कर्नाटक

SIR खत्म करो बैलेट पेपर से कराओ चुनाव डीके शिवकुमार की मांग

Ratna Netam
12 Oct 2026 9:25 PM IST
SIR खत्म करो बैलेट पेपर से कराओ चुनाव डीके शिवकुमार की मांग
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बेंगलुरु। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। इसी बीच कर्नाटक के नेता डीके शिवकुमार ने सोमवार को SIR प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर INDIA गठबंधन का विरोध केवल विपक्षी दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर के लोगों की चिंताओं को सामने लाता है। शिवकुमार ने चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के स्थान पर बैलेट पेपर यानी मतपत्र से मतदान की व्यवस्था दोबारा लागू करने की भी मांग उठाई।शिवकुमार ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर लोगों में चिंताएं हैं और इस प्रक्रिया को समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए इसे देश की आवाज बताया। उनका कहना था कि चुनावी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।हालांकि, SIR और चुनावी गड़बड़ियों से संबंधित उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है। निर्वाचन आयोग की ओर से इन टिप्पणियों पर किसी ताजा प्रतिक्रिया का विवरण भी सामने नहीं आया है।
SIR प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म करने की मांग
डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया समाप्त की जानी चाहिए।उन्होंने इस मुद्दे को चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता और मतदाताओं की चिंताओं से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।शिवकुमार के अनुसार, SIR को लेकर उठाए जा रहे सवाल केवल INDIA गठबंधन के नेताओं के नहीं हैं, बल्कि देश के लोगों की चिंताओं को भी दर्शाते हैं।उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को जारी रखने के बजाय पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए।हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने SIR को समाप्त करने के लिए किसी विशिष्ट कानूनी प्रक्रिया या वैकल्पिक मतदाता सूची पुनरीक्षण व्यवस्था का विवरण नहीं दिया।
INDIA गठबंधन के विरोध को बताया देश की आवाज
डीके शिवकुमार ने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया।उन्होंने कहा कि इस विरोध को केवल राजनीतिक गठबंधन के आंदोलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।शिवकुमार ने कहा, "यह सिर्फ INDIA गठबंधन की बात नहीं है; यह इस देश की आवाज है। सभी चाहते हैं कि SIR को खत्म किया जाए। जो लोग इसके बाद चुनाव जीते हैं... SIR को खत्म किया जाना चाहिए और बैलेट पेपर की व्यवस्था को फिर से लागू किया जाना चाहिए।"उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वह मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मतदान प्रणाली, दोनों में बदलाव की मांग कर रहे हैं।हालांकि, देश के सभी नागरिक SIR समाप्त करने के पक्ष में हैं, यह उनके बयान में किया गया दावा है। उपलब्ध जानकारी में इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई सर्वेक्षण या अन्य प्रमाण शामिल नहीं है।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
शिवकुमार ने SIR प्रक्रिया समाप्त करने के साथ बैलेट पेपर से मतदान की पुरानी व्यवस्था फिर लागू करने की मांग भी की।भारत में वर्तमान समय में अधिकांश संसदीय और विधानसभा चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के माध्यम से कराए जाते हैं।बैलेट पेपर व्यवस्था में मतदाता कागजी मतपत्र पर अपना मत दर्ज करते हैंशिवकुमार ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मतपत्र प्रणाली को वापस लाने की आवश्यकता बताई।हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने बैलेट पेपर व्यवस्था लागू करने के लिए कोई विस्तृत प्रस्ताव या समयसीमा प्रस्तुत नहीं की।मतदान प्रणाली में किसी भी व्यापक बदलाव के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों और चुनावी प्रक्रियाओं पर विचार करना आवश्यक होगा।
क्या है मतदाता सूची का SIR?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है।इसका उद्देश्य निर्धारित नियमों के अनुसार मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना होता है।इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने, गलत प्रविष्टियों को सुधारने और नियमों के अनुसार अपात्र या दोहराई गई प्रविष्टियों की पहचान करने जैसे कार्य किए जा सकते हैं।हालांकि, मतदाता सूची से किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाए जाने की आशंका गंभीर विषय है।ऐसे मामलों में संबंधित चुनावी नियमों के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।डीके शिवकुमार ने इसी प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताते हुए इसे पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है।
चुनावी अनियमितताओं के आरोपों पर विवाद
शिवकुमार ने अपने बयान में चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन का विरोध इन मुद्दों को लेकर देशभर के लोगों की चिंताओं को दर्शाता है।हालांकि, उनके उपलब्ध बयान में किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र, चुनाव परिणाम या मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।इसलिए इन आरोपों को किसी विशिष्ट चुनाव में अनियमितता साबित होने के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।चुनावी प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों की जांच निर्धारित कानूनी व्यवस्था और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से की जाती है।ऐसे मामलों में आरोपों और प्रमाणित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है।
मतदाता अधिकारों को लेकर उठ रहे सवाल
मतदाता सूची और मतदान व्यवस्था से संबंधित विवादों का सीधा संबंध चुनावी प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी से है।भारत में निर्धारित आयु और कानूनी पात्रता पूरी करने वाले नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं।मतदाता सूची में नाम दर्ज होना चुनाव में मतदान करने की महत्वपूर्ण शर्त है।इसलिए सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने की प्रक्रिया का पारदर्शी होना आवश्यक है।डीके शिवकुमार ने SIR समाप्त करने की मांग करते हुए इसी व्यापक चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।हालांकि, मतदाता सूची का पुनरीक्षण स्वयं चुनावी प्रशासन का एक निर्धारित कार्य है। किसी विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया में अनियमितता हुई है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही किया जा सकता है।
विपक्ष की मांगों में दो प्रमुख मुद्दे
शिवकुमार के सोमवार के बयान में दो प्रमुख मांगें सामने आई हैं।पहली मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को पूरी तरह समाप्त करने की है।दूसरी मांग चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान की व्यवस्था दोबारा लागू करने की है।उन्होंने दोनों मुद्दों को चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोपों से जोड़ा।शिवकुमार ने कहा कि INDIA गठबंधन का विरोध देश के लोगों की आवाज है और इसे केवल राजनीतिक दलों का प्रदर्शन नहीं माना जाना चाहिए।हालांकि, इन मांगों पर निर्वाचन आयोग या केंद्र सरकार की ओर से किसी नए निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
चुनाव आयोग के रुख पर भी रहेगी नजर
भारत निर्वाचन आयोग मतदाता सूची और चुनाव संचालन से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाता है।SIR जैसी पुनरीक्षण प्रक्रियाओं और मतदान व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवालों पर आयोग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होता है।डीके शिवकुमार की मांग के बाद यह देखना होगा कि संबंधित संस्थाओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।फिलहाल उपलब्ध जानकारी में निर्वाचन आयोग की ओर से शिवकुमार के सोमवार के बयान पर किसी प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।इसी तरह बैलेट पेपर व्यवस्था दोबारा लागू करने के संबंध में भी किसी नए आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
SIR और बैलेट पेपर पर राजनीतिक चर्चा तेज
डीके शिवकुमार के बयान ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मतदान प्रणाली से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।उन्होंने सोमवार को स्पष्ट रूप से SIR समाप्त करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग रखी।साथ ही INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को देशभर के लोगों की चिंताओं का प्रतिनिधित्व करने वाला बताया।हालांकि, इन मांगों पर आगे क्या निर्णय होगा, यह संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।फिलहाल शिवकुमार के बयान से यह स्पष्ट है कि विपक्षी गठबंधन चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहा है।
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