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कर्नाटक में गंभीर सूखे से बिगड़े हालात, किसानों को राहत देने के लिए कर्ज लेने को तैयार सरकार

Kavita2
9 Oct 2026 10:26 AM IST
कर्नाटक में गंभीर सूखे से बिगड़े हालात, किसानों को राहत देने के लिए कर्ज लेने को तैयार सरकार
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बेंगलुरु। कर्नाटक पिछले कई दशकों की सबसे गंभीर सूखा परिस्थितियों में से एक का सामना कर रहा है। राज्य में सूखे का दायरा लगातार बढ़ रहा है और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार को यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट की स्थिति में किसानों को राहत देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर इसके लिए कर्ज लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने यादगिरि जिले के येलाबुर्गा तालुक के गुन्नल गांव में सूखे की स्थिति का जायजा लेने के बाद संवाददाताओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विकास कार्यों को पूरी तरह बंद नहीं किया है, हालांकि सूखे से निपटने के उपायों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण कुछ परियोजनाओं में देरी हो सकती है। सरकार के अनुसार, फिलहाल सूखे से प्रभावित इलाकों में राहत और किसानों की सहायता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

परमेश्वर ने कहा कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है और सूखे से निपटने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है। इसके बावजूद यदि हालात की मांग हुई, तो किसानों को राहत देने के लिए अतिरिक्त उधार लेने का विकल्प भी खुला है।

217 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया

कर्नाटक में सूखे की स्थिति का विस्तार तेजी से हुआ है। राज्य सरकार अब तक 217 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है। उपमुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले समय में कुछ और तालुकों को भी इस सूची में शामिल किया जा सकता है।

सूखे की गंभीरता उत्तर कर्नाटक के क्षेत्रों में विशेष रूप से देखी जा रही है। इन इलाकों में बारिश की कमी के कारण कृषि गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है। किसानों के सामने फसलों की देखभाल, पानी की उपलब्धता और खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है।

सरकार की ओर से सूखाग्रस्त घोषित किए गए क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों की जरूरतों के अनुसार राहत उपायों को आगे बढ़ाया जा सके। तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करना राहत संबंधी कदमों की योजना बनाने में महत्वपूर्ण माना जाता है।

किसानों की राहत के लिए कर्ज लेने को तैयार सरकार

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि सूखे से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर सरकार उधार लेकर भी राहत उपायों को जारी रख सकती है।

उनके अनुसार, राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है और मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए धन की व्यवस्था की गई है। हालांकि, यदि सूखे का असर और बढ़ता है या अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ती है, तो किसानों की मदद के लिए कर्ज लेने का विकल्प अपनाया जा सकता है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब राज्य के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। ऐसे में किसानों को राहत उपलब्ध कराना सरकार के लिए प्रमुख चुनौती बन गया है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री ने यह नहीं बताया कि सरकार कितनी राशि उधार लेने पर विचार कर रही है या किसानों को राहत देने के लिए कौन-कौन से नए वित्तीय उपाय लागू किए जाएंगे।

विकास कार्य पूरी तरह बंद नहीं होंगे

सूखे की स्थिति के बीच विकास परियोजनाओं को लेकर भी उपमुख्यमंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसी भी चल रहे विकास कार्य को पूरी तरह नहीं रोका है। कुछ परियोजनाओं में देरी संभव है, क्योंकि मौजूदा संकट में सूखा प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

सरकार के सामने एक ओर किसानों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर विकास कार्यों को जारी रखने की चुनौती भी है। ऐसे में वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करने पर जोर दिया जा रहा है।

परमेश्वर ने कहा कि सूखे से निपटने के लिए पर्याप्त धन है और सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए राहत कार्यों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों की मदद करने के लिए आवश्यक होने पर अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाए जा सकते हैं।

उत्तर कर्नाटक में हालात गंभीर

उपमुख्यमंत्री ने उत्तर कर्नाटक में सूखे की स्थिति को गंभीर बताया। इस क्षेत्र में पानी की कमी और बारिश के अभाव से कृषि पर दबाव बढ़ने की आशंका है। गुन्नल गांव के दौरे के दौरान परमेश्वर ने स्थानीय स्थिति का जायजा लिया और सूखे की व्यापकता पर चिंता जताई।

राज्य सरकार पहले ही 217 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर चुकी है। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, आगे और क्षेत्रों को इस सूची में शामिल किया जा सकता है। इससे स्पष्ट है कि राज्य में सूखे की समस्या व्यापक है और इसकी स्थिति का लगातार आकलन करना जरूरी है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रभावित किसानों की संख्या, फसल नुकसान का कुल अनुमान और राहत राशि का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इन पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद राज्य में सूखे के आर्थिक प्रभाव का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा।

सूखे से निपटना सरकार की प्राथमिकता

कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच सरकार ने किसानों को राहत देने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए राहत उपाय किए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर कर्ज लेकर भी किसानों की मदद की जाएगी।

राज्य में अब तक 217 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है और आने वाले दिनों में इस संख्या में वृद्धि हो सकती है। वहीं, विकास कार्यों को जारी रखने की बात कहते हुए सरकार ने संकेत दिया है कि सूखे से निपटने के लिए संसाधनों का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

फिलहाल, सरकार की नजर सूखे की स्थिति और प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों पर है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राहत उपायों के लिए कितने अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ती है और किसानों तक सहायता पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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