कर्नाटक

बेंगलुरु में SIR प्रक्रिया तेज, 1,117 अतिरिक्त सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी नियुक्त

Kavita2
7 Oct 2026 10:32 AM IST
बेंगलुरु में SIR प्रक्रिया तेज, 1,117 अतिरिक्त सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी नियुक्त
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर बढ़े राजनीतिक विवाद और वोटरों के नाम चुनिंदा तरीके से हटाने के आरोपों के बीच प्रशासन ने प्रक्रिया तेज करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी यानी GBA क्षेत्र में 1,117 अतिरिक्त असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। इसके बाद SIR से जुड़े काम में लगे अधिकारियों की कुल संख्या बढ़कर 1,193 हो गई है।

स्पेशल कमिश्नर (चुनाव) शिल्पा नाग ने मंगलवार को बेंगलुरु अर्बन जिले में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े दावों और आपत्तियों की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची में सुधार और नोटिस की सुनवाई के लिए GBA क्षेत्र में कुल 814 सुनवाई केंद्र बनाए गए हैं। अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती का उद्देश्य लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना और तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करना है।

SIR को लेकर पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक की राजनीति गरमाई हुई है। विपक्षी दलों और राजनीतिक संगठनों की ओर से आरोप लगाए गए हैं कि कुछ मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में Form-7 आवेदन दाखिल किए गए। कुछ मामलों में पुलिस से शिकायतें भी की गई हैं। हालांकि कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने स्पष्ट किया है कि अब तक केवल किसी आपत्ति के आधार पर किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया गया है। किसी भी नाम को हटाने से पहले निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी की जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।

शिल्पा नाग के मुताबिक GBA क्षेत्र में 56 लाख से अधिक मतदाता हैं और SIR के तहत 24 लाख से अधिक नोटिस तैयार किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी नोटिसों को संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाने का काम पूरा किया जा चुका है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर न रहे।

फिलहाल करीब 3.70 लाख नोटिस की सुनवाई लंबित बताई गई है। इतने बड़े पैमाने पर लंबित मामलों को देखते हुए माइक्रो प्लानिंग की गई है। अतिरिक्त AERO की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है। प्रशासन की कोशिश है कि हर दावे और आपत्ति की जांच नियमों के अनुसार हो तथा मतदाताओं को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

चुनाव आयोग ने नोटिस की सुनवाई के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी तय की है। इसके मुताबिक यदि SIR के दौरान किसी मतदाता को ‘Unmapped’ या ‘Logical Discrepancies’ के आधार पर नोटिस जारी हुआ है या Form-6 तथा Form-7 से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है, तो ERO या बूथ लेवल अधिकारी मतदाता के घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर सकते हैं। इसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता को जरूरी नहीं कि व्यक्तिगत रूप से सुनवाई केंद्र पर उपस्थित होना पड़े। विशेष परिस्थितियों में सुनवाई ऑनलाइन भी की जा सकती है।

SIR प्रक्रिया के दौरान Form-6 नए मतदाता के नाम जोड़ने, Form-7 किसी नाम पर आपत्ति या नाम हटाने के अनुरोध और Form-8 विवरण में सुधार के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बेंगलुरु में अब तक Forms 6, 7 और 8 से जुड़े कुल 5,42,893 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 1,02,712 आवेदनों को स्वीकार किया जा चुका है, जबकि करीब 3,89,698 आवेदन लंबित हैं। लंबित आवेदनों का निपटारा चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किया जाना है।

Form-7 को लेकर ही सबसे अधिक राजनीतिक विवाद सामने आया है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार राज्य में 91,278 Form-7 आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन अब तक इनमें से किसी भी आपत्ति के आधार पर सीधे किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी आवेदन का आना अपने आप में नाम हटाने का आधार नहीं है और अंतिम फैसला जांच के बाद ही लिया जाता है।

राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। कुछ विपक्षी नेताओं ने बड़े पैमाने पर नाम हटाने के प्रयास का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा और जद(एस) नेताओं ने कुछ पुलिस शिकायतों को अनुचित बताते हुए चुनाव अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। ऐसे में निर्वाचन अधिकारियों के सामने SIR प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के साथ उसकी निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।

चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके और पहली बार मतदाता बनने के योग्य लोगों के साथ उन पात्र नागरिकों को Form-6 उपलब्ध कराया जाए, जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद विशेष अभियान और कैंप आयोजित कर ऐसे पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल कराने की योजना है।

बेंगलुरु में SIR के लिए जारी कार्यक्रम के अनुसार ड्राफ्ट मतदाता सूची 24 अगस्त को प्रकाशित की गई थी। दावे और आपत्तियां दाखिल करने का समय 23 सितंबर तक था, जबकि इनका निपटारा 22 अक्टूबर तक किया जाना है। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है।

1,117 अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति को इसी समयसीमा को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि बड़ी संख्या में लंबित आवेदनों और नोटिस की सुनवाई समय पर हो और किसी पात्र मतदाता को प्रक्रिया के कारण परेशानी न उठानी पड़े।

फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है, लेकिन चुनाव अधिकारियों ने साफ किया है कि मतदाता सूची से किसी भी नाम को हटाने से पहले जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। GBA में 814 सुनवाई केंद्र और कुल 1,193 अधिकारियों की तैनाती के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि लंबित मामलों का निपटारा कितनी तेजी से होता है और 27 अक्टूबर तक अंतिम मतदाता सूची कितनी सुचारु रूप से तैयार हो पाती है।

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