
बेंगलुरु। कर्नाटक विधानमंडल के चल रहे मॉनसून सत्र में योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। कथित घोटाले में मंत्री की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) [JD(S)] गठबंधन ने लगातार पांच दिनों तक सदन के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन किया। अब विपक्षी गठबंधन सप्ताहांत के दौरान आगे की रणनीति पर चर्चा कर सरकार पर दबाव बढ़ाने की तैयारी में है।
विपक्ष का कहना है कि जब तक बी. नागेंद्र अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक इस मुद्दे पर उसका आंदोलन जारी रहेगा। BJP-JD(S) नेताओं का आरोप है कि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और मंत्री को पद पर बनाए रखने के बजाय निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करना चाहिए।
पांच दिनों से सदन में विरोध
मॉनसून सत्र शुरू होने के बाद से विपक्षी सदस्यों ने कई मौकों पर सदन की कार्यवाही के दौरान नारेबाजी की। BJP और JD(S) के विधायकों ने अपने कपड़ों पर शॉल ओढ़कर, हाथों में प्लेकार्ड लेकर और लगातार नारे लगाकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का कहना है कि उसका आंदोलन केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि कथित घोटाले को लेकर सरकार से जवाब मांगने का माध्यम है।
विरोध के कारण सदन की सामान्य कार्यवाही कई बार प्रभावित हुई। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच अध्यक्ष को कार्यवाही चलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। हालांकि, सत्तारूढ़ कांग्रेस ने भी विपक्ष के दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया और सदन की कार्यवाही को निर्धारित तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश की।
विपक्षी सदस्यों ने सदन के बाहर भी प्रदर्शन किया। विधानमंडल परिसर के आसपास सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए BJP-JD(S) नेताओं ने मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांग पर स्पष्ट फैसला नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कांग्रेस भी पीछे हटने को तैयार नहीं
विपक्ष के लगातार विरोध के बावजूद सत्तारूढ़ कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट रखा है। सरकार ने विपक्ष की मांग को स्वीकार करने के बजाय सदन में चर्चा और विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान कुछ मुद्दों पर चर्चा हुई और कई विधेयक पेश किए गए, जिनमें से कुछ को पारित भी कराया गया।
सत्तापक्ष का रुख है कि विपक्ष को सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय उपलब्ध संसदीय प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करना चाहिए। सरकार का तर्क है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों के आधार पर विपक्ष को सदन का कामकाज रोकने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
इस टकराव के कारण मॉनसून सत्र का बड़ा हिस्सा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ विपक्ष मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा है, तो दूसरी ओर सरकार सदन की कार्यवाही चलाने पर जोर दे रही है।
सप्ताहांत में बनेगी रणनीति
पांच दिनों के विरोध के बाद BJP-JD(S) गठबंधन अब सप्ताहांत में बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार कर सकता है। माना जा रहा है कि विपक्षी दल यह तय करेंगे कि आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाया जाए और सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं।
रणनीति में सदन के भीतर विरोध जारी रखने के साथ-साथ विधानमंडल परिसर के बाहर प्रदर्शन को और व्यापक करने पर चर्चा हो सकती है। विपक्ष यह भी तय कर सकता है कि आने वाले दिनों में किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाए और कथित घोटाले को लेकर सरकार से किस तरह जवाब मांगा जाए।
BJP और JD(S) के बीच इस मुद्दे पर समन्वय विपक्षी एकजुटता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों ने मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर एक साझा रुख अपनाया है। ऐसे में सप्ताहांत की बैठक से निकलने वाली रणनीति आने वाले सत्र के राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती है।
सदन चलाने की सरकार के सामने चुनौती
लगातार विरोध के बीच सरकार के लिए सदन की सामान्य कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना चुनौती बना हुआ है। विपक्ष अगर अपनी रणनीति पर कायम रहता है, तो आने वाले दिनों में भी प्रश्नकाल, चर्चा और विधेयकों पर बहस के दौरान हंगामे की स्थिति बन सकती है।
हालांकि, कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह विपक्ष के दबाव में कामकाज रोकने के पक्ष में नहीं है। सरकार की कोशिश है कि महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जाए और सदन के एजेंडे के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए।
इस बीच विपक्ष का कहना है कि वह सरकार को तब तक घेरता रहेगा जब तक मंत्री के इस्तीफे और कथित घोटाले से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर कायम रहने से गतिरोध खत्म होने के तत्काल संकेत नहीं दिख रहे हैं।
राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार
बी. नागेंद्र के इस्तीफे का मुद्दा अब केवल एक मंत्री के पद से जुड़े सवाल तक सीमित नहीं रह गया है। यह कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी BJP-JD(S) गठबंधन के बीच व्यापक राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन चुका है।
विपक्ष इस मामले को सरकार की कथित जवाबदेही और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान के रूप में पेश कर रहा है, जबकि कांग्रेस का जोर सदन की कार्यवाही और विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना फिलहाल सीमित नजर आ रही है।
अब सबकी निगाहें सप्ताहांत में BJP-JD(S) गठबंधन की संभावित बैठक और उसमें तय होने वाली रणनीति पर टिकी हैं। यदि विपक्ष आंदोलन को और तेज करने का फैसला करता है, तो मॉनसून सत्र के अगले चरण में सदन के भीतर हंगामा और बढ़ सकता है। वहीं, यदि सरकार और विपक्ष के बीच किसी स्तर पर बातचीत शुरू होती है, तो गतिरोध खत्म करने का रास्ता भी निकल सकता है।
फिलहाल पांच दिनों के विरोध के बाद कर्नाटक विधानसभा का मॉनसून सत्र एक अहम राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है। बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग पर सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, यह सप्ताहांत की रणनीति से काफी हद तक तय होगा।





