्रयासों के साथ जुड़कर अपने क्षेत्र की संभावनाओं का उपयोग करने का आह्वान किया।

उन्होंने स्थानीय स्तर पर कारोबार शुरू करने को केवल आर्थिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र से जुड़े रहने के एक माध्यम के रूप में भी प्रस्तुत किया। उनके मुताबिक लोग यदि अपने कस्बों और गांवों में उपलब्ध अवसरों का उपयोग करते हैं तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ रोजगार के लिए पलायन पर निर्भरता भी कम हो सकती है।

कार्यक्रम के दौरान संस्कृति और विकास के बीच संतुलन बनाने की बात भी सामने आई। शिवकुमार ने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ लोगों को अपनी परंपराओं और सामाजिक पहचान को बनाए रखना चाहिए। आधुनिक जीवन और रोजगार की जरूरतों के कारण लोग दूसरे शहरों में जाते हैं, लेकिन इससे अपनी मूल संस्कृति से रिश्ता खत्म नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बेंगलुरु में रह रहे कोडगु समुदाय के लोगों द्वारा सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को जारी रखने की सराहना की। उनका कहना था कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने से नई पीढ़ी को भी अपनी विरासत के बारे में जानने का अवसर मिलता है।

'कैला मुहुर्त जंबारा 2026' जैसे कार्यक्रमों को उन्होंने समुदाय को एक साथ लाने वाला मंच बताया। शिवकुमार ने कहा कि समाज के लोगों ने अपनी संस्कृति, कस्बे और विरासत को एक साथ जोड़ते हुए जो व्यवस्था विकसित की है, वह प्रशंसनीय है।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्थानीय युवाओं को भी स्वरोजगार की संभावनाओं पर ध्यान देने का संदेश दिया। खासकर प्राकृतिक और पर्यटन संसाधनों वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्यम शुरू करने की संभावनाओं को तलाशने पर उन्होंने जोर दिया।

सरकार की पर्यटन नीति का उल्लेख करते हुए शिवकुमार ने कहा कि इसका उद्देश्य पर्यटन क्षेत्रों को आर्थिक रूप से मजबूत करने में मदद करना है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

उन्होंने समुदाय के लोगों से अपनी पहचान और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील भी की। उनके अनुसार किसी भी समाज की मजबूती केवल आर्थिक स्थिति से तय नहीं होती, बल्कि उसकी संस्कृति, आस्था और अपनी जड़ों से जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

कार्यक्रम में शिवकुमार का मुख्य संदेश स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्वरोजगार और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने पर केंद्रित रहा। उन्होंने तटीय और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों से अपने इलाकों में उपलब्ध संभावनाओं को पहचानने और उन्हें कारोबार तथा रोजगार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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